Non-Executive Promotion Policy: एनईपीपी का एक साल सेल कर्मियों के लिए जी का जंजाल, इंटक बोला-70% को मिला प्रमोशन, विरोधियों ने कहा-पूत के पांव नजर आ रहे पालने में…

सीटू के सहायक महासचिव टी. जोगाराव ने कहा कि पालने में ही नजर आ रहा है पूत के पांव। बीएमएस, एटक, एचएमएस, बीडब्ल्यूयू ने किया विरोध। इंटक का दावा 70 प्रतिशत कर्मचारियों को मिला प्रमोशन।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। नॉन एक्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी पर दस्तखत हुए 1 साल पूरा हो चुका है। एनजेसीएस की जब ऑनलाइन बैठक चल रही थी,उसी दौरान 25 जून 2021 को प्रबंधन एवं तत्कालीन मान्यता प्राप्त यूनियन इंटक के बीच कर्मियों के लिए एक प्रमोशन पॉलिसी पर समझौता हुआ। जिसे धरातल पर उतारने के साथ ही कई स्थानों पर जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है। नई पॉलिसी कई जगह पर लागू करने के बाद कर्मचारी अपनी सीनियारिटी को लेकर आक्रोशित हैं तो कई जगह पर इसे लागू ही नहीं किया जा सका है। इधर-मान्यता चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी है। केंद्रीय श्रम विभाग, बीएसपी प्रबंधन और यूनियनों के बीच 29 जून को बैठक कर चुनाव का तारीख तय करना बाकी है। इस बीच एनईपीपी चुनाव में एक बड़े मुद्दे के रूप में उभर कर सामने आ रहा है, जिस पर अलग-अलग यूनियनों के नेता कर्मियों के बीच अपनी तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

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पालने में ही नजर आ रहा है पूत के पांव-सीटू

एनईपीपी पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सीटू के सहायक महासचिव टी. जोगाराव ने कहा कि मान्यता यूनियन को प्रबंधन के साथ कर्मियों के पक्ष में समझौता करने का पूरा हक है। किंतु एनईपीपी की वास्तविकता कर्मियों के सामने आ चुकी है। लोग इसकी कथनी एवं करनी हो अच्छे से समझ रहे हैं। प्रबंधन के द्वारा जारी की गई वरिष्ठता सूची में सभी कर्मी ऊपर नीचे हो चुके हैं। कहीं चार्जमैन के पद को डिमिनिशिंग में डाला गया है तो कहीं पर इसे वरिष्ठता सूची से गायब ही कर दिया गया है। कर्मियों के प्रमोशन के लिए पिछले 3 साल का मूल्यांकन में किसी भी साल सी ग्रेड मिलने पर अथवा पिछले 3 सालों में लगातार बी ग्रेड मिलने पर प्रमोशन से ही वंचित कर देने की बात सभी को झकझोर रही है। यदि इस पॉलिसी के शुरुआत में ही यह हाल है तो इसे धरातल पर अमल करने पर भयानक एवं कर्मी विरोधी परिणाम सामने आएंगे।

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70 प्रतिशत कर्मचारी खुश, चुनाव व अज्ञानता से कुछ लोग कर रहे विरोध-इंटक

इंटक के अतिरिक्त महासचिव संजय साहू का कहना है कि भिलाई स्टील प्लांट के 42 विभागों में नॉन एक्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी लागू कर दिया गया है। 70 प्रतिशत कर्मचारियों को प्रमोशन प्राप्त हो गया है। सभी विभाग के कर्मचारी खुश हैं। किसी विभाग से आपत्ति नहीं आई है। अभी जो लोग विरोध कर रहे हैं, वह अज्ञानता या चुनाव को देखते हुए सामने आए हैं। चुनाव के बाद यही लोग नई प्रमोशन पॉलिसी को स्वीकार करेंगे।

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सीनियर को जूनियर और बंधुआ मजदूर बनाने वाली पॉलिसी-बीएमएस

बीएमएस के महामंत्री रवि सिंह एनईपीपी को लेकर खासा नाराज हैं। उन्होंने कहा कि पूरे प्लांट में विरोध हो रहा है। यह कर्मचारियों के हित में नहीं है। इंटक ने कर्मचारियों के साथ न्याय नहीं किया है। कर्मचारी बंधुआ मजदूर बना दिए जाएंगे। सीनियर कर्मचारी भी जूनियर होते जा रहे हैं। कोई फायदा नहीं मिल रहा है। कर्मचारियों की मांग पर बीएमएस ने प्रबंधन से इस पॉलिसी को निरस्त करने की मांग की है ताकि कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके।

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पैसा मिला नहीं, सम्मान भी गया-बीएसपी वर्कर्स यूनियन

बीडब्ल्यू के अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता का कहना है कि गुलाम बनाने की परंपरा शुरू की जा रही है। यह सब मान्यता प्राप्त यूनियन के रहमो-करम पर हो रहा है। प्रमोशन के नाम पर नुकसान का रोडमैप तैयार कर दिया गया है। कर्मचारियों को सम्मान मिला नहीं, इंटक ने नुकसान करा दिया। वरिष्ठता सूची को ही ध्वस्त कर दी गई है। कर्मचारी विरोधी इस पॉलिसी के खिलाफ यूनियन कानूनी लड़ाई भी लड़ेगी।

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लड़कर चार्जमैन के पद को बचाया था-एचएमएस

इंटक को छोड़ ज्यादा यूनियनें एनईपीपी के विरोध में है। एचएमएस के महासचिव प्रमोद कुमार मिश्र ने कहा कि एनईपीपी का सबसे पहले विरोध हमारी यूनियन ने किया था। हमने लड़कर यूआरएम, एसएमएस-3, एनर्जी मैनेजमेंट सहित कई विभागों में चार्जमैन के पद को बचाया था। नई पॉलिसी से रिटायरमेंट के साथ ही चार्जमैन का पद भी समाप्त हो रहा। भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

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चर्चा के बगैर समझौता हुआ-एटक

एटक के महासचिव विनोद सोनी ने प्रबंधन और मान्यता प्राप्त यूनियन इंटक को आड़े हाथ लिया। कहा-राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा चल ही रही थी, कि भिलाई में किसी को खुश करने के लिए जल्दबाजी में समझौता कर दिया गया। नॉन एक्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी पर पहले चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सभी विभागों से चर्चा कर हल निकलना चाहिए था। किसी को खुश करने के लिए जल्दबाजी में समझौता किया गया, जो कर्मचारियों के लिए मुसीबत बन चुका है।

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