सेल आरएसपी आइजीएच के बर्न यूनिट की आधारशिला 21 मार्च 1976 को तत्कालीन इस्पात एवं खान मंत्री चंद्रजीत यादव ने रखी थी।
- निदेशक प्रभारी ने विभाग के नियमित और ठेका कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। साथ ही, एक ‘पेशेंट एजुकेशन मैनुअल’ का विमोचन भी किया गया।
सूचनाजी न्यूज, राउरकेला। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के राउरकेला स्टील प्लांट के इस्पात जनरल हॉस्पिटल (IGH) के बर्न सेंटर ने स्वर्ण जयंती मनाते हुए 50 वर्षों की उल्लेखनीय सेवा पूरी की। इस अवसर पर प्लांट के निदेशक प्रभारी आलोक वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि सीएमओ प्रभारी (M&HS) डॉ. जे.के. आचार्य विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम में डॉ. प्रतिभा सदांगी समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक और बड़ी संख्या में अस्पताल कर्मी मौजूद रहे।
मुख्य अतिथि आलोक वर्मा ने कहा कि बर्न यूनिट गंभीर मामलों को जिस दक्षता से संभाल रही है, वह सराहनीय है। उन्होंने जोर दिया कि सेवाओं में निरंतर सुधार जरूरी है। उन्होंने कहा कि कई बड़े अस्पताल उच्च मृत्यु दर के कारण बर्न यूनिट नहीं चलाते, लेकिन एक थर्मो-सेंसिटिव प्लांट होने के नाते हमें इस यूनिट को न केवल बनाए रखना है, बल्कि इसे देश के श्रेष्ठ बर्न सेंटरों में शामिल करना है।
डॉ. जे.के. आचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि पांच दशकों की सेवा करुणा और समर्पण की विरासत को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि IGH में आवश्यकता के रूप में शुरू हुआ यह यूनिट आज ओडिशा के लोगों के लिए उम्मीद का केंद्र बन चुका है।
कार्यक्रम के दौरान बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. रूबी सिंह ने 1976 से अब तक के सफर पर प्रस्तुति दी, जिसमें सफल सर्जरी और जटिल मामलों का उल्लेख किया गया। निदेशक प्रभारी ने विभाग के नियमित और ठेका कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया। साथ ही, एक ‘पेशेंट एजुकेशन मैनुअल’ का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई और जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार बर्न यूनिट के इतिहास पर आधारित वीडियो भी प्रदर्शित किया गया। अस्पताल प्रशासन के प्रबंधक डॉ. पी. श्रवण एस. कुमार ने स्वागत भाषण दिया, जबकि डॉ. सीमा लकड़ा ने संचालन किया। अंत में डॉ. जी.एस. साहू ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
गौरतलब है कि इस बर्न यूनिट की आधारशिला 21 मार्च 1976 को तत्कालीन इस्पात एवं खान मंत्री चंद्रजीत यादव ने रखी थी। पांच दशकों में यह सेंटर क्षेत्र के मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ है और आज भी उत्कृष्ट एवं संवेदनशील चिकित्सा सेवा प्रदान कर रहा है।

