चौपाटी के कब्जेदारों पर गरमाई सियासत, भिलाई स्टील प्लांट के यूनियन चुनाव तक पहुंची चिंगारी, सांसद के बयान पर अधर में लटके बीएमएस-बीडब्ल्यूयू और इंटक

बीएमएस के महामंत्री रवि सिंह का कहना है कि कुछ ही समय में बैठक शुरू होगी, जिसमें यूनियन अपना रुख स्पष्ट कर देगी। सांसद के बयान और ओए की बातों से बीएमएस के केंद्रीय नेताओं को अवगत कराया जा रहा है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई टाउनशिप में कब्जेदारों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को लेकर सांसद विजय बघेल और बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन के बीच छिड़ी जंग का असर यूनियन चुनाव पर पड़ सकता है। बीएसपी वर्कर्स यूनियन व बीएमएस ने मंथन शुरू कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर बीएमएस के पदाधिकारियों की बैठक होने जा रही है। सांसद द्वारा चौपाटी में कार्रवाई रोकवाने और ओए द्वारा सांसद के बहिष्कार के विषय पर चर्चा की जाएगी।

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महामंत्री रवि सिंह का कहना है कि कुछ ही समय में बैठक शुरू होगी, जिसमें यूनियन अपना रुख स्पष्ट कर देगी। सांसद के बयान और ओए की बातों से बीएमएस के केंद्रीय नेताओं को अवगत कराया जा रहा है। जैसा मार्गदर्शन होगा, उसकी जानकारी मीडिया को दी जाएगी। फिलहाल, बीएमएस बीएसपी आवासों में कार्रवाई का समर्थन करती है। कर्मचारियों का सीधा वास्ता आवासों से है। हम बीएसपी मकानों से अवैध कब्जा हटाने के समर्थन में हैं। दुकान-जमीन से लेना-देना नहीं है। इसके विषय में हमारा कोई रोल नहीं होता है।

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दूसरी ओर बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्ज्वल दत्ता, सांसद और ओए के विवाद से बचते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूनियन का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है। कब्जेदारों के खिलाफ यूनियन खुलकर काम करती है। बीएसपी के इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट के सहयोग के लिए यूनियन ने सलाहकार समिति बनाने की मांग प्रबंधन से की थी। आज तक समिति नहीं बन सकी।

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इसका उद्देश्य यह था कि समिति के सदस्य कार्रवाई के दौरान मौके पर समर्थन में पहुंच सकें। कार्रवाई कहां करनी है और कहां नहीं, अपनी सलाह दे सकें। बीएसपी की संपत्ति कब्जे में होने से कर्मचारियों को नुकसान होता है। इनकी वजह से कर्मचारियों को अच्छे मकान नहीं मिल रहे हैं। फिलहाल, हम लोग वर्करों के मुद्दे को लेकर लड़ रहे हैं। विवाद से हमने दूरी बनाई है।

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इंटक के अतिरिक्त महासचिव संजय साहू का कहना है कि भिलाई स्टील प्लांट की संपत्ति को कब्जामुक्त कराना हर किसी की जिम्मेदारी है। जिला प्रशासन और राजनीतिक दलों को भी इसमें साथ देना चाहिए ताकि शहर को अतिक्रमण से बचाया जा सके।

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