रुआबांधा बस्ती और बीएसपी आवासों के बीच खड़ी होगी एक किलोमीटर की दीवार

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन भिलाई के प्रतिनिधिमंडल ने टाउनशिप की समस्याओं के निवारण के लिए मुख्य महाप्रबंधक यूके झा से मुलाकात की। आवास समस्याओं पर चर्चा के साथ ही रुआबांध बस्ती और बीएसपी आवासों के बीच दीवार खड़ी करने की मांग की गई। प्रबंधन ने जानकारी दी कि यहां दीवार बनाने का फैसला लिया जा चुका है। बताया जा रहा है कि दीवार की लंबाई करीब एक किलोमीटर होगी।

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डेब अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा कि संयंत्र में विगत कुछ वर्षों में पदस्थ डिप्लोमा इंजीनियर्स आवास की विभिन्न समस्याओं से परेशान हैं। घरों में सीपेज, प्लास्टर का गिरना, छोटे क्वाटरों में गुजर बसर, क्वाटरों में मेंटेनेंस का अभाव जैसी समस्याओं से डिप्लोमा इंजीनियर्स जूझ रहे हैं। उत्पादन के कीर्तिमान बनाने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डिप्लोमा इंजीनियर्स को ऐसी परेशानियां न आए इसका ध्यान दिया जाए।

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एसोसिएशन द्वारा बीएसपी आवास में फैले अवैध कब्जों पर लगातार कार्यवाही करने का समर्थन व धन्यवाद भी नगर सेवा विभाग को किया गया। सीजीएम नगर सेवा विभाग ने आश्वासन दिया कि सेल वर्तमान में लाभ की स्थिति में है, जिसका फायदा कर्मियों को भी मिले ऐसी प्रबंधन की सोच है। इसलिए टाउनशिप में आ रही टार फेल्टिंग, मेंटेनेंस की विभिन्न समस्याओं के लिए विभिन्न टेंडर या तो जारी कर दिए गए है या फिर वे प्रॉसेस में है। उन्होंने जानकारी दी कि रुआबंधा में बस्ती से लगे क्वाटरों में अलग से बाउंडरी वाल बनाने का भी निर्णय लिया गया है, जो कि कुछ दिनों में चालू किया जाएगा।

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बैठक में टाउनशिप विभाग की ओर से सीजीएम यूके झा, जीएम केसी त्रिपाठी व जीएम संजय शर्मा के अलावा डेब की ओर से सौरभ सुमन, रवि अरसे, अजय तमुरिया, संजीव कुमार, संतू कुमार, राहुल कुमार, मुकेश कुमार आदि उपस्थित थे।

सब्जेक्ट टू वेकेशन नए डिप्लोमा इंजिनियर्स के लिए नुकसानदेह

डेब उपाध्यक्ष मोहम्मद रफी व उषाकर चौधरी ने कहा की सब्जेक्ट टू वेकेशन लागू होने के कारण अच्छे क्वाटर्स ऑनलाइन सिस्टम में नही आ पा रहे। जिससे अच्छे क्वाटर्स से नए डिप्लोमा इंजिनियर्स वंचित है।
डिप्लोमा अभियंता जिनकी जॉइनिंग को कुछ ही समय हुआ है वे भी सब्जेक्ट टू वेकेशन में अच्छे क्वाटर्स नही ले पा रहे क्योंकि इसके लिए अच्छा खासा पैसा क्वाटर छोड़ने वालो द्वारा डिमांड की जाती है और ज्यादातर डिप्लोमा अभियंता उनकी मांग नही पूरी कर पाते क्योंकि परिवार को संभालने के बाद अलग से पैसे बचाना संभव नही हो पाता है।
अगर कुछ एक डिप्लोमा इंजीनियर जो पारिवारिक तौर पर सक्षम है सब्जेक्ट टू वेकेशन में क्वाटर लेने इक्छुक रहते भी है तो उसे एलीजिबलिटी की समस्या आ जाती है और वह बड़े क्वाटर लेने सब्जेक्ट टू वेकेशन का उपयोग नही कर पाता।
नए जॉइन किये डिप्लोमा इंजिनियर्स के लिए भी अच्छे क्वाटर्स उपलब्ध कराने सही व्यवस्था की जानी चाहिए।

क्वाटर की समस्या के निवारण के लिए डैमेज क्वाटर का मेंटेनेंस व अधिकारी वर्ग के क्वाटर को डीग्रेड किया जाए

डेब महासचिव अभिषेक सिंह व उपाध्यक्ष घनश्याम साहू ने कहा कि अधिकारी वर्ग के क्वाटरो का अगर डीग्रेड कर कर्मियों को आबंटित किया जाए जो कि पूर्व में किया जा चुका है तो काफी हद तक समस्या का निवारण किया जा सकता है इसके अलावा ऐसे क्वाटर्स जो कई सालों से केंद्रीय या राज्यसेवा में कार्यरत अधिकारियों को आबंटित किया गया था जो कि वर्तमान में दूसरे स्थानों में जा चुके है ऐसे क्वाटर्स को खाली कराने से भी क्वाटर्स की उपलब्धता में वृद्धि की जा सकती है साथ ही कई एकल तल क्वाटर्स जो डैमेज है मेंटेनेंस करा डिप्लोमा इंजिनियर्स को उपलब्ध कराया जाए।

सालाना मिलने वाले क्वाटर मेंटेनेस के राशि मे हो वृद्धि

डेब उपाध्यक्ष शिव शंकर व संगठन सचिव पवन साहू ने कहा कि प्रत्येक साल क्वाटर की मरम्मत हेतु राशि जो कि 1500 से भी कम है, डिप्लोमा इंजिनियर्स को मिलती है इतने कम पैसों में घर का मेंटेनेस संभव नही है, इसे बढ़ाकर 30000 तक करने की आवश्यकता है जो कि वर्तमान परिदृश्य के हिसाब से पूर्णतः सही भी है। इसके अलावा नगर सेवा विभाग से यह आग्रह है कि वेलकम स्कीम जल्द लाने का भी कार्य किया जाए।

खबर अपडेट की जा रही है…।

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