NJCS Sub-Committee Meeting: आरआइएनएल व सेल की कुछ यूनिट में एडब्ल्यूए मिल रहा 1750 से 2500 तक, प्रबंधन वंचित यूनिटों में 435 से 625 रुपए करने का लाया फॉर्मूला

ठेका मजदूरों का तय नहीं होगा न्यूनतम वेतन और न बेसिक में मर्ज होगा एडब्ल्यूए। बैठक में बीएमएस, इंटक, सीटू, एचएमएस, एटक नेता मौजूद रहे।

सूचनाजी न्यूज भिलाई। ठेका मजदूरों के वेतन समझौते को लेकर दिल्ली में चली बैठक बेनतीजा खत्म हो गई। लेकिन विवाद शुरू हो गया है। सब-कमेटी बैठक से एक दिन पूर्व सेल इकाइयों में विरोध-प्रदर्शन किया गया था। भिलाई में हंगामा तक हो गया था। न्यूनतम वेतन तय नहीं होने से भड़के मजदूरों को हक दिलाने के लिए सड़क पर उतरने का संकेत दे दिया गया है। सीटू ने आंदोलन तेज करने की बात बोल दी है। सीटू का कहना है कि एडब्ल्यूए (अतिरिक्त कल्याण भत्ता) में मात्र 25% की वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया था। वर्तमान में सेल के अलग-अलग इकाईयों एवं आरआईएनएल में एडब्ल्यूए के रूप में ठेका कर्मियों को मिलने वाली राशि 1750 से 2500 रुपए तक है। अंततः प्रबंधन ने एडब्ल्यूए के रुप में 435 से 625 वेतन वृद्धि का प्रस्ताव दिया।

प्रबंधन ने दो टूक बोल दिया है कि न्यूनतम वेतन तय नहीं किया जा सकता है। तकनीकी कारणों का हवाला देकर प्रबंधन ने इस प्रस्ताव पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। साथ ही यह भी बोल दिया है कि एडब्ल्यूए की राशि को बेसिक में मर्ज नहीं किया जा सकता है। तकनीकी कारणों की वजह से ऐसा करना संभव नहीं है। इसलिए एडब्ल्यूए की राशि बढ़ाना उनके हाथ में है। यूनियन सुझाव दे कितना बढ़ाना है, उस पर चर्चा की जा सकती है।

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सेल प्रबंधन ने एडब्ल्यूए की राशि को 25 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव दिया, जिसे यूनियनों ने खारिज कर दिया है। एनजेसीएस यूनियनों ने प्रबंधन को जवाब दिया कि यहां वह न्यूनतम वेतन समझौता के लिए बैठे हैं, न कि एडब्ल्यूए की राशि तय करने। एडब्ल्यूए की राशि को बेसिक में मर्ज करने से ही ठेका मजदूरों का भला होगा। इसलिए मर्ज करना होगा। इसको लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस भी हुई।

नेशनल ज्वाइंट कमेटी फॉर स्टील इंडस्ट्री-एनजेसीएस की सब-कमेटी की बैठक में हिस्सा लेने के लिए यूनियन प्रतिनिधि सुबह 11 बजे पहुंच गए थे। ठेका मजदूरों के न्यूनतम वेतन की मांग सभी यूनियन के सदस्य कर रहे थे, लेकिन प्रबंधन सिर्फ एलाउंस बढ़ाने की बात करता रहा। सभी इकाइयों में सामान्य रूप से न्यूनतम वेतन लागू करने पर प्रबंधन तैयार नहीं है।

