RINL को बिकने से बचाने की लड़ाई पहुंची भारत जोड़ो यात्रा तक, आधे घंटे तक Rahul Gandhi ने सुनी दास्तां, कहा-बचाएंगे PSU

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तेलंगाना-कनार्टक बार्डर पर तय समय के मुताबिक आधे घंटे तक आरआइएनएल सहित सेल व अन्य पीएसयू पर चर्चा की गई। राहुल गांधी से मुलाकात की।
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आरआइएनएल के यूनियन नेताओं ने राहुल गांधी से मांग की है कि भारत के सबसे बड़े और एकमात्र तट आधारित एकीकृत इस्पात संयंत्र-"विशाखापत्तनम स्टील प्लांट" का दौरा करें।

सूचनाजी न्यूज, विशाखापट्‌टनम: राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड-आरआइएनएल के निजीकरण के खिलाफ चल रहा आंदोलन काग्रेस के भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) से भी जुड़ गया। विशाखपट्‌टनम स्टील प्लांट के कर्मचारी प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से मुलाकात की। तेलंगाना-कनार्टक बार्डर पर तय समय के मुताबिक आधे घंटे तक आरआइएनएल सहित सेल व अन्य पीएसयू पर चर्चा की गई।

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मान्यता प्राप्त यूनियन एटक के महासचिव डी. आदिनारायण ने राहुल गांधी को एक-एक बिंदुओं पर विस्तार से जानकारी दी। राहुल गांधी ने सारी बातों को सुनने के बाद जवाब दिया कि कांग्रेस पीएसयू को जीवित रखने में विश्वास रखती है। पीएसयू सोशल वेलफेयर का काम करती है। इसलिए आरआइएनएल सहित अन्य इकाइयों को बिकने नहीं दिया जाएगा। कांग्रेस इसके लिए आंदोलन को तेज करेगी। केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनते ही निजीकरण के सभी फैसले कैंसिल कर दिए जाएंगे।

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विशाखा उक्कु परिरक्षण पोराटा समिति (VISAKHA UKKU PARIRAKSHANA PORATA COMMITTEE) के बैनर तले एटक, सीटू, इंटक, एचएमएस सहित सभी यूनियन के करीब 20 प्रतिनिधि 780 किलोमीटर की दूरी तय कर बार्डर पर पहुंचे। वहां राहुल गांधी के साथ संवाद कार्यक्रम हुआ। नेताओं ने राहुल गांधी को मांग पत्र सौंपा। जिसमें आरआईएनएल-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र की नीतिगत बिक्री को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया। आरआईएनएल को निजी लौह अयस्क खदान आवंटित कराने के लिए मांग की गई।

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राहुल जी आपकी दादी ने रखी थी नींव

-श्रमिक नेताओं ने राहुल गांधी से कहा कि आपकी दादी इंदिरा गांधी के कर कमलों से 1971 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री आपके परदादा जवाहरलाल नेहरू के शब्दों “सार्वजनिक क्षेत्र भारत के आधुनिक मंदिर हैं” के अनुसरण में का पालन करते हुए आरआईएनएल-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र का नींव रखी थी।

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प्रधानमंत्री पीवी नरसिंहा राव ने अगस्त 1992 में आरआईएनएल-विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र का लोकार्पण किया और वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आरआईएनएल के विस्तारण हेतु नींव डाला गया।

-कांग्रेस सरकार हमेशा आर आई एन एल के समर्थन में रही और वर्ष 2012 में विनिवेश के फैसले को वापस ले लिया।

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-वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा लिए गए निर्णय से अब आरआईएनएल-वीएसपी की कार्यनीतिगत बिक्री के तहत संयंत्र निजीकरण के खतरे में है और हम आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर हैं।

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पढ़ें-मांग पत्र के सभी 12 बिंदुओं को…

  1. 1.भारत सरकार (जी ओ आई) के आर्थिक मामलों से संबंधित मंत्रिमंडल समिति (सी सीई ए) की दि.27 जनवरी, 2021 को आयोजित बैठक में सहायक कंपनियों/संयुक्त उद्यमों में आर आई एन एल के हिस्से के साथ-साथ राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आर आई एन एल) (जिसे विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र या वाइजाग इस्पात संयंत्र भी कहा जाता है) में भारत सरकार की हिस्सेदारी के 100% विनिवेश के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई।
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2.उपर्युक्त कार्रवाई के कारण, जनता के बीच विशेष रूप से विशाखपट्टणम शहर और आंध्र प्रदेश (एपी) राज्य में दि.3 फरवरी 2021 से बड़े पैमाने पर एक जन आंदोलन चल रहा है। जन आंदोलन जैसे राज्य व्यापी बंद, राज्य व्यापी रास्ता-रोको, भूख हड़ताल, विरोध मार्च आदि विभिन्न रूपों में चल रहा है। राजनीतिक दल, श्रमिक संघ यूनियन अपनी राजनीतिक जुड़ाव और बंधनों को पार किया और जन संगठन भी इस जन आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

