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PM Modi Oath Ceremony Breaking: मोदी कैबिनेट में Chhattisgarh से 1 कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का संकेत

PM Modi Oath Ceremony Breaking: मोदी कैबिनेट में Chhattisgarh से 1 कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का संकेत
  • प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे भूपेश बघेल को मात देने का इनाम संतोष पाण्डेय को मिल सकता है।

सूचनाजी न्यूज, रायपुर। लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) के परिणामों के बाद नई सरकार के गठन की तैयारी की जा रही है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत में छत्तीसगढ़ की भी अहम भूमिका रही है। प्रदेश की 11 में से 10 सीटें NDA की अगुवाई करने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में गई है। ऐसे में नई गठित होने वाली केन्द्रीय कैबिनेट में छत्तीसगढ़ की भी हिस्सेदारी होगी।

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जानकार बता रहे है कि छत्तीसगढ़ से कम से कम दो नेताओं को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया जा रहा है। चर्चाओं पर नजर डालें तो प्रदेश से कम से कम एक नेता कैबिनेट स्तर के मंत्री बन सकते है। जबकि किसी एक नेता को राज्यमंत्री की अहम जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

छत्तीसगढ़ के 10 विजेता सांसदों में अधिकांश पहली बार निर्वाचित हुए है। इसमें संतोष पाण्डेय और विजय बघेल लगातार दूसरी बार जीते है। जबकि बतौर सांसद निर्वाचित होने वाले बृजमोहन अग्रवाल भले ही पहली बार संसद पहुंचेंगे लेकिन वे वरिष्ठ विधायक है।

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इन नामों पर क्यों हो रही चर्चा

बृजमोहन अग्रवाल : रायपुर लोकसभा से बृजमोहन अग्रवाल पौने छह लाख वोटों से जीते है। देश में शीर्ष 10 बड़ी जीत में बृजमोहन की सीट भी शामिल है। पहली बार सांसद बनने वाले बृजमोहन फिलहाल राजधानी की रायपुर दक्षिण से विधायक (MLA) है।

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विष्णु देव साय कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री है और कई पोर्टफोलियो की जिम्मेदारी संभाल रहे है। वे अजेय योद्धा है। लगातार आठ बार से MLA बन रहे है। बृजमोहन के कद का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि उनके खिलाफ कांग्रेस के युवा चेहरे विकास उपाध्याय को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद से विकास उपाध्याय के राजनैतिक कॅरियर के ढलान में जाने की कही जा रही है।

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डॉ.रमन सिंह की कैबिनेट में बृजमोहन लगातार 15 साल कैबिनेट मंत्री रहे है। 2018 में कांग्रेस की प्रचंड जीत के बाद भी बृजमोहन को कांग्रेस हरा नहीं पाई। अविभाजित मध्यप्रदेश में भी मिनिस्टर रहे है। साथ ही चर्चा तो यह भी थी कि बृजमोहन छत्तीसगढ़ से जाना ही नहीं चाहते थे। वे लोकसभा टिकट कटवाने खूब प्रयास भी करते रहे, लेकिन केन्द्रीय नेतृत्व ने उन्हें दिल्ली के बहाने रायपुर से हटाने का मन पहले ही बना लिया था।

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विजय बघेल: विजय बघेल इस बार लगातार दूसरी बार दुर्ग से सांसद निर्वाचित हुए है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी विजय ने 2019 का लोकसभा चुनाव जीता था। तब विजय बघेल की प्रदेश में सबसे बड़ी जीत थी। वोटों के लिहाज से बड़ी जीत थी।

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राजनैतिक तौर पर और भी ज्यादा बड़ी जीत थी, क्योंकि दुर्ग लोकसभा से ही तत्कालीन मुख्यमंत्री (CM) भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, वरिष्ठ मंत्री रविन्द्र चौबे और कद्दावर मंत्री मोहम्मद अकबर यहीं से निर्वाचित थे। इसके अलावा केन्द्रीय राजनीति में दशकों तक वर्चस्व रखने वाले दिवंगत मोतीलाल वोरा का दुर्ग में तगड़ा प्रभाव रहा है और उनके पुत्र अरुण वोरा तब दुर्ग शहरी सीट से MLA थे। जबकि 2024 चुनाव में बृजमोहन अग्रवाल के बाद प्रदेश में विजय बघेल की दूसरी बड़ी जीत है।

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भूपेश बघेल के सिपहसालार राजेन्द्र साहू को चार लाख 38 हजार से अधिक वोटों से हराया है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय से आते है। प्रदेश में बड़ी आबादी वाले कूर्मि समाज के पदाधिकारी रहे है। पूर्व CM भूपेश बघेल के भतीजे है। चाचा भूपेश को विजय पाटन विधानसभा में पटखनी दे चुके है। एशिया के सबसे बड़े स्टील प्लांट ‘भिलाई इस्पात संयंत्र’ (BSP) के एंप्लॉय रहे है। हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले भिलाई में रहते है। नेशनल प्लेयर रहे है। सरल, सौम्य व्यक्तित्व है। 2023 विधानसभा चुनाव में पार्टी के मेनिफेस्टो को आकार देने में महती भूमिका निभा चुके है। सरकार और संगठन का लंबा अनुभव है।

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संतोष पाण्डेय : देश की सबसे हाईप्रोफाइल सीट से चुनाव जीते है। संतोष पाण्डेय ने पूर्व CM भूपेश बघेल को 44 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। लगातार दूसरी बार चुनाव जीते है। पिछले कार्यकाल में काफी मुखर रहे। संसद में राजनांदगांव से लेकर प्रदेश के कई प्रमुख मुद्दों को उठाते रहे है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आते है। कवर्धा के झंडा कांड और साजा के धार्मिक कांड में काफी सक्रिय रहे है।

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प्रदेश की कांग्रेस सरकार को घेरते रहे है। जानकार, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के लिए कवर्धा और साजा कांड को भी अहम मानते है। मध्यप्रदेश (MP) से लेकर महाराष्ट्र सीमा तक इनका संसदीय क्षेत्र फैला हुआ है। यहां आदिवासी बाहुल्य विकासखंड से लेकर आदिम जाति जिले और राजघरानों के इलाकों का प्रतिनिधित्व कर रहे है।

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राजनांदगांव से कांग्रेस के प्रमुख चेहरे दिवंगत मोतीलाल वोरा भी सांसद रहे है। यहीं से डॉ.रमन सिंह निर्वाचित होकर अटल कैबिनेट में शामिल हुए थे और वोरा को हराकर राजनांदगांव को सुर्खियों में ला दिए थे। प्रदेश में कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे भूपेश बघेल को मात देने का इनाम संतोष पाण्डेय को मिल सकता है।

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