SAIL DASA: बोनस, चार्जशीट के बाद तपन सेन ने 10% दासा पर सेल चेयरमैन सोमा मंडल को लिखी चिट्‌ठी, कहा-करें न्याय, भड़क रहा है गुस्सा  

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Tapan Sen wrote a letter to SAIL Chairman Soma Mandal on Dasa
तपन सेन सेल कर्मचारियों के विषयों को लेकर लगातार सेल चेयरमैन सोमा मंडल को चिट्‌ठी लिख रहे हैं।
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तपन सेन ने चेयरमैन से मांग की है कि कृपया मामले को संज्ञान में लें कि खदान कर्मी, मूल वेतन पर 10% DASA के हकदार हैं।
अज़मत अली, भिलाई।
सीटू के महासचिव, एनजेसीएस सदस्य व पूर्व सांसद तपन सेन की सक्रियता बढ़ती जा रही है। लंदन में पारिवारिक कार्यक्रम से लौटने के बाद तपन सेन सेल कर्मचारियों के विषयों को लेकर लगातार सेल चेयरमैन सोमा मंडल को चिट्‌ठी लिख रहे हैं। पहले बोनस और दुर्गापुर के कर्मचारियों को चार्जशीट दिए जाने का मुद्दा उठाया।

अब सेल खदानों के कर्मचारियों को 10 प्रतिशत दासा का विषय उठाया गया है। सेल खदान कर्मियों को देय दुर्गम क्षेत्र विशेष भत्ता पर एकतरफा अनुचित निर्णय और तत्काल सुधारात्मक हस्तक्षेप की मांग की है।

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तपन सेन का कहना है कि सेल में कार्यरत खदान श्रमिकों को लंबे समय से मूल वेतन का 10% की दर से दुर्गम क्षेत्र विशेष भत्ता (डीएएसए-दासा) का भुगतान किया जाता रहा है। बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने संबंधित खदान कर्मियों को DASA  भुगतान में एकतरफा 8% तक कटौती, नवंबर 2021 से प्रभावी करते हुए, DPE के 2017 के परिपत्र का हवाला दिया है, जो अधिकारियों एवं असंगठित सुपरवाइजरों के लिए था, न कि सेल के कर्मचारियों  के लिए।

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6 जनवरी 2022 को भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रबंधन ने यूनियनों के एक वर्ग (जिसमें सीटू सम्मिलित नहीं है) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया, जिसमें खदान श्रमिकों को देय दासा की दर को घटाकर 8% कर दिया गया, जिसे भिलाई के खदान श्रमिकों ने 7 जनवरी 2022 को शत-प्रतिशत हड़ताल कर  खारिज कर दिया।

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उक्त घटनाक्रम स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कैसे संबंधित प्रबंधन श्रमिकों के बुनियादी मुद्दों और मौजूदा अधिकारों और सेवा शर्तों को मनमाने ढंग से और एकतरफा लागू कर रहा हैं, जिससे औद्योगिक संबंधों के क्षेत्र में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

तपन सेन ने चेयरमैन से मांग की है कि कृपया मामले को संज्ञान में लें कि खदान कर्मी, मूल वेतन पर 10% DASA के हकदार हैं और इसमें किसी भी तरह का परिवर्तन का निर्णय श्रमिकों और प्रबंधन के प्रतिनिधियों के बीच आम सहमति से किया जाना चाहिए। वह भी किसी इकाई स्तर पर नहीं बल्कि उद्योग के शीर्ष स्तर पर। यहां तक कि एनजेसीएस द्वारा गठित वेतनमान एवं भत्ता उपसमिति भी अपनी पिछली बैठक में इस तरह के किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची थी।

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पूर्व सांसद ने चेयरमैन से आग्रह किया है कि इस मुद्दे की गंभीरता का आकलन करें और यह सुनिश्चित करने के लिए उचित हस्तक्षेप करें, कि प्रबंधन, औद्योगिक सौहार्द्र के हित में एवं शॉप फ्लोर खदानों तथा स्थापनाओं  में कार्य करने वाले आम कर्मचारियों के भीतर बढ़ते हुए असंतोष एवं अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए एकतरफावाद गैर-सहमति दृष्टिकोण अपनाने से बचें। सभी के हितों के लिए यह न्यायसंगत और औचित्यपूर्ण होगा कि दासा का भुगतान मूल वेतन के 10% पर किया जाए। 

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