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3.आपके संज्ञान में लाना चाहेंगे कि आर आई एन एल एक नवरत्न कंपनी है, जो आंध्र प्रदेश का आभूषण है। यह 35,000 लोगों के कार्यबल के साथ आंध्र प्रदेश में सबसे बड़ा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र है और लगभग एक लाख परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अपनी आजीविका के लिए वाइजाग स्टील पर निर्भर हैं। वाइजाग इस्पात संयंत्र की स्थापना के कारण विशाखा शहर का विकास हुआ और आंध्र प्रदेश में अन्य शहरों की तुलना में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय पंजीकृत होता है।

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4.वर्ष 1966 में संयुक्त आंध्र प्रदेश में 32 लोगों के महान बलिदान के साथ “विशाखा उक्कु अंध्रुला हक्कु” नामक नारे के साथ एक बड़े संघर्ष के परिणामस्वरूप विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र (वीएसपी) की स्थापना की गई थी। विशाखपट्टणम में 5 वें एकीकृत इस्पात संयंत्र के रूप में आवंटित नहीं करने के तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के फैसले के विरोध में विपक्षी दल के सभी सांसदों, विधायकों ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन लोगों ने लड़ाई लड़ी और विशाखपट्टणम इस्पात संयंत्र प्राप्त किया। विशाखा इस्पात संयंत्र तेलुगु लोगों की एक मजबूत भावना है और तेलुगु लोग वीएसपी को सार्वजनिक क्षेत्र में जारी रखना चाहते हैं लेकिन किसी निजी संगठन के रूप में नहीं।

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5.विशाखपट्टणम के लोगों ने आरआईएनएल की स्थापना के लिए 22,000 एकड़ जमीन दिया और 68 गांवों से परिवारों को विस्थापित किया गया। ऐसे कई त्यागों से स्थापित इस संयंत्र की स्थापना के दौरान भारत सरकार ने एक विस्थापित परिवार को नौकरी देने का अपना वादा पूरा नहीं किया है। अब तक, केवल 8,000 कर्मचारियों को स्थायी नामावली में पर भर्ती की गयी (यह इस विशाल संयंत्र के विस्थापित लोगों का लगभग 50% मात्र है)।

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6.आप जानते हैं कि तंतर्राष्ट्रीय स्तर पर धातुकर्म उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं और भारतीय इस्पात उद्योग इसका अपवाद नहीं है। मेसर्स भूषण स्टील्स, मेसर्स एस्सार स्टील आदि जैसे एकीकृत इस्पात संयंत्रों को बंद कर दिया गया है और दिवालिया घोषित कर दिया गया है। लेकिन आरआईएनएल का प्रचालन सुव्यवस्थित रूप से हो रहा है। वीएसपी ने वर्ष 2014-15 तक 13 वर्षों तक लगातार लाभ अर्जित किया है, जो कुल मिलाकर 12,958 करोड़ रुपये है। वर्ष 2005-06 में 120% का उच्चतम क्षमता उपयोग हासिल किया गया था, वर्ष 2004-05 में 2,008 करोड़ रुपये का कर पश्चात उच्चतम लाभ प्राप्त किया गया था, और वर्ष 2018-19 में 20,800 करोड़ रुपये का उच्चतम कारोबार हासिल किया गया था।

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7.हम आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं कि हाल के दिनों में अत्यंत कम समय में ही वीएसपी ने उत्पादन लागत पर भारतीय रेलवे के माध्यम से आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र को लगभग 10,000 मेट्रिक टन तरल चिकित्सा ऑक्सीजन (एलएमओ) की आपूर्ति करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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8.गुणवत्तापूर्ण इस्पात के उत्पादन और विपणन में आरआईएनएल सर्वश्रेष्ठ है। इसे इस्पात उद्योग में सर्वोत्कृष्ट निष्पादन पुरस्कार मिले हैं, जैसे कि 2002-03 और 2005-06 के लिए देश में सर्वश्रेष्ठ एकीकृत इस्पात संयंत्र के लिए पीएम ट्रॉफी और 2006-07 और 2009-10 में इस्पात मंत्री ट्रॉफी। इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरआईएनएल के पास एक उत्कृष्ट लेआउट, 18,000 एकड़ की भूमि सहित बुनियादी ढांचा और एक बड़ा कुशल कार्यबल है, जो इसे प्रति वर्ष 20 मिलियन टन द्रव इस्पात तक अपनी क्षमता का विस्तार करने के लिए उपयुक्त बनाता है।

9.राष्ट्रीय इस्पात नीति (एनएसपी), 2017 में हमारे राष्ट्र के विकास के लिए 2030 तक 300 मिलियन टन प्रतिवर्ष उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रस्ताव किया गया है। राष्ट्रीय इस्पात नीति (एनएसपी) में कहा गया है (अनुच्छेद 4.15.4) कि सरकार का इरादा है कि “सीपीएसई को इस्पात उद्योग और समुदाय के विकास में नेतृत्व की भूमिका निभाने, अधिक समावेशी व्यापार मॉडल अपनाने, अपने सीएसआर खर्च में वृद्धि करने, स्वदेशी डिजाइन और इंजीनियरिंग के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश करने और आयात के प्रतिस्थापन के लिए उत्पाद विकास के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा”।

