भिलाई स्टील प्लांट में नॉन एग्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान शुरू, बढ़ा आक्रोश

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट में नॉन एग्जीक्यूटिव प्रमोशन पॉलिसी-एनईपीपी के खिलाफ माहौल बनने लगा है। पॉवर प्लांट, कोक ओवन, आरटीएस के कर्मचारियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाया। कर्मचारियों ने पॉलिसी से होने वाले नुकसान की बात प्रबंधन को बताई है। लगातार विरोध दर्ज किया जा रहा है। रेल मिल के कर्मचारी भी सोमवार को हस्ताक्षर अभियान चलाने की तैयारी में है। इस बाबत रविवार शाम को बैठक में फैसला लिया जाएगा। वहीं, श्रम विभाग में परिवाद भी दायर किया जा चुका है।

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कर्मचारियों का कहना है कि वरिष्ठता सूची को विभागों में डिस्प्ले किया जा रहा है। प्रबंधन ने इस पर आपत्ति दर्ज कराने का समय दिया है। 27 मई तक कार्मिक विभाग में कर्मचारी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। रेल मिल, कोक ओवन सहित कई विभागों में इसे लागू करते ही विरोध शुरू हो गया है। कर्मचारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। समझौता पत्र पर हस्ताक्षर करने वाली यूनियन इंटक के नेता कर्मचारियों के निशाने पर हैं। खास यह कि हस्ताक्षर करने वाली यूनियन के कुछ नेता भी इसके खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं।

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इस पूरे मामले को सीटू ने लपक लिया है। संगठन सचिव टी. जोगाराव का कहना है कि चार्जमैन का पद हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। कर्मचारियों को नुकसान हो रहा है। 23 से 28 जून 2021 तक वेतन समझौते की महत्वपूर्ण बैठक चल रही थी। बैठक लगातार 6 दिनों तक चली, लेकिन इस बीच 25 जून को प्रबंधन की तरफ से मान्यता प्राप्त यूनियन को बुलाया जाता है और यूनियन इस पॉलिसी पर साइन करती है।

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दस्तखत करने वाले यूनियन के पदाधिकारी ही नहीं मानते हैं इस पॉलिसी को

जोगा राव का कहना है कि जिस यूनियन ने इस एनईपीपी में साइन किया है। उन्हीं के नीचे के पदाधिकारियों को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। ज्यादातर विभागों में उनके विभागीय पदाधिकारी ही इसके विरोध में हैं। उनका कहना है कि ऊपर के पदाधिकारी दस्तखत करने से पहले अपने निचले स्तर के पदाधिकारी एवं सामान्य कार्यकर्ताओं से भी चर्चा नहीं किए हैं। इसके लागू होने से उन्हें भी नुकसान हो रहा है।

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नहीं मालूम रेल मिल में कितनों को मिलेगा 3 साल में प्रमोशन

सीटू नेता ने कहा कि रेल मिल में कितने कर्मचारीयों को एनइपीपी लागू होने के बाद 3 साल में प्रमोशन मिल रहा है। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। न ही प्रबंधन और न ही दस्तखत करने वाले यूनियन नेता रेल मिल में इस बात का खुलासा कर पा रहे हैं कि कितने कर्मियों को इस पालिसी के लागू होने के बाद फायदा होगा। कितने कर्मी अपनी सीनियारिटी को खो देंगे। ऐसे में इस पॉलिसी को क्यों थोपा गया है।

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