सफर में बीएसपी कर्मी की बिगड़ी तबीयत, इलाज खर्च आया पौने चार लाख, प्रबंधन थमा रहा 42 हजार

भिलाई इस्पात संयंत्र के हैवी मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में कार्यरत कर्मी राजीव वैद्य शादी समारोह में इंदौर गए थे। बीमारी के कारण वहां ऑपरेशन हुआ था।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल की मेडिकल पॉलिसी कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है। भिलाई स्टील प्लांट का एक कर्मचारी पॉलिसी की चपेट में आ गया और उसे सवा तीन लाख रुपए की चपत लगी। सफर के दौरान बीएसपी कर्मचारी की तबीयत हद से ज्यादा खराब हो गई। इंदौर में ऑपरेशन तक करने की नौबत आई। इलाज के दौरान कर्मचारी भिलाई लौटा और उसने तीन लाख 75 हजार रुपए का बिल लगाया ताकि प्रतिपूर्ति (reimbursement) मिल सके। प्रबंधन ने पॉलिसी की दुहाई दी और 42 हजार से ज्यादा देने पर हाथ खड़े कर दिए।

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भिलाई इस्पात संयंत्र के हैवी मेंटेनेंस डिपार्टमेंट में कार्यरत कर्मी राजीव वैद्य पारिवारिक शादी के सिलसिले में इंदौर पहुंचे थे। सीने में तेज दर्द होने पर परिवार के सदस्य एक निजी हॉस्पिटल में इलाज कराने ले गए, जहा डॉक्टर ने उन्हें तुरंत ऑपरेशन की सलाह दी। जिंदगी बचाने के लिए उनका तत्काल ऑपरेशन कराया गया। इलाज खर्च 3 लाख 75 हजार आया। पर जब, उन्होंने अपने बिल के प्रतिपूर्ति ( reimbursemet) के लिए दावा किया तो उन्हें 42 हजार की प्रतिपूर्ति राशि ही भुगतान हो पाने की जानकारी दी गई।

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इनती कम राशि भुगतान क्यों हो रही है, इसकी जानकारी भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन से ली। नियम का हवाला देकर किसी प्रकार के सहयोग कर पाने में असमर्थता जताई गई। इसकी शिकायत कर्मी द्वारा बीएसपी वर्कर्स यूनियन से की गई। यूनियन अध्यक्ष उज्जवल दत्ता के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल हॉस्पिटल प्रबंधन के पास पहुंचा तो उन्हें जानकारी मिली कि, इस प्रकार की घटना कई कर्मियों के साथ घटी है। और संयंत्र कर्मियों को ऐसे नियमों के चलते भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इलाज का पूरा खर्च नहीं देता प्रबंधन, एम्स के रेट पर होगा भुगतान

भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा यूनियन को जानकारी दी गई कि संयंत्र से बाहर कोई भी कर्मी या उनके परिवार का सदस्य जाता है और किसी कारणवश चिकित्सा आवश्यकता पड़ती है तो उसका पूरा खर्च प्रबंधन नहीं उठाता है। इसी तरह किसी दुर्घटना होने पर इलाज खर्च की राशि भी भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा नहीं दिया जाएगा। उसे मात्र एम्स दिल्ली के रेट के अनुसार ही राशि प्रदान की जाएगी, जो कि बहुत कम होती है।

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कोई न कोई शहर से होता है बाहर

भिलाई इस्पात संयंत्र में लगभग 16500 कर्मी कार्यरत है। 3000 हजार अधिकारी भी कार्यरत हैं। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं अधिकारियों के होने के कारण कोई न कर्मी या अधिकारी किसी न किसी काम से भिलाई के बाहर जाते हैं। उनके बच्चे ही बाहर पढ़ने गए है। परंतु यदि उन्हें अचानक इलाज की आवश्कता पड़ती है तो इलाज के बाद जब कर्मी वापस भिलाई में अपने मेडिकल बिल के प्रतिपूर्ति (reimbursement) के लिए आते हैं तो उन्हे उनके इलाज के लिए खर्च की राशि नहीं मिलती। उन्हे बहुत कम राशि एम्स दिल्ली के रेट के अनुसार प्रदान की जाती है।

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काले कानून को बदलवाने पर जोर

बीएसपी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष उज्जवल दत्ता ने कहा कि यदि किसी नियम से कर्मियों को भारी नुकसान हो रहा है, तो उसे तत्काल बदला जाना चाहिए,क्योंकि एम्स दिल्ली एक सरकारी संस्था है और इतने कम में कोई भी निजी हॉस्पिटल इलाज नहीं करता। अतः निजी हॉस्पिटल में इलाज करवाने वाले कर्मी को दिल्ली एम्स के अनुसार राशि भुगतान करना एक छलावा हैद्व जिसे कभी भी माना नहीं जा सकता। इस नियम में सुधार के लिए यूनियन ने डायरेक्टर कार्मिक के साथ ही सेल चेयरमैन एवं इस्पात मंत्री को पत्र लिखा है। ऐसे काले कानून को किसी भी कीमत में बदला जाएगा।

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