Rathyatra 2022: देवस्नान के बाद भगवान जगन्नाथ की बिगड़ी तबीयत, 14 दिन तक रहेंगे क्वारंटाइन, जड़ी बूटी का लगेगा भोग

महाप्रभु को विभिन्न जड़ी बूटियों व दिव्य औषधियों का भोग लगाया जाएगा। 29 जून को संध्या बेला में नेत्र उत्सव का आयोजन किया जाएगा।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। देवस्नान के बाद भगवान जगन्नाथ की तबीयत बिगड़ गई। बीमारी की वजह से वह 14 दिन तक अणसर गृह (क्वारंटाइन) रहेंगे। मंदिर का पट भी बंद कर दिया गया है। अब 29 जून को पट खुलेगा और भगवान का दर्शन किया जा सकेगा। श्री जगन्नाथ मंदिर सेक्टर-4 में महाप्रभु श्री जगन्नाथ की 53वीं रथयात्रा महोत्सव 2022 मनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। रथयात्रा की पहली कड़ी के रूप में मंगलवार को श्री जगन्नाथ मंदिर सेक्टर-4 में देवस्नान पूर्णिमा का धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन के तहत महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी जी को गर्भगृह से निकाल कर मंदिर प्रांगण में स्थित देव स्नान मंडप पर लाया गया।

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देव स्नान मंडप में समस्त विधि-विधान के साथ महाप्रभु श्री जगन्नाथ स्वामी जी, बड़े भाई, भगवान श्री बलभद्र देव जी, तथा बहन, माता सुभद्रा जी को सुगंधित जल से स्नान कराया गया। देव स्नान की यह धार्मिक पूजा समस्त रीति-रिवाजों के साथ पुरोहित पितवास पाढ़ी तथा सरोज दास, रंजन महापात्र, संकेत दास व विक्रम पाढ़ी द्वारा संपन्न्न किया गया। देव स्नान के पश्चात महाप्रभु का गजराज भेष के रूप में श्रृंगार किया गया।

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देव स्नान के पश्चात महाप्रभु के बीमार पड़ने के कारण उन्हे विश्राम के लिए अणसर गृह में स्थापित किया गया। आज से लेकर 29 जून के नेत्र उत्सव तक महाप्रभु श्री जगन्नाथ के मंदिर के पट बंद रहेंगे। इस अवधि में महाप्रभु को विभिन्न जड़ी बूटियों व दिव्य औषधियों का भोग लगाया जाएगा। 29 जून को संध्या बेला में नेत्र उत्सव का आयोजन किया जाएगा। तत्पश्चात महाप्रभु के मंदिर का पट दर्शन हेतु खोले जाएंगे। इसके पश्चात् 01 जुलाई को सेक्टर-4 स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर से रथयात्रा निकाली जाएगी, जो सेक्टर 10 स्थित गुंडिचा मंडप तक ले जाया जाएगा।

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देव स्नान के इस पावन उत्सव को सफल बनाने में जगन्नाथ समिति के अध्यक्ष वीरेन्द्र सतपथी, महासचिव सत्यवान नायक, कोषाध्यक्ष डी. त्रिनाथ, अनाम नाहक, वृंदावन स्वांई, बीसी बिस्वाल, भीम स्वांई, बसंत प्रधान सहित समिति के पदाधिकारी त्रिनाथ साहू, सुशांत सतपथी, कालू बेहरा, बीस केशन साहू, निरंजन महाराणा, कवि बिस्वाल, संतोष दलाई, प्रकाश स्वांई, प्रकाश दास, रवि स्वांई,रमेश कुमार नायक, सीमांचल बेहरा, सुदर्शन शांती, शत्रुधन डाकुआ, एससी पात्रो, कैलाश पात्रो, वीके होता ने विशेष योगदान दिया। इस अवसर पर श्रद्धालु भी उपस्थित थे।

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