World Nursing Day 2022: भिलाई स्टील प्लांट लेता है नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बेटियों को गोद, बेटियां बाधाओं को तोड़ नर्सिंग सेवा में फैला रहीं पंख

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। नक्सल प्रभावित क्षेत्र आयरन ओर माइंस रावघाट के आसपास के क्षेत्रों की बेटियों का भविष्य बीएसपी संवार रहा है। जहां लड़कियों को स्कूल से आगे पढ़ने के लिए ज्यादा प्रोत्साहित नहीं किया जाता है, वहां बीएसपी उन्हें नर्सिंग की पढ़ाई करा रहा है। नर्सिंग शिक्षा प्रदान करने के लिए गोद लिया जाता है।

इस वर्ष बीएसपी द्वारा एक टेस्ट के बाद निःशुल्क नर्सिंग शिक्षा देने हेतु 12वीं उत्तीर्ण 20 छात्राओें का चयन किया गया है। इन्हें अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग अंजोरा, दुर्ग और पीजी कॉलेज ऑफ नर्सिंग भिलाई में शिक्षा दी जा रही है।

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ये छात्र उन समुदायों से ताल्लुक रखते हैं, जहां आम तौर पर कृषि से आजीविका अर्जित की जाती है। और लड़कियों को उच्च शिक्षा के लिए घरों से बाहर नहीं भेजी जाती है। बीएसपी की माइंस सीएसआर पहल द्वारा प्रायोजित ये लड़कियां अपने समर्पण और नर्सिंग पेशे के माध्यम से समुदाय की सेवा करने का लक्ष्य लेकर अपने पंख फैला रही हैं और बाधाओं को तोड़ रही हैं।

डरी और शर्मीली होती हैं बेटियां, फिर अंतर करना होता है मुश्किल

अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग अंजोरा दुर्ग के निदेशकों में शामिल मनीष जैन ने बताया कि रावघाट क्षेत्र की बालिकाओं को 2016 से इस कॉलेज में प्रवेश देकर बीएसपी द्वारा शिक्षा प्रदान किया जा रहा है। चूंकि ये छात्र वनांचल क्षेत्रों से संबंधित हैं। इसलिए वे शुरू में डरी हुई तथा शर्मीली होती हैं। वे धीरे-धीरे अन्य छात्रों के साथ घुल-मिल जाते हैं और एक वर्ष के भीतर बीएसपी की सीएसआर द्वारा गोद लिए गए इन छात्राओं और कॉलेज में सामान्य छात्रों के बीच अंतर नहीं रह जाता।
अपोलो कॉलेज ऑफ नर्सिंग के प्राचार्य पी इमैनुएल ने कहा कि इन नर्सिंग छात्रों को सेल-बीएसपी के मुख्य चिकित्सालय जेएलएन अस्पताल और अनुसंधान केन्द्र में क्लीनिकल ट्रेनिंग दिया जाता है।

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नर्सिंग में अपना कॅरियर बना रहीं बेटियां, जानिए क्या है इनकी सोच

-तालेबेड़ा रावघाट की शारदा ध्रुव जीएनएम की डिग्री हासिल की हैं। 12वीं कक्षा पास करने के बाद नर्सिंग करने की संभावनाओं के बारे में उन्हें पता नहीं था। उन्हें जेएलएन अस्पताल और अनुसंधान केंद्र में क्लिनिकल पोस्टिंग का अनुभव भी मिलता है। बीएसपी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे अब नर्सिंग में अपना करियर बना सकती हैं।

-नारायणपुर के अंजरेल जिले की सीमा उसेंडी अनाथ हैं। उन्हें उनके रिश्तेदारों द्वारा पाला गया। वह भाग्यशाली महसूस करती हैं कि उन्हें बीएसपी द्वारा गोद लिए जाने के बाद बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई करने का मौका मिला। सीमा उसेंडी की उपलब्धि पर उनके रिश्तेदारों को गर्व है और वह अपने ग्रामीणों की सेवा करना चाहती है और अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें साक्षर बनने में मदद करना चाहती है।

-रितु वड्डे रामकृष्ण मिशन आश्रम, नारायणपुर से अपनी शिक्षा पूरी की हैं। वह बताती हैं कि बचपन में उनके साथ कांच की गुड़िया की तरह व्यवहार किया जाता था। जब वह भिलाई में जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से मिलीं और उन्हें समझा तो उनका एक्सपोजर कई गुना बढ़ गया। मैं नर्सिंग में अध्ययन कर अपने गांव की प्रगति में मदद करने का लक्ष्य रखा है।

-मंतासालेबार की भावना डारो कहती हैं कि उनके पिता खुश थे कि उन्हें सेल-बीएसपी के सीएसआर विभाग द्वारा उच्च शिक्षा के लिए गोद लिया गया है। शुरू में, मैं अंग्रेजी माध्यम के कॉलेज में पढ़ने को लेकर आशंकित और डरी हुई थी। लेकिन यहां के शिक्षकों के सहयोग और स्पोकन इंग्लिश की कक्षाओं के कारण मेरी अंग्रेजी में सुधार आया। मैं वापस जाकर उन ग्रामीणों का इलाज करना चाहती हूं, जो कहीं और इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। वर्तमान में वह दुर्ग के यशोदा नंदन अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत हैं।

-नारायणपुर के बिंजली गांव की जीएनएम तृतीय वर्ष की छात्रा रीना दुग्गा को तब अच्छा लगा, जब वह नर्सिंग की पढ़ाई के लिए अपोलो कॉलेज गईं। उन्हें बीएसपी के जेएलएन अस्पताल और अनुसंधान केन्द्र में क्लिनिकल पोस्टिंग के दौरान कई नई चीजें सीखने को मिली। नर्स बनने के बाद मैं गांव-गांव जाकर अपने लोगों की सेवा करना चाहती हूं।

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