इसके अलावा, सीपीएसई को उचित तकनीकी परामर्श और अधिक अनुकूलतम और विकेंद्रीकृत उत्पाद वितरण के लिए सेवा केंद्रों की स्थापना के साथ सड़कों, रेलवे, पुलों, क्रैश बैरियर आदि के लिए इस्पात-गहन संरचनात्मक डिजाइन विकसित करके इस्पात के उपयोग को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

आरआईएनएल का निजीकरण करने के निर्णय से केंद्र सरकार उस उद्देश्य का परिहास कर रही है। आरआईएनएल को नवरत्न कंपनी के रूप में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के बजाय, इसे वित्तीय रूप से कमजोर करने की दिशा में सरकार कई उपाय कर रही है।

उदाहरण के लिए, सरकार ने हाल के बजट में आयातित इस्पात पर शुल्क घटाया है जिससे आरआईएनएल की बाजार हिस्सेदारी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। राष्ट्रीय इस्पात नीति में उल्लिखित विचारों के विपरीत यह निर्णय लिया गया है, जो कि आयात पर निर्भरता को कम करना।

10.आपके ध्यान में यह लाना बहुत ही प्रासंगिक होता है कि आरआईएनएल की कठिनाई का वास्तविक कारण निजी खदानों का अभाव है। वर्ष 2002-03 के बाद कच्चे माल की अवशोषक मूल्य वृद्धि हुई। लौह अयस्क का मूल्य 808 रुपये प्रति टन था, जो वर्ष 2012-13 के दौरान बढ़कर 5426 रुपये प्रति टन हो गया।

11. वर्षों की अवधि के भीतर, लौह अयस्क की कीमतें छह गुना बढ़ गईं। सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पास निजी खदान हैं। इसलिए, कच्चे माल की उनकी लागत में कोई बदलाव या बहुत कम बदलाव नहीं हुआ है। से

ल के अपने निजी लौह अयस्क खदानें हैं, जिनका भंडार 200 वर्षों के लिए पर्याप्त है। लौह अयस्क खरीदने के लिए आरआईएनएल को हर साल अतिरिक्त राशि के रूप में लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन सभी कंपनियों के लिए बिक्री मूल्य एक समान है। आरआईएनएल को निजी लौह अयस्क खदानों का आवंटन करना आवश्यक है, जिससे इस लागत हानि से उबरने में मदद मिलेगी, ताकि सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की इकाइयों के लिए एक समान अवसर का सृजन हो सके।

  1. 12.हम दृढ़ता से विश्वास रखते हैं कि इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार, मुख्य रूप से परिसंपत्तियों के नकदीकरण के नाम पर आरआईएनएल की 20,000 एकड़ (लगभग) की सबसे मूल्यवान भूमि की बिक्री हेतु आरआईएनएल के 100% शेयरों की कार्यनीतिगत बिक्री का प्रस्ताव कर रखा है, जिसका वास्तविक मूल्य लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हैं। आरआईएनएल और एनबीसीसी ने आरआईएनएल से संबंधित 22.19 एकड़ भूमि में मार्केट यार्ड, वाणिज्यिक और आवासीय भवनों के विकास के लिए 04 मार्च 2021 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
  2. निम्नलिखित उपायों से संयंत्र को निजीकरण से बाहर आने में मदद मिल सकती है और केंद्र सरकार निजीकरण के फैसले को वापस लेने और निर्णय को वापस लेने की घोषणा करने में मदद मिल सकती है :

ए) अन्य सार्वजनिक और निजी इस्पात उत्पादकों के समान प्रमुख कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वीएसपी को निजी लौह अयस्क और कोयला खानों का आवंटन किया जाय, जिससे उत्पादन लागत में कमी होने के साथ प्रतिस्पर्धियों के साथ समान अवसर पैदा हो सकें।

बी) भारी ब्याज बोझ से बचाने के लिए ऋणों को इक्विटी के रूप में परिवर्तित करते हुए पूंजी का पुनर्गठन करना चाहिए, जिससे निजी उत्पादकों के बराबर मुनाफा कमाने की अनुमति मिलेगा और 3 से 4 वर्षों की अवधि में तुलन पत्र सृदृढ होगा।

सी) संयंत्र की क्षमता 20 मिलियन टन प्रति वर्ष तक अनुकूलतम होनी चाहिए ताकि आंध्र प्रदेश का समग्र विकास जारी रहे और सामान्य रूप से आंध्र प्रदेश के लोगों और इस्पात संयंत्र विस्थापित व्यक्तियों (लगभग 8,000) के लिए रोजगार दक्षता को प्रोत्साहित किया जा सके।

इसलिए, अनुरोध है कि आरआईएनएल की 100% कार्यनीति गत बिक्री के निर्णय को रोकने और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र में जारी रखने के लिए हस्तक्षेप करें। इसके अलावा, आरआईएनएल-वीएसपी बिरादरी की ओर से, हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप भारत के सबसे बड़े और एकमात्र तट आधारित एकीकृत इस्पात संयंत्र- “विशाखापत्तनम स्टील प्लांट” का दौरा करे।

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