दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश है मांगी गई जानकारी 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए। सेल यूनियन राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। National Joint Committee for Steel Industry (एनजेसीएस) को लेकर बड़ा कानूनी फैसला आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि एनजेसीएस सूचना के अधिकार कानून (RTI) के दायरे में आता है। कोर्ट ने इसे “पब्लिक अथॉरिटी” माना है। अब एनजेसीएस से जुड़ी कई जानकारियां कर्मचारियों और आवेदकों को देनी होंगी।
यह मामला आरटीआई के जरिए एनजेसीएस से जानकारी मांगने को लेकर शुरू हुआ था। पहले सेल और एनजेसीएस की ओर से जानकारी देने से इनकार कर दिया गया था। तर्क दिया गया कि एनजेसीएस एक स्वतंत्र द्विपक्षीय मंच है और RTI Act के तहत पब्लिक अथॉरिटी नहीं है।
बाद में मामला केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) पहुंचा। सीआईसी ने माना कि एनजेसीएस का 80 से 85 प्रतिशत खर्च सेल के स्टील प्लांट्स से आता है। इसलिए यह सार्वजनिक धन से संचालित संस्था है और RTI के दायरे में आती है।
इस फैसले को एनजेसीएस और सेल ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने भी सीआईसी के फैसले को सही ठहराया है। कोर्ट ने कहा कि एनजेसीएस का गठन श्रमिकों के वेतन समझौते, सेवा शर्तों और औद्योगिक मामलों के लिए हुआ है। इसके फैसले देशभर के हजारों स्टील कर्मचारियों को प्रभावित करते हैं। इसलिए पारदर्शिता जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी माना कि एनजेसीएस में सेल और आरआईएनएल के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहते हैं। इसके कामकाज में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की सीधी भागीदारी है। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि संवेदनशील ट्रेड यूनियन बातचीत और गोपनीय नेगोशिएशन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी। लेकिन प्रशासनिक और सामान्य जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि मांगी गई जानकारी 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए। इस फैसले को स्टील कर्मचारियों और यूनियन राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।

