सीटू यूनियन ने कहा-सेक्टर-9 अस्पताल को निजीकरण की ओर धकेलने की हर साजिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा। सभी यूनियन एकजुट हैं।
- अटेंडेंट कमी का सीधा असर इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर। यह स्थिति अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेक्टर-9 अस्पताल में अटेंडेंट ठेका श्रमिकों का ठेका समाप्त होने और समय पर नया ठेका अथवा एक्सटेंशन नहीं दिए जाने के कारण पूरे अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। प्रबंधन को पहले से पता था कि ठेका अवधि समाप्त होने वाली है, फिर भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। सीटू का कहना है कि खामियाजा मरीजों और अस्पताल कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।
25 प्रतिशत अटेंडेंट के भरोसे पूरा अस्पताल चल रहा
सीटू नेताओं ने कहा-वर्तमान में केवल लगभग 25 प्रतिशत अटेंडेंट को बुलाया जा रहा है। एक-एक अटेंडेंट को तीन से चार वार्डों का कार्य सौंप दिया गया है। लेबोरेटरी, फार्मेसी, एक्स-रे सहित अनेक महत्वपूर्ण विभागों से अटेंडेंट लगभग हटा दिए गए हैं। यहां तक कि निदेशक कार्यालय में भी अटेंडेंटों की संख्या आधी कर दी गई है। इतनी कम संख्या में कर्मचारियों के सहारे अस्पताल चलाना मरीजों की सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ है।
क्या अस्पताल को जानबूझकर बदहाल किया जा रहा है
सीटू का प्रश्न है कि क्या यह सब सेक्टर-9 अस्पताल को बदनाम कर निजीकरण की ओर धकेलने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है? पहले कर्मचारियों की कमी पैदा करो, फिर सेवाओं को कमजोर करो और बाद में अस्पताल को अक्षम बताकर निजी हाथों में सौंपने का रास्ता तैयार करो। यदि ऐसा नहीं है तो प्रबंधन तत्काल स्पष्ट करे कि समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
मरीजों और कर्मचारियों के हितों की खुली अनदेखीअटेंडेंट अस्पताल व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। मरीजों को स्ट्रेचर, व्हीलचेयर, जांच, वार्ड स्थानांतरण और अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनकी कमी का सीधा असर इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। यह स्थिति अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।
सीटू की मांग: तत्काल बहाल करें पूरी व्यवस्था
हिन्दुस्तान स्टील एम्पलाइज यूनियन (सीटू) प्रबंधन से मांग करती है कि बिना किसी विलंब के ठेका कार्य को नियमित किया जाए, आवश्यकतानुसार ठेका अवधि बढ़ाई जाए अथवा नया ठेका तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। सभी अटेंडेंटों को पूर्ववत कार्य पर लगाया जाए तथा अस्पताल की सामान्य व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए। यदि प्रबंधन ने शीघ्र समाधान नहीं निकाला तो सीटू अस्पताल, कर्मचारियों और मरीजों के हितों की रक्षा के लिए व्यापक कदम उठाने के लिए बाध्य होगी।
प्रबंधन अस्पताल को बदहाल करना बंद करे और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। सेक्टर-9 अस्पताल को निजीकरण की ओर धकेलने की हर साजिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा। कमी का सीधा असर इलाज की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ रहा है। यह स्थिति अस्पताल की प्रतिष्ठा को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है।

