- अभियान के सफल क्रियान्वयन में मोहम्मद कैसर-एजीएम तथा जय प्रकाश गुप्ता-एजीएम की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही।
सूचनाजी न्यूज, बर्नपुर। सेल इस्को स्टील प्लांट के वायर रॉड कॉइल यार्ड में एक महत्वपूर्ण परिचालन उपलब्धि हासिल की गई है। लंबे समय से यार्ड में पड़े बिखरे एवं बिना स्ट्रैप वाले वायर रॉड कॉइलों को एक विशेष अभियान के तहत व्यवस्थित रूप से पुनः स्ट्रैप कर उन्हें सफलतापूर्वक डिस्पैचेबल प्राइम कॉइल में परिवर्तित किया गया।
इस पहल के अंतर्गत लगभग 3,700 बिखरे कॉइल, जिनका कुल वजन करीब 7,500 टन था, को सुनियोजित प्रक्रिया के माध्यम से प्राइम कॉइल में परिवर्तित किया गया। इन कॉइलों के सफल डिस्पैच से लगभग ₹37 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ, जिससे लंबे समय से अनुपयोगी पड़ी सामग्री का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सका। डीआइसी सुरजीत मिश्र ने भी टीम की तारीफ की।
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि सीजीएम कमलेश कुमार सिंह के दूरदर्शी मार्गदर्शन और सतत प्रेरणा से संभव हो सकी। उनके निरंतर निरीक्षण और प्रोत्साहन ने प्रारंभ में अत्यंत चुनौतीपूर्ण प्रतीत होने वाले इस कार्य को एक सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुख अभियान में बदल दिया।
सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस अभियान का संचालन रजत कुमार मुखर्जी, जीएम तथा रवीन्द्र नीरज, डीजीएम के नेतृत्व में किया गया। उनके कुशल मार्गदर्शन में पूरी टीम ने समन्वित और अनुशासित तरीके से कार्य करते हुए केवल तीन महीनों के रिकॉर्ड समय में बिना किसी सुरक्षा चूक के इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस अभियान के सफल क्रियान्वयन में मोहम्मद कैसर-एजीएम तथा जय प्रकाश गुप्ता-एजीएम की भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही। इनके द्वारा बिखरे कॉइलों की पहचान, पुनः स्ट्रैपिंग के बाद उनकी पृथक्करण प्रक्रिया, नमूना कटिंग, परीक्षण तथा व्यवस्थित स्टैकिंग और डिस्पैच की पूरी प्रक्रिया का प्रभावी समन्वय किया गया।
इसके अतिरिक्त, आरसीएल टीम ने भी बिना टैग वाले कॉइलों के नमूना कटिंग और परीक्षण के माध्यम से उनकी प्राइम गुणवत्ता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। इस संदर्भ में विश्वजीत पांजा, एजीएम (आर सी एल) का योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा।
इस चुनौतीपूर्ण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में संविदा कर्मियों के अथक परिश्रम और समर्पण का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनके प्रयासों से इस कठिन कार्य को रिकॉर्ड समय में पूर्ण किया जा सका।
इस पहल से न केवल उल्लेखनीय राजस्व अर्जित हुआ, बल्कि कॉइल यार्ड में लगभग 60 मीटर×30 मीटर क्षेत्र भी मुक्त हुआ, जो लंबे समय से बिखरे कॉइलों के कारण उपयोग में नहीं आ पा रहा था। इससे यार्ड में हाउसकीपिंग, सामग्री प्रबंधन और सुरक्षा मानकों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ तथा कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ा।
यह उपलब्धि इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि सुदृढ़ नेतृत्व, प्रभावी टीमवर्क और सूक्ष्म योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित परिचालन चुनौतियों को भी संगठनात्मक लाभ में बदला जा सकता है।
















