सेल का उच्च प्रबंधन यूरोप में सैर-सपाटे में था व्यस्त, बकाया के लिए अधिकारी चक्कर लगाकर हो रहे पस्त, मंत्री, सचिव तक पहुंचा सेफी

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेफी के पदाधिकारियों ने केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते, इस्पात सचिव संजय सिंह, इस्पात संयुक्त सचिव अभिजीत नरेन्द्र से उद्योग भवन नई दिल्ली में विस्तृत चर्चा की। 11 महीने के पर्क्स का एरियर्स (26.11.2008 से 04.10.2009 तक), मेकॉन में तीसरा पे-रिविजन जल्द लागू करने की मांग की गई। सेफी पदाधिकारियों ने वित्तीय वर्ष 2018-19 का इंक्रीमेंटल पीआरपी, आर आईएनएल के अधिकारियों के पिछले वर्षों से लंबित प्रमोशन को शीघ्र चालू करना, एनएमडीसी के अधिकारियों को थर्ड पे-रिविजन में “डासा“ (डिफिकल्ट एरिया सर्विस एलाउंस) का भुगतान चालू करने की वकालत की।

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इसी तरह जनवरी 2017 से फरवरी 2018 तक सेवानिवृत्त हुए अधिकारियों को थर्ड पे-रिविजन के अनुसार ग्रेच्युटी का भुगतान, सेल पेंशन योजना की राशि पर ब्याज 01.01.2007 से दिलवाने की अवाज उठाई गई। साथ ही थर्ड पे-रिविजन का 39 महीने का एरियर्स (01.01.2017 से 31.03.2020 तक), भिलाई टाउनशिप में अवैध कब्जों एवं विद्युत आपूर्ति सीएसपीडीसीएल को हस्तांतरित करने हेतु तथा इस्पात संयंत्रों के विनिवेश के स्थान पर सामरिक विलय (स्ट्रेटेजिक मर्जर) आदि विषयों पर चर्चा की गई। सेफी प्रतिनिधि मंडल की ओर से चेयरमेन सेफी नरेन्द्र कुमार बंछोर, सेफी महासचिव अबकाश मलिक, सेफी उप महासचिव आर. सतीश उपस्थित थे।

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सेफी बोला-अधिकारियों को इंक्रीमेंटल पीआरपी देकर करें प्रोत्साहित

सेफी चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर के मुताबिक अधिकारियों के प्रतिनिधि मंडल की केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री, इस्पात सचिव एवं संयुक्त सचिव से चर्चा सकारात्मक रही। सेल में पीआरपी की गणना में इंक्रिमेंटल लाभ को डीपीई के दिशानिर्देशों के अनुरूप समायोजित करने की अनुशंसा करने का आग्रह किया है। विदित हो कि वित्त वर्ष 2017-18 में सेल ने कर पूर्व कुल हानि 759 करोड़ रूपये घोषित किया एवं वर्ष 2018-19 में कर पूर्व कुल लाभ 3338 करोड़ रुपए घोषित किया। जिससे इंक्रिमेंटल लाभ 4097 करोड़ रुपए पर आधारित पीआरपी की गणना करने की मांग, जो कि सेल में हुए टर्नअराउंड का लाभ, सभी अधिकारियों को इंक्रिमेंटल पीआरपी देकर प्रोत्साहित किया जा सकता है।

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उच्च प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे अधिकारी

सेफी का कहना है कि 26.11.2008 से 05.10.2009 के 11 माह के पर्क्स की राशि के भुगतान हेतु कैट द्वारा आवश्यक आदेश पारित करने के बावजूद सेल प्रबंधन ने इस मुद्दे को रोकने का प्रयास किया है। जिसके फलस्वरूप अधिकारियों को अपने वाजिब हक की राशि अब तक नहीं मिल सकी है। विदित हो कि यह मुद्दा तत्कालीन सेल प्रबंधन के लापरवाही का जीता जागता उदाहरण है। सरकार के दिशानिर्देश के तहत इस भुगतान को करने के लिए सेल प्रबंधन को अप्रैल 2008 में बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव पारित कर मंत्रालय को प्रेषित करना था, परंतु विडम्बना यह है कि उस वक्त सेल का उच्च प्रबंधन अपने सैर-सपाटे में यूरोप में व्यस्त था।

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जिसके कारण उन्होंने सरकारी दिशानिर्देश के तहत दिए गए समय-सीमा के भीतर इस प्रस्ताव को रखने में देरी हुई, जबकि उस वक्त सेल के पास हजारों करोड़ रुपए की सरप्लस राशि उपलब्ध थी। सेल के तत्कालीन उच्च प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा आज भी सेल के अधिकारी भुगत रहे हैं। इस संदर्भ में ज्ञात हो कि इस मुद्दे पर राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आर.आई.एन.एल.) ने तत्काल कार्यवाही करते हुए बोर्ड मीटिंग में इस प्रस्ताव को पारित कर अपने अधिकारियों को पूरा लाभ दिलाया। सेफी ने सेल में 11 महीने के पर्क्स हेतु कैट में अपील की थी एवं कैट द्वारा सेफी के पक्ष में फैसला दिया गया। इस फैसले के विरूद्ध सेल प्रबंधन ने कोलकाता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। सेफी इस मुद्दे का हल निकलवाने हेतु इस्पात मंत्रालय से हमेशा अपील करता रहा है।

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