घाटा कम करने सोने पर सीमा शुल्क 10.75% से बढ़ाकर 15% और कच्चे तेल पर प्रति टन 23,250 का उपकर

विमानन टर्बाइन ईंधन के निर्यात पर छह रुपये प्रति लीटर के हिसाब से विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू। घरेलू ईंधन कीमतों पर उपरोक्त कदमों का कोई असर नहीं होगा।

सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। सोने पर सीमा शुल्क को 10.75% से बढ़ाकर 15% किया गया है। सरकार ने यह कदम चालू खाता घाटा कम करने के लिए उठाया है। इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है। सोने के आयात में अचानक वृद्धि देखी गई। मई के महीने में कुल 107 टन सोना आयात किया गया और जून में भी आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सोने के आयात में होने वाली बढ़ोतरी से चालू खाता घाटे पर दबाव पड़ने लगा। सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिये, सोने पर सीमा शुल्क को 10.75 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया गया।
कच्चे पेट्रोलियम, हाई-स्पीड डीजल, पेट्रोल और विमानन टर्बाइन ईंधन पर शुल्क/उपकर

कच्चा पेट्रोलियम:
कच्चे तेल पर 23,250 रुपये प्रति टन का उपकर (विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के माध्यम से) लागू किया गया है। हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में बहुत तेजी देखी गई है। कच्चे तेल के घरेलू उत्पादक अंतर्राष्ट्रीय कीमतों की बराबरी करते हुए कच्चा तेल स्वदेशी रिफाइनरियों को बेचते हैं। परिणामस्वरूप, कच्चे तेल के घरेलू उत्पादक मोटी कमाई कर रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुये कच्चे तेल पर 23250 रुपये प्रति टन के हिसाब से उपकर लगा दिया गया है। कच्चे तेल के आयात को इससे अलग रखा गया है। घरेलू उत्पादक अंतर्राष्ट्रीय कीमतों की बराबरी करते हुये कच्चा तेल बेचते हैं। सरकार का दावा है कि पेट्रोलियम उत्पादों/ईंधन की कीमतों पर इस उपकर का कोई भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसके अलावा छोटे उत्पादकों, जिनका कच्चे तेल का वार्षिक उत्पादन पिछले वित्त वर्ष के मद्देनजर दो मिलियन बैरल से कम होगा, उन्हें इस उपकर से छूट मिलेगी। कच्चे तेल का कोई उत्पादक, जिसने पिछले वर्ष कच्चे तेल का कुछ अतिरिक्त उत्पादन किया है, तो कच्चे तेल की उस मात्रा पर कोई उपकर नहीं लगाया जाएगा। यह कदम पिछले वर्ष के दौरान अतिरिक्त उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए उठाया गया है। जैसा कि ऊपर कहा जा चुका है, इस कदम से पेट्रोलियम उत्पादों और ईंधनों की कीमतों या कच्चे तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं होगा।

हाई-स्पीड डीजल और पेट्रोल:
पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क/उपकर, पेट्रोल पर छह रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से लागू। हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में बहुत तेजी देखी गई है, जिसके कारण हाई-स्पीड डीजल और पेट्रोल की कीमत में भी तेजी आई। तेल शोधक इन उत्पादों को मौजूदा कीमतों पर विश्वस्तर पर निर्यात करते हैं। ये कीमत बहुत ऊंची होती है। चूंकि निर्यात बहुत लाभप्रद हो रहा है, इसलिये देखा जा रहा है कि कुछ तेल शोधकों के कारण घरेलू बाजार में तेल की कमी हो रही है। उपरोक्त को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल और डीजल के उनके निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क/उपकर, पेट्रोल पर छह रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से लागू कर दिया गया है।
ये उपकर देश से डीजल और पेट्रोल के प्रत्येक निर्यात पर लागू होंगे…
उपरोक्त पहल निर्यातों के मद्देनजर की गई है, इसलिए उसका कोई भी प्रभाव हाई-स्पीड डीजल और पेट्रोल की घरेलू खुदरा कीमतों पर नहीं होगा। इसके साथ ही डीजीएफटी ने निर्यात-नीति की शर्तें भी लगा दी हैं। इसके अनुसार निर्यातकों को निर्यात के समय यह घोषणा करनी पड़ेगी कि शिपिंग बिल में उल्लिखित मात्रा का 50 प्रतिशत उसे वर्तमान वित्तवर्ष के दौरान घरेलू बाजार में देना होगा। डीजल और पेट्रोल की घरेलू खुदरा कीमतों पर उपरोक्त कदमों का कोई असर नहीं होगा। इस तरह, घरेलू खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं आयेगा। साथ ही, इन कदमों से पेट्रोलियम उत्पादों की घरेलू उपलब्धता भी सुनिश्चित हो जायेगी।
विमानन टर्बाइन ईंधन:
विमानन टर्बाइन ईंधन के निर्यात पर छह रुपये प्रति लीटर के हिसाब से विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू किया गया है। हाई-स्पीड डीजल और पेट्रोल की तरह ही विमान टर्बाइन ईंधन की अंतर्राष्ट्रीय कीमतों में भी तेजी आई है। इसीलिए, उपरोक्त डीजल और पेट्रोल की तरह, विमानन टर्बाइन ईंधन के निर्यात पर प्रति लीटर छह रुपये का उपकर लगाया गया है। इन कदमों का विमानन टर्बाइन ईंधन की घरेलू कीमतों पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा।

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