SAIL प्रबंधन और यूनियन ने खींची लकीर, दुर्गा पूजा खत्म होते होगी बोनस मीटिंग, प्रबंधन-यूनियन के लफड़े में नहीं फंसा चाह रहे कर्मचारी

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SAIL Bonus Controversy
बड़ा सवाल आखिर बोनस को लेकर होगा क्या? क्या बोनस को लेकर विवाद इतना बड़ा प्रबंधन और यूनियनों ने खींची अपनी अपनी लकीर।
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न कोई मंत्री हस्तक्षेप कर रहे हैं। और ना उच्च प्रबंधन और यूनियनों के बीच में कोई बात बनती दिख रही है। और इधर कर्मचारी उच्च अपेक्षाएं लेकर प्रबंधन और यूनियनों को कोस रहे हैं।

अज़मत अली, भिलाई। कोल इंडिया, टाटा स्टील, बाल्को और एनएमडीसी में जिस तरह से बोनस का वितरण किया जा रहा है, उसको लेकर सेल कर्मियों की अपेक्षाएं बढ़ती जा रही है। लेकिन मायूसी चरम पर है। प्रबंधन-यूनियनों के बीच और कर्मियों की अपेक्षाओं के बीच में एक बड़ी खाई है राशि को लेकर…। ना प्रबंधन आगे बढ़ रहा है और न यूनियने नीचे उतर रही है। इसका अंत क्या होगा। यह कोई वेतन समझौता तो नहीं…। आज नहीं तो कल…या 2 महीने या 6 महीने के बाद हल निकालेंगे। ऐसा भी नहीं है कि सब-कमेटी बनाकर निपटा लेंगे। लेकिन यहां तो त्योहारों के समय बोनस का वितरण किया जाना है।

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इसे लंबे समय तक खींचा नहीं जा सकता, तो आखिर क्या होगा। इस बीच में न कोई मंत्री हस्तक्षेप कर रहे हैं। और ना उच्च प्रबंधन और यूनियनों के बीच में कोई बात बनती दिख रही है। और इधर कर्मचारी उच्च अपेक्षाएं लेकर प्रबंधन और यूनियनों को कोस रहे हैं।

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अब कर्मियों की तरफ से मांग उठने लगी है कि बोनस लाभ के प्रतिशत में दिया जाए, लेकिन अगर उस हिसाब से देखा जाए तो यूनियनों ने मिलकर 63000 बोनस की मांग की थी, उस समय प्रबंधन ने 25200 देने की बात कही। इसके बाद अंत में प्रबंधन ने 26000 देने की बात बोलकर अपना पत्ता साफ कर दिया। पांचों यूनियन नेताओं ने अपनी मांग 45000 पर लाकर रख दी। कुछ भी तय नहीं हो सका, अब 10 अक्टूबर की मीटिंग का इंतजार किया जा रहा है।

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एक तरफ प्रबंधन बड़ी मुश्किल से दो मीटिंगों में 26000 तक पहुंचता है। कर्मचारी बड़ी अपेक्षाओं के साथ बड़ी राशि मांग रहे हैं। और जब 45000 की मांग यूनियनों ने रखी तो उस पर बड़ी संख्या में लोगों ने यूनियनों पर अपना गुस्सा उतारा या यूं कहे यूनियन नेता भी उनके निशाने पर आए और सोशल मीडिया में अपना गुस्सा उतारा।

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10 अक्टूबर तक दुर्गा पूजा समाप्त हो रहा
एक बड़ा त्योहार दशहरा दुर्गा पूजा है, जिसमें एक परिपाटी है बोनस की राशि दी जाती है। और उस समय में इस राशि का नहीं पहुंचना एक दूसरी नाराजगी को जन्म दिया। पश्चिम बंगला में दुर्गा पूजा बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। यह वजह है कि आंदोलन की शुरुआत भी वहीं से हुई। 10 तारीख को बोनस मीटिंग है। लेकिन तब तक पूजा समाप्त हो रही है।

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कर्मी नहीं फंसा चाहते प्रबंधन-यूनियन विवाद में
कर्मचारी कह रहे हैं जब त्योहारों में बोनस का वितरण किया ही नहीं जा रहा है तो हमें प्रतिशत के हिसाब से लाभ का बोनस का वितरण किया जाए। अब हमें प्रबंधन और यूनियन नेताओं के बीच में तय की गई राशि नहीं चाहिए। दूसरी तरफ प्रबंधन की ओर से यह अफवाह लगातार उड़ रही है कि कुछ एडवांस कर्मियों के खाते में डाला जाएगा, जिससे कर्मियों का आक्रोश कम होगा। लेकिन लगातार हो रहे धरना-प्रदर्शन ने कर्मियों को एवं प्रबंधन के बीच में खटास पैदा कर दिया है। अब सवाल यही है कि इसका अंत क्या होगा?

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