SAIL Gratuity Ceiling: कोलकाता हाईकोर्ट में किसी भी केस की दो दिन नहीं होगी सुनवाई, चार दिन के भीतर सीटू की याचिका को सुनेगा सिंगल बेंच

स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-सीटू की याचिका पर कोलकाता हाईकोर्ट में पहली सुनवाई 28 जून को होनी थी। सिंगल बेंच में जस्टिस सौरव घोष पूरे मामले को सुनेंगे।

अज़मत अली, भिलाई। सेल ग्रेच्युटी सिलिंग के खिलाफ कोलकाता हाईकोर्ट में मंगलवार को सुनवाई होनी थी। किन्हीं कारणों से हाईकोर्ट का कामकाज पूरी तरह से प्रभावित रहा। इस कारण मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी। बुधवार को किसी भी केस की सुनवाई नहीं होगी। सीटू की ओर से सेल प्रबंधन के खिलाफ दायर याचिका पर भी सुनवाई नहीं हो सकी। एसडब्ल्यूएफआई के महासचिव ललित मोहन मिश्र ने सूचनाजी.कॉम को बताया कि दो दिनों तक सुनवाई प्रभावित है। वकील ने जानकारी दी है कि चार दिन के भीतर इसकी सुनवाई होगी। मंगलवार को प्रभावित सभी केस की सुनवाई गुरुवार को संभव है।

ग्रेच्युटी सिलिंग के मामले में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल की मुसीबत बढ़ सकती है। कानूनी लड़ाई शुरू हो चुकी है। स्टील वर्कर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-सीटू की याचिका पर कोलकाता हाईकोर्ट में पहली सुनवाई 28 जून को होनी थी। अब किसी दिन भी हो सकेगी। सिंगल बेंच में जस्टिस सौरव घोष पूरे मामले को सुनेंगे। ग्रेच्युटी सिलिंग के खिलाफ सीटू ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

एसएफडब्ल्यूआई के महासचिव व एनजेसीएस सदस्य ललित मोहन मिश्र के मुताबिक कर्मचारियों को हाईकोर्ट से न्याय मिलेगा। सेल प्रबंधन ने कर्मचारियों का नुकसान करने के लिए ग्रेच्युटी सिलिंग लगाई थी। इसके खिलाफ याचिका दायर की गई थी, जिस पर अब सुनवाई शुरू होने जा रही है। निश्चित रूप से कर्मचारियों को बड़ी राहत कोर्ट से ही मिलेगी।
सेल प्रबंधन द्वारा 26 नवंबर 2021 को एकतरफा आदेश निकाल कर सेल कर्मियों के ग्रेच्युटी को भी अन्य उद्योगों के कर्मियों की तरह सीमित कर दिया गया।

इधर, सीटू भिलाई की ओर से इस मामले पर 29 नवंबर 2021 को प्रबंधन के पास लिखित आपत्ति दर्ज की गई। इसके बाद 4 दिसंबर 2021 को उप मुख्य श्रम आयुक्त के पास परिवाद दायर कर शिकायत की गई। परिवाद में यूनियन ने बताया कि सेल कर्मियों को इस्पात उद्योग के स्तर पर बनी द्विपक्षीय समिति एनजेसीएस समझौता के तहत असीमित ग्रेच्युटी प्राप्त होता है। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 के अनुसार सेल कर्मियों को मिलने वाली इस सेवानिवृत्ति बाद लाभ में परिवर्तन, समझौते के द्वारा ही संभव है।
ग्रेच्युटी लाभ में कोई भी परिवर्तन या कटौती प्रबंधन के एकतरफा आदेश से नहीं हो सकता है।

परिवाद पर पहली सुनवाई 27 जनवरी 2022 को रखी गई थी। जिसमें उप मुख्य श्रम आयुक्त ने प्रबंधन को अगली तिथि अर्थात 4 फरवरी 2022 को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था। किंतु प्रबंधन कॉर्पोरेट से दस्तावेज नहीं प्राप्त होने का कारण बता कर सुनवाई की तारीख को स्थगित करवाने का आग्रह किया। दो बार स्थगित करने के पश्चात 4 मार्च 2022 को फिर सुनवाई हुई। जिसमें प्रबंधन और यूनियन दोनों पक्ष उपस्थित हुए थे।

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