यूनियन के बैनर तले मजदूरों और ठेका श्रमिकों की लंबित मांगों को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हुए।
सूचनाजी न्यूज, बोकारो। बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) के सीआरएम-3 मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष बुधवार को जनता मजदूर संघ (संबद्ध हिन्द मजदूर सभा) ने जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूरों और ठेका श्रमिकों की लंबित मांगों को लेकर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में श्रमिक शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद प्रबंधन को मांग पत्र भी सौंपा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुकेश रंजन सिंह ने की, जबकि संचालन गौतम सिंह चौधरी ने किया। प्रदर्शन के दौरान मजदूरों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और प्रबंधन से शीघ्र समाधान की मांग की।
सभा को संबोधित करते हुए जनता मजदूर संघ के महामंत्री प्रमोद कुमार देव ने कहा कि सीआरएम-3 की उत्पादन उपलब्धियों में मजदूरों और ठेका श्रमिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद उनकी कई वर्षों से लंबित मांगों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा।
संयुक्त महामंत्री अरुण कुमार ने कहा कि मजदूरों और ठेका श्रमिकों की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रबंधन से श्रमिकों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने और लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
मांग पत्र में क्या-क्या मांगें शामिल
प्रदर्शन के बाद संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सीआरएम-3 के मुख्य महाप्रबंधक को मांग पत्र सौंपा। इसमें कई महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं। प्रमुख मांगों में 39 माह के एरियर का भुगतान, लंबित वेज रिवीजन का शीघ्र निष्पादन, इंसेंटिव एवं रिवार्ड स्कीम का पुनरीक्षण, ठेका कर्मियों को ग्रेड प्रमोशन, रात्रि भत्ता और वाहन भत्ता शामिल हैं। इसके अलावा न्यूनतम वेतन की गारंटी, कट मनी पर रोक, बेहतर कैंटीन सुविधा, ठेका कर्मियों की छंटनी पर रोक तथा मोबाइल और रिचार्ज भत्ता देने की मांग भी उठाई गई।
15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन
जनता मजदूर संघ ने प्रबंधन को मांगों पर कार्रवाई के लिए 15 दिनों का समय दिया है। महामंत्री प्रमोद कुमार देव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई तो संगठन मजदूरों और ठेका श्रमिकों के हित में चरणबद्ध एवं लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगा।
संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों के कारण श्रमिकों में असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में प्रबंधन को जल्द निर्णय लेकर समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

