आरआईएनएल, सेल, नगरनार, एनएमडीसी, मेकॉन का रणनीतिक विलय कर बनाएं एक मेगा स्टील पीएसयू

स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया-सेफी ने कहा-इस्पात क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के रणनीतिक विलय की जरूरत।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। पब्लिक सेक्टर यूनिट को बेचने के बजाय दूसरी इकाइयों में विलय का फॉर्मूला स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया ने सरकार को दिया था। लोकसभा में इस पर चर्चा तक हो चुकी है। लेकिन आज तक अमल नहीं किया गया है। सेफी ने एफएसएनएल को बेचने के बजाय सेल में विलय की मांग को तेज कर दिया है। संकट के दौर से गुजर रहे एनएफएसएन के कर्मचारियों और अधिकारियों ने सेफी पदाधिकारियों के साथ रविवार को बैठक की।

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एफएसएनएल के अधिकारी संघ के प्रतिनिधियों ने प्रगति भवन पहुंच कर ओए-बीएसपी की कार्यकारिणी सदस्यों से छत्तीसगढ़ में स्थित इस उपक्रम को निजी हाथों में जाने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की, ताकि राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा की जा सके। सेफी चेयरमेन व ओए-बीएसपी अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार बंछोर ने एफएसएनएल के अधिकारी संघ के प्रतिनिधियों को आशवस्त किया कि सेफी व ओए-बीएसपी इस्पात क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के रणनीतिक विलय के लिए हमेशा प्रयासरत रहा है। विलय के लिए लोकसभा में भी सेफी के संकल्प पर चर्चा हुई है।

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प्रधानमंत्री कार्यालय, इस्पात मंत्रालय एवं वित्त मंत्रालय से एफएसएनएल के विनिवेश रोकने के लिए आवश्यक कदम शीघ्र ही उठाएगा। सेफी की आगामी बैठक में इस्पात मंत्रालय के अधीन कुछ सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश की जगह इनका रणनीतिक विलय हेतु चर्चा कर आगे की रणनीति इसी माह तय की जाएगी।

इस बैठक में सेफी चेयरमेन व ओए अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार बंछोर, ओए महासचिव परविन्दर सिंह, सेफी नामिनी अजय कुमार, कोषाध्यक्ष अंकुर मिश्रा, सचिव रेमी थॉमस एवं अखिलेश मिश्रा एवं जोनल प्रतिनिधियों के साथ एफएसएनएल अधिकारी संघ से सचिव दीपक तोमर, उपाध्यक्ष के. गिरीश तथा सदस्य प्रशांत साहू, अभिषेक सिंह, जी. श्रीनिवास आदि शामिल थे।

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मेगा स्टील पीएसयू का करें गठन

सेफी ने नई दिल्ली में दिनांक 04.04.2021 को आयोजित सेफी काउंसिल की बैठक में इस्पात क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के रणनीतिक विलय हेतु संकल्प पारित किया था। जिससे सेफी से संबद्ध इस्पात मंत्रालय के अधीन उपक्रम आरआईएनएल, सेल, नगरनार इस्पात संयंत्र, एनएमडीसी, मेकॉन आदि का रणनीतिक विलय कर इस्पात मंत्रालय के अंतर्गत एक मेगा स्टील पीएसयू का गठन किया जा सके। सेफी के संकल्प को आधार बनाकर 15.12.2021 को लोकसभा में इस्पात क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के रणनीतिक विलय के विषय पर चर्चा की गई। सेफी ने फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड के द्वारा संचालित अत्यंत संवेदनशील प्रक्रियाओं तथा निजी क्षेत्र के आगमन से संभावित आशंकाओं का संज्ञान लेते हुए इस कंपनी के निजीकरण के स्थान पर इनका विलय सेल में किये जाने की मांग रखी है।

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जानिए तीन साल में एफएसएल का प्रॉफिट

फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड इस्पात मंत्रालय के अधीनस्थ एक सरकारी उपक्रम है, जिसका मुख्यालय भिलाई छत्तीसगढ़ में है। यह संस्था मुख्यतः सरकारी स्टील उपक्रमों जैसे सेल, आरआईएनएल एवं एनएमडीसी जैसे उपक्रमों में स्क्रैप प्रोसेसिंग का कार्य करती है। फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड स्थापना वर्ष सन् 1979 से ही लगातार अपने कर्मचारियों की मेहनत और लगन के बदौलत आज तक कभी भी घाटे में नहीं रही है। विगत तीन वर्षों में क्रमशः 41.09 करोड़ 46.02 करोड़ और 32.06 करोड़ का लाभ दिया है और वित्तीय वर्ष 2021-22 में सिर्फ 09 महीने में ही 42.67 करोड़ का लाभ अर्जित कर चुका है।

