Sports News: कर्नाटक के राजपरिवार में 1854 में खेला जाता था बॉल बैडमिंटन, भिलाई में बच्चे सीख रहे इसकी बारीकी

डेढ़ सौ वर्ष से ज्यादा पुराने बॉल बैडमिंटन गेम को 1854 में दक्षिण भारत कर्नाटक के तंजावुर में राजपरिवार द्वारा खेला जाता था। विकास के कई दौर से गुजरते हुए बॉल बैडमिंटन आज वुडन एवं ग्रेफाइट रैकेट के साथ लंबा सफर तय किया है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र का समर कैंप आखिरी पड़ाव पर है। 6 मई से शुरू हुआ समर कैंप 9 जून को खत्म होगा। ग्रीष्मकालीन खेल प्रशिक्षण शिविर में भिलाई के बच्चे किसी न किसी खेल के मैदान से जुड़कर बारीकियों को सीख रहे हैं। ऐसे ही एक रैकेट गेम बॉल बैडमिंटन को सीखने वाले बच्चों का हौसला बुलंद है। बॉल बैडमिंटन खेल परिसर सेक्टर-4 में बच्चों को निखारा जा रहा है।

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सबसे पुराने रैकेट गेम का गौरव हासिल है बॉल बैडमिंटन को

बैडमिंटन कोच डीवीएस रेड्‌डी बताते हैं कि डेढ़ सौ वर्ष से ज्यादा पुराने बॉल बैडमिंटन गेम को 1854 में दक्षिण भारत कर्नाटक के तंजावुर में राजपरिवार द्वारा खेला जाता था। विकास के कई दौर से गुजरते हुए बॉल बैडमिंटन आज वुडन एवं ग्रेफाइट रैकेट के साथ लंबा सफर तय किया है। 25 ग्राम के उलन बॉल के साथ खेला जाने वाला यह खेल बहुत ही हाई स्पीड खेलों की श्रेणी में आता है, जिसमें कभी-कभी तो खिलाड़ी द्वारा मारा गया हैवी शॉट 300 मील की रफ्तार से अगले खिलाड़ी तक पहुंचता है। अगला खिलाड़ी इसे डिफेंस भी करता है। 35 पॉइंट वाले इस गेम में तीन सेट का एक मैच खेला जाता है।

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जानिए खेल के बारीकियों के बारे में

बॉल बैडमिंटन कोच बताते हैं कि सभी रैकेट गेम अपने आप में उच्च कुशलता वाले खेल हैं, जिनमें कड़े अभ्यास एवं बहुत परिश्रम की आवश्यकता होती है। खेल ज्वाइन करने वाले बच्चों को व्यायाम से शुरू करके धीरे-धीरे बैट पकड़ने, बाल एवं बैट के बीच सामंजस्य बैठाने के लिए अंडर हैंड, बैक हैंड, कंबाइन, ट्रबलिंग के साथ-साथ वॉल प्रैक्टिस करना सिखाया जाता है। इसके साथ ही साथ धीरे-धीरे खेल के नियमों से अवगत कराते हुए नेट पर प्रैक्टिस करने के लिए बच्चों को तैयार किया जाता है।

लोकल टूर्नामेंट खेलने से निखरता है बच्चों का खेल

कोच ने कहा कि खेल हो पढ़ाई हो या कोई भी कुशलता हो उसे हासिल करने के लिए लगातार अभ्यास की आवश्यकता होती है। बॉल बैडमिंटन में अक्सर छोटे-छोटे टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं। लोकल टूर्नामेंट में बच्चे जब आपस में खेलते हैं तो न केवल उनका अभ्यास बढ़ता है, बल्कि मैच जीतने का लगन के साथ-साथ खेल के दौरान होने वाली छोटी-छोटी गलतियों पर काबू पाने तथा खेल के दौरान अपने आप पर नियंत्रण रखने और विपरीत परिस्थितियों में गेम को अपने पक्ष में करने की कुशलता भी सीखते हैं।

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किसी न किसी खेल से जुड़ना चाहिए हर बच्चे को

चर्चा के दौरान कोच कहते हैं कि सभी खेल के अपने महत्व हैं, जिनसे बच्चों का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। इसीलिए बच्चों को अपने मन मुताबिक खेल पसंद करने की आजादी रहनी चाहिए। साथ ही साथ पलकों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को प्रेरित करें कि उनके बच्चे किसी न किसी खेल से जुड़े।

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