सेल की एक और सुविधा में कटौती, DASA पर बैन, 8 हजार तक नुकसान

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SAIL DASA
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के एक फैसले को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है।
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-भिलाई स्टील स्टील प्लांट प्रबंधन की ओर से भी सर्कुलर जारी कर दिया गया है।
-सेल माइंस में कार्यरत अधिकारियों को अब दासा की राशि नहीं दी जाएगी।
-एक नवंबर से पुरानी व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है।
-अंडरग्राउंड माइंस आदि के लिए यह व्यवस्था रखी गई है।

अज़मत अली, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के एक फैसले को लेकर हर तरफ चर्चा हो रही है। खदान के लिए मिलने वाले स्पेशल एलाउंस पर बैन लगा दिया गया है। अब तक मिल रही सुविधा को वापस लेने का आदेश जारी कर दिया गया है। बेसिक का 8 प्रतिशत दासा के रूप में दिया जा रहा था, जिसे अब नहीं दिया जएगा। सेल की ओर से जारी आदेश में इसकी पुष्टि की गई है।

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भिलाई स्टील स्टील प्लांट प्रबंधन की ओर से भी सर्कुलर जारी कर दिया गया है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के माइंस में कार्यरत अधिकारियों को अब दासा की राशि नहीं दी जाएगी। खदान में कार्यरत अधिकारियों को डिफिकल एरिया एलाउंस दिया जा रहा था। अब एक नवंबर से पुरानी व्यवस्था पर रोक लगा दिया गया है।

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बीएसपी प्रबंधन के सर्कुलर के मुताबिक मंत्रालय के आदेश पर यह फैसला लिया गया है। दासा के पेमेंट को रोक दिया गया है। बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव परविंदर सिंह का इस बाबत कहना है कि थर्ड पीआरपी में दासा का प्रावधान नहीं होने की वजह से ऐसा किया गया है।

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अंडरग्राउंड माइंस आदि के लिए यह व्यवस्था रखी गई है। लेकिन ओपन माइंस के लिए दासा का प्रावधान नहीं किया गया है। यही वजह है कि इसे रोक दिया गया है। इस नुकसान की भरपाई के लिए आगे क्या किया जा सकता है, इस पर जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा।

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बताया जा रहा है कि बेसिक का 8 प्रतिशत दासा का भुगतान हो रहा था। इस मद में अधिकारियों को न्यूनतम करीब 7 से 8 हजार रुपए तक की राशि मिलती थी। अब इससे वंचित होना पड़ेगा। खदान के अधिकारियों का कहना है कि इस पर चर्चा तक नहीं की गई। सेल प्रबंधन ने तुगलकी फरमान जारी कर दिया है। अधिकारी वर्ग से चर्चा तक नहीं की गई है।

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दूसरी ओर दासा की रकम को लेकर कर्मचारी वर्ग पहले से ही आवाज उठा रहा है। पहले दस प्रतिशत राशि का भुगतान किया जाता था। इसे 8 प्रतिशत कर दिया गया है। इसके खिलाफ हर स्तर पर आवाज उठती रही है। यूनियन नेता भी कर्मचारियों के रडार पर आते रहे हैं। वहीं, यूनियन नेताओं में भी आपसी मतभेद है।

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