खाड़ी देशों और दक्षिण अफ्रीका में कच्चे माल की सुरक्षा, गुणवत्ता और बेहतर कीमत सुनिश्चित करने के लिए निवेश और साझेदारी बढ़ाई जाएगी।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। Steel Authority of India Limited के नए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक Dr. Ashok Kumar Panda ने पदभार संभालते ही कंपनी के अधिकारियों और कर्मचारियों को ऑनलाइन संदेश देकर अपनी कार्ययोजना और भविष्य की रणनीति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक इस्पात बाजार, ग्रीन स्टील, डिजिटलीकरण और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में सेल को अपनी रफ्तार बढ़ानी होगी, ताकि बाजार में मजबूती बनाए रखी जा सके।
डॉ. पंडा ने कहा कि सात दशक से अधिक पुरानी विरासत रखने वाली सेल देश के इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण की मजबूत आधारशिला रही है, लेकिन अब वैश्विक इस्पात उद्योग तेजी से बदल रहा है। दुनिया में हाई-एंड और वैल्यू एडेड स्टील की मांग बढ़ रही है। वहीं यूरोपीय देशों में कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे नियम लागू होने से ग्रीन स्टील और डीकार्बोनाइजेशन बेहद अहम हो गया है।
दुनिया में गिरावट, भारत में 7.9% ग्रोथ
उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर स्टील खपत में गिरावट दर्ज की गई है। दुनिया में स्टील खपत 1770-1773 मिलियन टन से घटकर 1749 मिलियन टन रह गई, जबकि भारत में स्टील खपत में करीब 7.9 प्रतिशत वृद्धि हुई। भारत में स्टील खपत 152 मिलियन टन से बढ़कर 164 मिलियन टन पहुंच गई है। उन्होंने भारत को वैश्विक स्टील उद्योग का “ब्राइट स्पॉट” बताया।
20 मिलियन टन से 35 मिलियन टन तक जाएगी क्षमता
नए CMD ने कहा कि राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत वर्ष 2030-31 तक देश की स्टील क्षमता 300 मिलियन टन प्रतिवर्ष तक पहुंचाने का लक्ष्य है। ऐसे में सेल को अपनी मौजूदा लगभग 20 मिलियन टन क्षमता को बढ़ाकर 35 मिलियन टन करना होगा, ताकि कंपनी बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख सके।
इन चुनौतियों से जूझ रही है SAIL
क्षमता विस्तार
स्टील बाजार में उतार-चढ़ाव
कच्चे माल की बढ़ती कीमतें
भू-राजनीतिक अस्थिरता
डीकार्बोनाइजेशन
वैल्यू एडेड स्टील उत्पादन की जरूरत
“पहले उत्पादन फिर बिक्री” की सोच बदलनी होगी
उन्होंने कहा कि अब सेल को “प्रोड्यूस एंड सेल” मॉडल से निकलकर “कस्टमर फोकस्ड” मॉडल अपनाना होगा। पहले ग्राहक की जरूरत के अनुसार ऑर्डर बुक हों और उसके बाद उत्पादन हो। इससे इन्वेंट्री घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा।
उन्होंने खुलासा किया कि पिछले वर्ष फिनिश्ड और सेमी-फिनिश्ड स्टील इन्वेंट्री में 5-5 लाख टन की कमी लाने से कंपनी को लगभग 600 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ हुआ। वर्तमान में इन्वेंट्री 1.4 मिलियन टन है, जिसे घटाकर 0.3 मिलियन टन यानी 15 दिन तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे 600 से 700 करोड़ रुपये अतिरिक्त लाभ की संभावना है।
सुरक्षा और मशीनों की सेहत पर जोर
CMD ने कहा कि “जीरो एक्सीडेंट स्टील प्रोडक्शन” कंपनी की प्राथमिकता होगी। उन्होंने मशीनों की समय पर मेंटेनेंस और बेहतर हाउसकीपिंग पर जोर देते हुए कहा कि उपकरणों की सेहत उत्पादन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। इससे उत्पादन, लागत नियंत्रण और लाभप्रदता में सुधार होगा।
AI, वीडियो एनालिटिक्स और SAP Hana पर फोकस
डॉ. पंडा ने कहा कि डिजिटलीकरण के जरिए सेल को नई ऊंचाई पर ले जाया जाएगा। AI, वीडियो एनालिटिक्स और प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ेगा। कंपनी में लागू होने वाला SAP Hana सिस्टम 7-8 अलग-अलग SAP सिस्टम को एक प्लेटफॉर्म पर लाएगा, जिससे पारदर्शिता और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी।
खदानें बनेंगी गेम चेंजर
उन्होंने रावघाट आदि खदानों को सेल के लिए “गेम चेंजर” बताया। कहा कि यदि इन खदानों को समय पर स्थिर किया गया तो कंपनी की लाभप्रदता में 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक का इजाफा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भिलाई स्टील प्लांट का विस्तार काफी हद तक रावघाट खदान पर निर्भर है।
विदेशों में बढ़ेगी SAIL की मौजूदगी
नए CMD ने कहा कि कंपनी को बहुराष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार जरूरी है। खाड़ी देशों और दक्षिण अफ्रीका में कच्चे माल की सुरक्षा, गुणवत्ता और बेहतर कीमत सुनिश्चित करने के लिए निवेश और साझेदारी बढ़ाई जाएगी।
कर्मचारियों से की पारदर्शिता और टीमवर्क की अपील
डॉ. पंडा ने कहा कि सेल को “साइलो कल्चर” से बाहर निकलना होगा। तेज निर्णय, जवाबदेही, पारदर्शिता और सहयोगात्मक कार्यसंस्कृति के जरिए ही कंपनी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन सकेगी। उन्होंने HR विभाग की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए भविष्य के लिए तैयार कार्यबल विकसित करने पर जोर दिया।

