सेल के मकानों पर प्रशासनिक अधिकारियों, नेताओं का कब्जा, आफिसर्स एसोसिशन कर रहा सर्वे, लिस्ट होगी सार्वजनिक

सूचनजी न्यूज, भिलाई। भिलाई टाउनशिप में अधिकारी वर्ग के आवासों को पहले थर्ड पार्टी के नाम पर आवंटित कराने, फिर कब्जे का खेल चल रहा है। इस पर लगाम लगाने के लिए बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन ने डायरेक्टर इंचार्ज से हस्तक्षेप करने की मांग की है। कब्जेदारों की वजह से बीएसपी के अधिकारियों को बेहतर आवास नहीं मिल पा रहे हैं। इसलिए अधिकारियों ने थर्ड पार्टी आवास आवंटन प्रक्रिया पर ही सवाल उठा दिया है।

आफिसर्स एसोसिएशन ने थर्ड पार्टी को दिए गए मकानों की समीक्षा करने की मांग की है। समीक्षा के बाद आवंटन रद्द करने का सुझाव दिया गया है। ओए-बीएसपी की टीम द्वारा सभी सेक्टरों में सर्वे करके थर्ड पार्टी आवंटन को चिन्हित किया जा रहा है। आवास खाली कराने के लिए राज्य शासन एवं केन्द्र शासन से इसके लिए सहयोग लिया जाएगा।

सेफी चेयरमैन एवं बीएसपी आफिसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार बंछोर का कहना है कि भिलाई टाउनशिप के अधिकारियों के आवासों का अत्याधिक थर्ड पार्टी आवंटन एवं आवंटन के पश्चात उन क्वाटरों पर कब्जे की प्रवृत्ति से समस्याएं उत्पन्न हो रही है। बीएसपी के डायरेक्टर इंचार्ज अनिर्बानन दासगुप्ता को ज्ञापन सौंपा गया है। इस ज्ञापन में थर्ड पार्टी कब्जेधारियों के कारण बीएसपी के अधिकारियों को बेहतर मकान उपलब्ध नहीं हो पाने की समस्या से अवगत कराया गया है। इसके समाधान के लिए इन मकानों को थर्ड पार्टी के कब्जे से मुक्त कराने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पश्चात बीएसपी के बड़े आवासों को प्रशासनिक अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को जिनका कार्यक्षेत्र भिलाई-दुर्ग रहा, उन्हें दिया गया था। समय के साथ अधिकारियों के रिटायरमेंट, स्थानांतरण के पश्चात भी अधिकतर आवास उन्हीं के कब्जे में रह गए हैं। वर्तमान परिस्थितियों में भिलाई टाउनशिप में छत्तीसगढ़ के अनेक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम से आवास आवंटित है। यद्यपि उनकी पदस्थापना दुर्ग से दूरस्थ जिलों में है। कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। परंतु विडम्बना यह है कि आज भी वे बीएसपी के मकानों पर अवैध रूप से काबिज हैं।


8000-14000 रुपये तक एचआरए का नुकसान

महासचिव परविंदर सिंह का कहना है कि नगर सेवा विभाग की अनेक कोशिशों के पश्चात भी भिलाई टाउनशिप के ये बड़े मकान प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारियों के कब्जे से नहीं निकाले जा सके हैं। इन परिस्थितियों में इस्पात संयंत्र के अधिकारी, अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। जो आज वरिष्ठता होने के पश्चात भी छोटे मकानों में रहने को मजबूर हैं। वे उसके लिए 8000-14000 रुपये तक का एचआरए के रूप में हानि भी वहन कर रहे हैं, क्योंकि 2014 से एचआरए बंद कर दिया गया है। इस कारण संयंत्र के अधिकारी प्राइवेट कालोनियों में भी मकान नहीं खरीद पा रहे हैं।

पूर्व अधिकारियों और नेताजी मकान छोड़ ही नहीं रहे

पिछले कुछ वर्षों में केन्द्र व राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों में भिलाई के मकानों के प्रति रूचि बढ़ी है, जिससे लगभग सारे बड़े मकान जो सेक्टर 5, 8, 9, 10 में है, इन सरकारी अधिकारियों, जन प्रतिनिधियों, पूर्व सरकारी अधिकारियों, पूर्व विधायकों आदि के कब्जे में है। इस कारण बहुत सारे बड़े आवास संयंत्र के अधिकारियों के पहुंच से बाहर हो गए हैं।

बीएसपी कार्मिकों से खाली कराता है छह माह में मकान

वर्तमान परिवेश में बीएसपी से सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों को 6 माह के भीतर ही मकान खाली कराया जाता है। यही नियम प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों पर भी लागू होना चाहिए। ओए ने यह मांग रखी है कि थर्ड पार्टी से खाली कराए गए सभी आवासों को बीएसपी के अधिकारियों को ही आवंटित किया जाए।

32 बंगले बनते जा रहे सांसद-विधायक आवास


ओए ने वर्तमान विस्फोटक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए बीएसपी प्रबंधन से इन थर्ड पार्टी को आवंटित मकानों की पुनः समीक्षा कर अन्यत्र पदस्थापित प्रशासनिक अधिकारियों को स्थानांतरण अथवा सेवानिवृत्ति के बाद मकान खाली कराने हेतु उच्चतम स्तर पर प्रयास करने की अपील की है। बीएसपी के इन बड़े मकानों को ऐसे थर्ड पार्टी कब्जेधारियों से मुक्त कराकर बीएसपी अधिकारियों को आवंटित करने का आग्रह किया है। ओए अध्यक्ष एवं सेफी चेयरमेन नरेन्द्र कुमार बंछोर ने 32 बंगले में ही विधायक निवास, सांसद निवास आदि चिन्हित किया जाए। सेक्टर-5, 8, 9, 10 के थर्ड पार्टी आवासों को शीघ्र ही खाली कराया जाए।

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