11 पदों पर असिस्टेंट-जूनियर सेफ्टी आफिसर का चयन होगा। डी क्लस्टर (एस-9 से एस-11) तथा सी क्लस्टर (एस-6 से एस-8) के कर्मचारियों के लिए है।
- सुरक्षा मानकों के अनुपालन, दुर्घटना रोकथाम, सुरक्षा निरीक्षण, औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच, सुरक्षा प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी होगी।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए असिस्टेंट सेफ्टी ऑफिसर/जूनियर सेफ्टी ऑफिसर के पदों पर आंतरिक चयन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में 2 जुलाई 2026 को आंतरिक सर्कुलर जारी किया गया है। इच्छुक एवं पात्र कर्मचारियों से 17 जुलाई 2026 तक आवेदन मांगे गए हैं।
11 पदों पर चयन किया जाएगा। यह अवसर ‘डी’ क्लस्टर (एस-9 से एस-11) तथा ‘सी’ क्लस्टर (एस-6 से एस-8) के उन कर्मचारियों के लिए है, जो निर्धारित शैक्षणिक योग्यता पूरी करते हैं और समान स्तर (Parallel Movement) के तहत आवेदन करना चाहते हैं।
यह होगी योग्यता
आवेदन करने वाले कर्मचारी के पास किसी भी शाखा में इंजीनियरिंग/टेक्नोलॉजी की मान्यता प्राप्त डिग्री या डिप्लोमा होना आवश्यक है। इसके साथ ही राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त इंडस्ट्रियल सेफ्टी में डिग्री या डिप्लोमा भी अनिवार्य रखा गया है।
चयनित कर्मचारियों को मिलेगा यह लाभ
प्रबंधन ने चयनित कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन की भी घोषणा की है। इंडस्ट्रियल सेफ्टी की पढ़ाई के लिए 50 हजार रुपये तक (या वास्तविक शुल्क, जो कम हो) की फीस प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की जाएगी। कोर्स करने में जो फीस मद में जो खर्च हुआ है,उसके लिए 50 हजार रुपए तक दिए जाएंगे।
इसके अलावा, सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग (SED) में पदस्थापना के बाद कर्मचारियों को 1,000 रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी। यह राशि अधिकतम पांच वर्ष, विभाग में कार्यरत रहने या सेवा से पृथक होने तक (जो पहले हो) देय होगी।
सुरक्षा व्यवस्था को मिलेगी मजबूती
सर्कुलर के साथ जारी जॉब प्रोफाइल में स्पष्ट किया गया है कि चयनित कार्मिक संयंत्र में सुरक्षा मानकों के अनुपालन, दुर्घटना रोकथाम, सुरक्षा निरीक्षण, औद्योगिक दुर्घटनाओं की जांच, कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण देने तथा सुरक्षित कार्य संस्कृति विकसित करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाएंगे। भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन का मानना है कि इस पहल से सुरक्षा तंत्र को और मजबूती मिलेगी तथा संयंत्र में सुरक्षित कार्य वातावरण विकसित करने में सहायता मिलेगी।