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दिनभर चर्चा करने के बाद कुछ तय नहीं हो सका। प्रबंधन की तरफ से बताया गया कि सेल इकाइयों में सेंट्रल के हिसाब से पॉलिसी चलती है। वहीं, वेतन भुगतान राज्य सरकार की गाइडलाइन के आधार पर किया जाता है। इस तकनीकी कारण से न्यूनतम वेतन तय नहीं किया जा सकता है। कमेटी ने कहा कि एडब्ल्यूए को बेसिक में जोड़ने में भी दिक्कत होगी। राउरकेला में पांच प्रतिशत और दुर्गापुर में 10 फीसद हाउस रेंट दिया जाता है। अन्य इकाइयों में अलग है। इसलिए सबको एक साथ करना संभव नहीं है। बहस के बाद भी कुछ तय नहीं होने पर प्रबंधन ने 15 जून को दोबारा बैठक करने की तारीख दे दी है। बता दें कि बैठक में एचएमएस से राजेंद्र सिंह, इंटक से वीरेंद्र चौबे, एटक के रामाश्रय प्रसाद, बीएमएस के उद्योग प्रभारी डीके पांडेय और सीटू के ललिल मोहन मिश्र शामिल रहे।

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सीटू ने बताया मीटिंग में किस तरह किया विरोध

प्रबंधन द्वारा पिछली सब-कमेटी की बैठक में एडब्ल्यूए (अतिरिक्त कल्याण भत्ता) में 10% वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया था। सीटू ने प्रबंधन के इस अपमानजनक प्रस्ताव को तत्काल ठुकरा दिया गया और सभी केन्द्रीय यूनियनों ने इस विरोध में खुलकर सीटू का साथ दिया। बैठक में शामिल ललित मोहन मिश्र ने बताया कि तात्कालिक प्रतिक्रिया एवं दबाव के कारण प्रबंधन ने अपना प्रस्ताव वापस ले लिया तथा यह निर्णय लिया कि ठेका श्रमिकों के वेतन वृद्धि के आधार का परीक्षण करने के लिए एक संयंत्र स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा।

अलग-अलग इकाईयों, आरआईएनएल में एडब्ल्यूए राशि 1750 से 2500 रुपए तक

बैठक में प्रबंधन ने जानकारी दी कि ठेका श्रमिकों के वेतन के विभिन्न पैमानों के परीक्षण करने के लिए कमेटी का गठन हो गया है। कमेटी की अनुशंसाओं को प्रबंधन द्वारा की बैठक में रखा गया, जो कुछ और नहीं बल्कि एडब्ल्यूए (अतिरिक्त कल्याण भत्ता) में मात्र 25% की वृद्धि है। वर्तमान में सेल के अलग-अलग इकाईयों एवं आरआईएनएल में एडब्ल्यूए के रूप में ठेका कर्मियों को मिलने वाली राशि 1750 से 2500 रुपए तक है। अंततः प्रबंधन ने ए.डब्ल्यू.ए के रुप में 435 से 625 वेतन वृद्धि का प्रस्ताव दिया।

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ठेका कर्मियों के योगदान को उचित सम्मान की मांग

सीटू/एसडब्लूएफआई द्वारा तत्काल प्रबंधन के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया और उत्पादन में ठेका कर्मियों के योगदान को देखते हुए उनके लिए उचित सम्मान की मांग की गई। सभी सार्वजनिक इस्पात उपक्रमों में ठेका श्रमिकों के लिए सुस्पष्ट वेतन संरचना की मांग की गई। प्रबंधन का यह कहना है कि विभिन्न इकाइयों के ठेका कर्मियों के वेतन में असमानता होने के कारण वे वेतन संरचना पर कोई प्रस्ताव देने में समर्थ नहीं है। यह घोषणा कर दी कि एक सुस्पष्ट वेतन संरचना प्राप्त करना, ठेका कर्मियों का अधिकार है और इसे प्राप्त करने के लिए हम संघर्ष करेंगे।

बता दें कि सीटू ने 25 मई को प्रदर्शन किया था, जिसमें बड़ी संख्या में ठेका कर्मियों ने भागीदारी की। सभी इकाइयों के स्थाई कर्मियों ने भी बड़ी संख्या में इस आंदोलन में साथ दिया है। ठेका कर्मियों की मांगों को प्राप्त करने के लिए संघर्ष को और तेज करने की घोषणा कर दी गई।

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  • May 26, 2022 at 2:45 pm
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    Yes hona chahye kyo ki ham mp ke majdur ha 351

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