सेल के एकमात्र अधिकारी वीबी सिंह भारत नहीं अफ्रीकी देश मोजाम्बिक से हो रहे रिटायर, आयरन ओर और कोयला खदान में छोड़ी छाप

वीबी सिंह का जून में रिटायरमेंट है। चंद दिन ही बचे हुए हैं। इसलिए छुट्‌टी लेकर मात्रभूमि लौट आए और उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित पैतृक गांव में डेरा डाल चुके हैं।

अज़मत अली, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया-सेल के एकमात्र जनरल मैनेजर वीरेंद्र बहादुर सिंह हैं, जिन्होंने सेवा शुरू की भारत से और रिटायरमेंट अफ्रीकी देश मोजाम्बिक से ले रहे हैं। सेल में आखिरी सेवा मुजाम्बिक में रहते हुए पूरी की। जून में रिटायरमेंट है। चंद दिन ही बचे हुए हैं। इसलिए छुट्‌टी लेकर मात्रभूमि लौट आए और उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ स्थित पैतृक गांव में डेरा डाल चुके हैं। वीबी सिंह का प्लस प्वाइंट यह है कि भिलाई स्टील प्लांट के आयरन ओर माइंस दल्ली राजहरा खदान, नंदिन लाइम स्टोन माइंस और मोजाम्बिक के कोयला खदान में सेवा दी। इंटरनेशनल कोल वेंचर्स लिमिटेड-आइसीवीएल में बड़ी जिम्मेदारी देकर सेल ने इन्हें मोजाम्बिक भेजा था। साथ ही यह भी आदेश था कि रिटायरमेंट तक सेल के लिए अफ्रीका से कोयले की व्यवस्था करते रहेंगे।

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वीबी सिंह की इन तीन उपलब्धियों के लिए सेल करता रहेगा याद

अमेरिका-ब्रिटेन तक पहुंचा सेल प्रोडक्ट: वीबी सिंह की उलब्धियों की बात की जाए तो काफी लंबी फेहरिस्त मिलेगी। टॉप-3 उपलब्धियों का ही यहां जिक्र किया जा रहा है। भिलाई स्टील प्लांट के प्लेटमिल के साथ दल्ली मैकेनाइज्ड माइंस का इनवायरमेंट मैनेजमेंट सिस्टम डिजाइन किया। साथ ही इम्प्लीमेंटेशन किया, जिससे आइएसओ-14001 का सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ है। इस सर्टिफिकेट के बाद से बीएसपी का प्रोडक्ट अमेरिका और यूरोप में पहुंच सका। सर्टिफिकेट न होने से दोनों देशों में रोक लगी हुई थी।
राजहरा में प्लांट और नंदिनी का कायाकल्प: साल 2008-09 में वीबी सिंह ईडी माइंस नीजर कुमार मेल्शन के टेक्नीकल एडवाइजर बने। इसके बाद कई ईडी के साथ कार्य करते रहे। लो-ग्रेड के बेनिफिसिएशन की टेक्नोलॉजी सीखने के लिए आस्ट्रिया गए। वहां से सीखकर आने के बाद बीएसपी के राजहरा माइंस के प्रोजेक्ट में इंवाल्व हो गए। आयरन ओर की क्वालिटी को बेहतर करने के लिए प्लांट लगाने का प्लान इन्होंने ही तैयार किया, जिसे सेल प्रबंधन ने मंजूरी दी। इसके बाद मंत्री व चेयरमैन ने उद्घाटन तक किया। इसी तरह नंदिनी लाइम स्टोन माइंस का कायाकल्प कर दिया। नंदिनी का एक एरिया खनन न होने से तालाब बन चुका था। एनीकट बनाकर उसका रास्ता खोला और आज सेल को यहां से उच्च गुणवत्ता का लाइम स्टोन प्राप्त हो रहा है। करोड़ों की बचत भी।

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मोजाम्बिक में हेड ऑफ माइनिंग ऑपरेशन: सेल प्रबंधन ने इंटरनेशनल कोल वेंचर्स लिमिटेड-आइसीवीएल मोजाम्बिक के लिए जुलाई 2021 में इनकी पोस्टिंग की। कोरोना की वजह से देरी से पहुंचे, जबकि 2020 में ही इन्हें वहां ज्वाइन करना था। कोल सप्लाई की जिम्मेदारी मिली। हेड ऑफ माइनिंग ऑपरेशन बनाए गए। प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दिया। मार्च 2022 में सर्वाधिक उत्पादन और डिस्पैच का रिकॉर्ड भी वीबी सिंह के नाम है। करोडों का राजस्व हासिल किया।

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जानिए वीरेंद्र बहादुर सिंह के बारे में…

-1989 बैच में चंद्रपुर फेरो अलॉय डिविजन से कॅरियर शुरू किया। 1995 मई में भिलाई ट्रांसफर करके आए। यहां से राजहरा आयरन ओर माइंस भेजा गया।
-यूके से इंवायरमेंट क्लियरेंस सर्टिफिकेशन कोर्स पूरा किया।
-यूपी के प्रतापगढ़ के मूल निवासी है। इनके पिता एबी सिंह 1958 में बीएसपी के इलेक्ट्रिकल शॉप में कर्मचारी थे।
-प्राइमरी एजुकेशन भिलाई के कैंप-1 से हुई। इसके बाद भिलाई विद्यालय सेक्टर-2 में पढ़ाई की। चाचा के साथ राजहरा गए और फिर वहीं पढ़ाई हुई। रीवां गवर्नमेंट कॉलेज से 1988 में बीटेक किया। 1989 में सेल ज्वाइन किया।

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