SAIL ग्रेच्युटी सुनवाई में नया मोड़, ‘न्यायालय में विचाराधीन’ कह कर बच नहीं पाया BSP

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सीटू का तर्क- ग्रेच्युटी पर समझौता नहीं है विचाराधीन। अगली पेशी में प्रस्तुत करना होगा कॉरपोरेट का जवाब।
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-सेल कर्मियों को मिलने वाला असीमित ग्रेच्युटी 28 अक्टूबर 1970 को हस्ताक्षर की गई पहले एनजेसीएस समझौते की देन है।
-सेल कर्मियों को प्राप्त होने वालीअसीमित ग्रेच्युटी को कानूनी संरक्षण है।
-कर्मियों को देय ग्रेच्युटी से कम ग्रेच्युटी देना ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम का उल्लंघन है।

सूचनजी न्यूज, भिलाई। ग्रेच्युटी कटौती मामले में सीटू द्वारा दायर परिवाद में प्रबंधन द्वारा मामले को टालने की रणनीति अब काम नहीं आ रहा है। हिन्दुस्तान स्टील इम्प्लाइज यूनियन भिलाई (सीटू) द्वारा दायर परिवाद में सोमवार को उप मुख्य श्रमायुक्त रायपुर के समक्ष सुनवाई हुई, जिसमें प्रबंधन की ओर से महाप्रबंधक जेएन ठाकुर एवं महाप्रबंधक अनुराधा सिंह तथा यूनियन की ओर से महासचिव एसपी डे उपस्थित हुए।

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‘न्यायालय में विचाराधीन’ कह कर बचने की कोशिश

सीटू का कहना है कि प्रबंधन मामले को न्यायालय में विचाराधीन कह कर अपना पक्ष रखने से बचने की कोशिश की। इस पर यूनियन की ओर से महासचिव एसपी डे ने अपना तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि न्यायालय में ग्रेच्युटी पर एनजेसीएस समझौता ना तो विचाराधीन है और ना ही सेल कर्मियों को एनजेसीएस समझौते के अनुसार असीमित ग्रेच्युटी मिलने पर कोई विवाद है। अतः प्रबंधन को सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को उनके अंतिम मूल वेतन एवं डीए पर गणना अनुसार बिना किसी सीमा के ग्रेच्युटी भुगतान करने में कोई वैधानिक अड़चन नहीं है।

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अगली पेशी में प्रस्तुत करना होगा कॉरपोरेट प्रबंधन का जवाब

सीटू महासचिव द्वारा प्रस्तुत किए गए तर्क से सहमत होते हुए उप मुख्य श्रमायुक्त आरके पुरोहित ने प्रबंधन को परामर्श दिया है कि अगली पेशी है वह सीटू नेता द्वारा उठ गए सवाल पर कॉरपोरेट प्रबंधन का जवाब प्रस्तुत करें।

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पूरे मामले में सीटू का तर्क

सेल कर्मियों को मिलने वाला असीमित ग्रेच्युटी 28 अक्टूबर 1970 को हस्ताक्षर की गई पहले एनजेसीएस समझौते की देन है, जिसे बाद के हर एनजेसीएस समझौते में भी शामिल किया गया है।

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1972 में बनी ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम की धारा 4 के अनुसार यूनियन तथा प्रबंधन के बीच समझौते द्वारा बेहतर शर्तों के साथ ग्रेच्युटी प्राप्त करने वाले कर्मचारियों पर ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। अर्थात सेल कर्मियों को प्राप्त होने वालीअसीमित ग्रेच्युटी को कानूनी संरक्षण है। प्रबंधन द्वारा समझौते के तहत कर्मियों को देय ग्रेच्युटी से कम ग्रेच्युटी देना ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम का उल्लंघन है।

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श्रम विधानों का पालन करना स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी

सीटू महासचिव ने कहा कि कॉरपोरेट द्वारा जारी आदेश को लागू करते समय वह विधि सम्मत है यह सुनिश्चित करना स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी है। कॉरपोरेट प्रबंधन की जिम्मेदारी कंपनी एक्ट का पालन करना है जबकि स्थानीय प्रबंधन की जिम्मेदारी उन सभी कानूनों का अनुपालन करना है, जिसका फैक्ट्री एवं फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों कर्मचारियों से संबंध है। जैसे फैक्ट्री एक्ट, मजदूरी भुगतान अधिनियम, भविष्य निधि भुगतान अधिनियम, ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, बोनस भुगतान अधिनियम आदि।

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यदि सेल कार्पोरेट कार्यालय के आदेशानुसार प्रबंधन सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के ग्रेच्युटी में किसी भी तरह की कटौती करती है तो यह उपादान भुगतान अधिनियम 1972 का उल्लंघन होगा। अतः प्रबंधन को इस तरह के किसी भी कानूनी उल्लंघन से बचना चाहिए।

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एक्ट बनने से पहले से कर्मियों को एनजेसीएस में मिला ग्रेच्युटी का अधिकार

सीटू नेता ने कहा कि ग्रेच्युटी एक्ट 1972 में बना किंतु ग्रेच्युटी एक्ट बनने से काफी पहले इस्पात कर्मियों को 28 अक्टूबर 1970 को हुए पहले एनजेसीएस समझौता के माध्यम से यह अधिकार प्राप्त हुआ है।

सिर्फ इस्पात कर्मियों को अब तक मिलता रहा असीमित ग्रेच्युटी

एनजेसीएस के प्रथम समझौता में प्राप्त असीमित ग्रेजुएटी को अब तक एनजेसीएस में हुए सभी समझौतों में बरकरार रखा गया। पिछले वेतन समझौता में भी प्रबंधन ने कहा था कि मंत्रालय से काफी दबाव है कि इस्पात कर्मियों की ग्रेच्युटी को भी अन्य कर्मियों की तरह किया जाए, किंतु एनजेसीएस के सभी यूनियनों के विरोध के कारण प्रबंधन द्वारा इसे सीमित नहीं किया जा सका।

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क्या है सेल कर्मियों के ग्रेच्युटी का मामला

ज्ञात हो कि सेल कारपोरेट कार्यालय से 26/11/2021 को जारी आदेश द्वारा सेल के कर्मियों की ग्रेच्युटी को भी सीलिंग कर दिया गया है। आदेश के अनुसार 31 अक्टूबर 2021 को या उससे पूर्व सेवानिवृत्त हुए कर्मियों को वेतन पुनर्निर्धारण पूर्व मूल वेतन तथा डीए के आधार सेल ग्रेच्युटी नियम की गणना अनुसार ग्रेच्युटी प्राप्त होगी, अर्थात 30 वर्ष के सेवा पर उन्हें (15/26)×(मूल वेतन+डीए)×(सेवा वर्ष) तथा 30 वर्ष के पश्चात प्रत्येक 1 वर्ष की सेवा काल पर 1 महीने की मूल वेतन व डीए के बराबर ग्रेच्युटी प्राप्त होगा।

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भविष्य में सेवानिवृत्त होने वाले जिन कर्मियों का ग्रेच्युटी 20 लाख के ऊपर बनेगा उनकी ग्रेच्युटी को 31 अक्टूबर 2021 को वेतन पुनर्निर्धारण पूर्व बेसिक और डीए के आधार पर की गई गणना अनुसार या 20 लाख या जो अधिक हो, पर सीमित कर दिया जाएगा।

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