वीरांगना झलकारी बाई को लक्ष्मी बाई समझकर अंग्रेज करते रहे युद्ध…

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heroic Jhalkari Bai
1857 स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुई अमर वीरांगना झलकारी बाई की 192 जयंती मनाई गई।
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सूचनाजी न्यूज, भिलाई। अखिल भारतीय कोरी समाज रजिस्टर्ड नई दिल्ली छत्तीसगढ़ इकाई भिलाई द्वारा 1857 स्वतंत्रता संग्राम में शहीद हुई अमर वीरांगना झलकारी बाई की 192 जयंती मनाई गई। भिलाई साकेत नगर शेखर लाचोरिया के निवास पर बड़े ही धूमधाम से जयंती मनाई गई।

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झलकारी बाई के जीवन के बारे में जिला अध्यक्ष महेश कुमार विनोदिया ने बताया कि झलकारी बाई का जन्म झांसी के भोजला गांव में एक निर्धन कोरी परिवार में हुआ था। बचपन से ही बहुत निडर और साहसी थीं, उनके पिता ने शुरू से ही उन्हें लड़के की तरह शस्त्र विद्या का ज्ञान दिया। उनकी बहादुरी और निडरता की जानकारी जब झांसी की रानी लक्ष्मी बाई को हुई तो उन्होंने उन्हें अपनी दुर्गा सेना में जगह दी।

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जहां बाद में वह वहां की सेनापति बनीं। जब अंग्रेजों ने झांसी पर आक्रमण किया और रानी झांसी सब जगह से घिर गई थी, झलकारी बाई ने रानी झांसी का वेश रखकर रानी को वहां से निकाल दिया और अंग्रेजों के साथ युद्ध करती रहीं, क्योंकि उनका डीलडोल और चेहरा रानी जैसी लगता था। इसलिए अंग्रेज धोखें में उन्हें रानी समझ कर युद्ध करते रहे और रानी वहां से निकल गईं थी। अंत में वह युद्ध करते करते वीरगति को प्राप्त हुई।

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प्रदेश महामंत्री अशोक माहौर ने कहा कि उस समय की सामाजिक परिस्थितियां महिलाओं के लिए विपरीत थी, उसके बाद भी उनके पिता ने उन्हें जिस प्रकार साहसी और निडर बनाया और उन्हें शस्त्र विद्या का ज्ञान दिया। यह उनके पिता का, उस समय का बहुत बड़ा फैसला था। ऐसे पालनहार भी इतिहास के पन्नों में अमर हो गए हैं।

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जयंती कार्यक्रम में टीआर शाक्य, डीपी कबीरपंथी ने भी अपने विचार रखें। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन बीआर वर्मा ने किया। कार्यक्रम में जिला महामंत्री शेखर लाचोरिया, एचएन टंकोरिया, मुकेश तंतुवे, बीआर वर्मा, रामजी कोरी, डीपी कबीर पंथी, बीआर कटारे, सुमन माहोर, जानकी कोरी, मीना कोरी, मधु विनोदिया, अनीता लाचोरिया, राजशेखर, रोहित, देव सहित कार्यकारिणी के अन्य सदस्य मौजूद थे।

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