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600 स्थायी एवं 3000 अस्थायी कर्मचारी कार्यरत

वर्तमान में फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड को छत्तीसगढ़ के एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट में 240 करोड़ रुपए का कार्य मिला है। सैकड़ों स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार का मौका मिलेगा। वर्तमान में फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड में विभिन्न इकाईयों मे लगभग 600 स्थायी एवं 3000 अस्थायी कर्मचारी कार्यरत है।

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आप भी जानिए जेपी शुक्ला समिति की अनुशंसा रिपोर्ट

जेपी शुक्ला समिति ने फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड के विभिन्न इकाईयों का साईट निरीक्षण और सूक्ष्म एवं गहन अध्ययन के उपरांत समिति ने यह अनुशंसा किया कि फेरो स्क्रैप निगम लिमिटेड को सेल का सब्सिडरी कंपनी बनाया जाए। या फिर सेल, आरआईएनएल एवं एमएसटीसी लिमिटेड के साथ संयुक्त उद्यम बनाया जाए, जिसमे सेल मेजारिटी शेयरधारक हो।

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एफएसएनएल से सेल व अन्य सार्वजनिक इस्पात उपक्रमों को लाभ

-विगत चार दशकों से एफएसएनएल सेल एवं अन्य सार्वजनिक इस्पात उपक्रमों को निर्विवाद एवं निर्बाध रूप से अपनी बहुमूल्य सेवाए दे रहा है। इतने वर्षों में एफएसएनएल इस्पात संयंत्रों का आंतरिक हिस्सा बन गया है।
-एफएसएनएल के द्वारा सेल एवं अन्य सार्वजनिक इस्पात उपक्रमों में स्लैग एवं स्क्रैप प्रोसेसिंग के द्वारा आयरन एवं स्टील स्कैप की रिकवरी की जाती है। जिसे सेल द्वारा अपने सयंत्रो में विभिन्न लौह उत्पाद बनाने में उपयोग किया जाता है।
-एफई इनरिचमेंट प्लांट से 45 प्रतिशत से 85 प्रतिशत कम ग्रेड के स्कैप में वेल्यू एडिशन का कार्य किया जाता है। साथ ही साथ ब्लास्ट फर्नेस (बीएफ) व स्टील मेल्टिंग शॉप (एसएमएस) हॅाट स्लैग पिट प्रबंधन लांसिंग और बॉलिंगए मिल अपशिष्टों को संकलन एवं प्रक्रमण इत्यादि सेवाएं प्रदान की जाती है।
-इन विगत समय में एफएसएनएल अपने कार्य से सेल एवं अन्य सार्वजनिक इस्पात उपक्रमों का अभिन्न अंग बन गया है।

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एफएसएनएल के विनिवेश से सरकार को नुकसान

-एफएसएनएल द्वारा प्रतिवर्ष औसतन 25.00-35.00 करोड़ रुपए लाभांश के तौर पर दिया जा रहा है, जबकि भारत सरकार के द्वारा मात्र 32.00 करोड़ का निवेश किया गया था।
-एफएसएनएल कम लागत में अधिक लाभ देने वाली संस्था है।
-वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान भी एफएसएनएल ने सरकार एवं समाज को हर संभव सुविधाएं प्रदान की है। इस विकट परिस्थितियों में एफएसएनएल जैसे हीरे को निजी हाथों में सौंपना भारत सरकार की एक बहुत बड़ी भूल होगी।
-एफएसएनएल के विनिवेश से न सरकार को क्षति होगी, बल्कि इससे सरकारी इस्पात संयंत्रों को भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से क्षति होगी।
-एफएसएनएल के निजीकरण के पश्चात स्क्रैप माफिया एवं बिचौलियों के लिए सरकारी इस्पात संयंत्रों में घुसपैठ के अवसर उपलब्ध हो जाएंगे, जिससे राष्ट्रीय संपत्ति का नुकसान होना तय है।

  • एफएसएनएल में मौजूदा स्थिति में कार्यरत कर्मचारियों के अलावा कोई भी ठोस/स्थायी संपत्ति नहीं है।

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