SAIL Bonus Formula Controversy: 45 हजार नहीं, महज 16826 रुपए आएगा खातों में, पढ़ें-बोनस फॉर्मूले की 10 खामियां…

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SAIL Bonus Formula Controversy
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के प्रस्तावित बोनस फॉर्मूले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कर्मचारियों की नाराजगी सामने आ रही है।
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सेल के प्रस्तावित फॉर्मूले पर एक कर्मी ने हिसाब-किताब लगाया तो एक-एक कर्मचारियों के खाते में 16826 रुपए ही बोनस के रूप में आ रहा है।

अज़मत अली, भिलाई। सेल का बोनस फॉर्मूला टेबल पर आने से पहले विवादित हो गया है। चौतरफा सवाल उठाए जा रहे हैं। कर्मचारियों के राडार पर सेल प्रबंधन आ गया है। सेल कर्मचारियों ने बारीकी से प्रस्तावित फॉर्मूले का अध्ययन किया। एक कर्मी ने सेल के प्रस्ताव पर ही हिसाब-किताब लगाया तो एक-एक कर्मचारियों के खाते में 16826 रुपए ही बोनस के रूप में आ रहा है। यह आंकड़ा आग में घी का काम कर गया। सेल कर्मचारी भड़क उठे हैं। बकायदा खामियों की सूची तैयार की ली है। 10 अक्टूबर को होने वाली बोनस मीटिंग से पहले 10 खामियां गिना दी गई है ताकि यूनियन नेताओं को आसानी हो…।
इधर-सोशल मीडिया पर गिना रहे बोनस फॉर्मूले की खामियां…
1.पिछले पांच साल में दिए गए बोनस का औसत राशि से लिंक करना: यह बिल्कुल गलत है, क्योकि पिछले पांच साल में कितना बोनस मिला। इससे वर्तमान में कोई लेना देना नहीं है। वहीं, पिछले 5 साल में काफी कम बोनस मिला है, जिसके कारण उसका औसत काफी कम होगा।

  1. महंगाई भत्ते से बोनस को लिंक करना: यह भी बिल्कुल न्यायोचित नहीं है, क्योकि बोनस उत्पादन और लाभ पर मिलता है। उत्पादन और लाभ का महंगाई भत्ते से कोई संबंध नहीं है।
  2. महंगाई भत्ता: साल भर में सरकारी आंकड़ों में मुश्किल से 8-10% महंगाई भत्ता बढ़ा है। अगर प्रबंधन को महंगाई भत्ता का इतना ही फिक्र है तो वह पर्क्स प्रतिशत को महंगाई भत्ते से जोड़े, ताकि बढ़ती महंगाई का लाभ पर्क्स में भी मिले।
  3. पिछले 5 साल का पीबीटी का औसत को आधार बनाना: पिछले पांच साल में एक साल 2017-18 का पीबीटी ऋणात्मक है। जबकि पिछले साल का पीबीटी 16039 करोड़ है। वहीं, पिछले 5 साल का पीबीटी का औसत मात्र 5733 करोड़ रुपया ही होगा।
  4. चालु वित्त वर्ष को प्रोडक्शन का आधार बनाना: दुनिया में कहीं भी बोनस देने हेतु चालु वित्त वर्ष को आधार नहीं बनाया जाता है। बोनस हमेशा पिछले वित्त वर्ष का दिया गया उत्पादन लक्ष्य, हासिल किया गया उत्पादन लक्ष्य पर बनाया जाता है। सेल का प्रस्तावित फॉर्मूले में सेलेबल स्टील को आधार बनाया गया है, जो कि न्यायोचित नहीं है, क्योकि सेल का क्रुड स्टील तथा सैलेबल स्टील के बीच 3-4 मिलियन टन का अंतर रहता है। जबकि कंपनी प्रत्येक साल 2-3 मिलियन टन पिग आयरन को बेचती है। आखिर क्रुड स्टील और सेलेबल स्टील की बीच का अंतर का उत्पादन का लाभांश कर्मियों को क्यों नहीं मिलनी चाहिए?
  5. वहीं चालू वित्त वर्ष के आधार पर सिर्फ 5-6 महीने के उत्पादन के आंकड़ों को लेकर पूरे साल का आंकड़ा कैसे बनाया जा सकता है? उसमे भी प्रबंधन ने मार्च मे उत्पादन लक्ष्य का मूल्यांकन कर कटौती का भी प्रावधान कर रखा है।
  6. सेल का प्रस्तावित क्षमता विस्तार परियोजनाओं के कारण उत्पादन क्षमता 80% से नीचे रहने की आशंका। चूंकि सेल मे ABP बनाने में कर्मचारियों या यूनियन प्रतिनिधियो की भागिदारी नहीं होती है। वहीं, सेल का 2030 तक 14 मिलियन टन उत्पादन क्षमता और बढ़ना है, जिसके कारण जैसे ही किसी यूनिट में एक फर्नेस सेट होगा। वैसे ही सेल प्रबंधन अपना ABP बढ़ा देगा, जबकि पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए ब्लास्ट फर्नेस को अपनी पूरी क्षमता हासिल करने में दो से तीन साल लग जाते हैं। स्वभाविक है कि जब ABP टारगेट हासिल नहीं होगा, तो बोनस राशि कम हो हो जाएगी।
  7. लाभ में प्रत्येक्ष हिस्सेदारी नहीं:लगभग सभी कंपनियों में चाहे वह निजी हो या सार्वजनिक क्षेत्र की उसमे लाभ के अनुसार बोनस देने का प्रावधान है। लेकिन प्रस्तावित बोनस फॉर्मूले में लाभ में अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी के कारण कंपनी को हुए लाभ का समुचित लाभ कर्मचारियों को नहीं मिल पाएगा। पिछले पांच साल का औसत लाभ निकालने से पिछले साल के लाभ का एक तिहाई से भी कम हो जाएगा।
  8. 9.घटते मैनपावर तथा बढ़ती लेबर प्रोडक्टिविटी का बोनस में फायदा ही नहीं होगा।
  9. सेल में अगले सात-आठ सालों में औसतन प्रत्येक साल 3500-4000 मैन पावर रिटायर होने वाले हैं। स्वभाविक है कि मैनपावर घटते ही लेबर प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी। साथ ही प्रस्तावित क्षमता विस्तार के कारण लेबर प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी, जिसका लाभ प्रस्तावित फॉर्मूले से कर्मचारियों को नहीं मिलेगा।
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