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Padma Vibhushan Dr. Teejan Bai Death: पंडवानी की आवाज खामोश, भिलाई स्टील प्लांट ने खोया अपना कला गौरव, पूर्व सीईओ एम. रवि ने साझा की यादें

Azmat ali 05/07/2026 (Last updated: 06/07/2026) 1 minute read
Padma Vibhushan Dr Teejan Bai Death Government and Bhilai Steel Plant Pays Tribute Former CEO M Ravi Shares Memories

भिलाई स्टील प्लांट की पूर्व कर्मचारी तीजन बाई का निधन, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार। 1986 में बीएसपी परिवार का हिस्सा बनीं थीं।

  • पंचतत्व में विलीन हुईं तीजन बाई, भिलाई स्टील प्लांट ने नम आंखों से दी अंतिम विदाई।
  • पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, भिलाई स्टील प्लांट से था गहरा नाता।
  • भिलाई स्टील प्लांट की पूर्व कर्मी ने पंडवानी को दिलाई विश्वभर में पहचान।
  • पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन: बीएसपी की पूर्व कर्मचारी को राजकीय सम्मान, हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई।
  • गनियारी से दुनिया तक का सफर: नहीं रहीं पंडवानी गायिका तीजन बाई।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। छत्तीसगढ़ की आत्मा कही जाने वाली पंडवानी गायिका पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई हमारे बीच नहीं रहीं। रविवार को उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया। गनियारी के मुक्तिधाम में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार हुआ। पुलिस जवानों ने गॉड ऑफ ऑनर दिया। बेटे दिलहरण पारधी ने मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इससे पहले पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रद्धांजलि दी। एम्स रायपुर पहुंचे, जहां परिवार वालों से मुलाकात की। लंबे समय से बीमार थीं।

स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पहुंचे। तीजन बाई के नाम पर स्कूल के नामकरण की घोषणा की। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने श्रद्धांजलि दी। जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और लोक कलाकार भी मौजूद रहे। हर आंख नम थी। हर चेहरा गमगीन था।

तीजन बाई किसी परिचय की मोहताज नहीं थीं। उन्होंने छत्तीसगढ़ की पंडवानी को गांव की चौपाल से उठाकर दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुंचाया। उनकी ओजस्वी आवाज, अभिनय और तानपुरा पूरी महाभारत को जीवंत कर देते थे। वह केवल कलाकार नहीं थीं, छत्तीसगढ़ की पहचान थीं।

तीजन बाई का भिलाई स्टील प्लांट से भी गहरा रिश्ता था। वर्ष 1986 में वह भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार का हिस्सा बनीं। खेल एवं कला-संस्कृति विभाग में कर्मचारी रहीं। संयंत्र ने उनकी प्रतिभा को हमेशा सम्मान दिया। जब वर्ष 2003 में उन्हें पद्म भूषण मिला तो बीएसपी ने विशेष सम्मान के साथ पदोन्नति और अन्य प्रोत्साहन भी दिया।

भिलाई इस्पात संयंत्र परिवार ने भी अपनी इस पूर्व कर्मी को नम आंखों से विदाई दी। बीएसपी के लिए यह सिर्फ एक कलाकार का निधन नहीं, बल्कि अपने परिवार के एक गौरवशाली सदस्य को खोने जैसा क्षण है।

पूर्व सीईओ एम. रवि ने भी तीजन बाई के साथ बिताए अनमोल पल याद किए। उन्होंने कहा कि जब वह एसएमएस-1 के महाप्रबंधक थे, तब महिला दिवस पर लेडी वर्कर्स के लिए बनाए गए रेस्ट रूम का उद्घाटन तीजन बाई के हाथों कराया गया था। उसी कार्यक्रम में महिला कर्मचारियों को तीजन बाई के हाथों साड़ियां, टिफिन बॉक्स और कई उपहार भी वितरित कराए गए थे। वह दिन आज भी उनकी स्मृतियों में ताजा है। एसएमएस-1 मंदिर में हर साल भंडारा होता था।

इस अवसर पर अधिकारियों की ओर से पुरुष मजदूरों को कपड़े आदि भेंट किए जाते थे। कुछ महिला मजदूरों ने मार्मिक तरीके से कहा-हम लोग वंचित रहते हैं। इस के बाद सभी विभाग ने मिलकर साड़ी आदि गिफ्ट जुटाए। महिला दिवस पर तीजन बाई के हाथों साल 2013 में ये गिफ्ट भेंट कराए गए थे। बीएसपी से रिटायरमेंट पर विदाई समारोह में खुद बतौर सीईओ एम. रवि कार्यक्रम में शामिल हुए। तीजन बाई के योगदान के मुरीद हो गए थे। जबकि प्रबंधन की ओर से संयंत्र के मुखिया कर्मचारियों के विदाई समारोह में शामिल नहीं होते हैं। सिर्फ अधिकारियों के समारोह में डीआइसी विदाई देते हैं।

पूर्व सीईओ एम. रवि ने एक और याद साझा की। उन्होंने बताया कि जब वह बीएसपी के सीईओ थे, तब ‘ओ माई गॉड… ये मेरा इंडिया’ की टीम भिलाई स्टील प्लांट पर वीडियो बनाने आई थी। जनसंपर्क विभाग ने पूरा सहयोग किया था। उस दौरान तीजन बाई के साथ बिताए कई पल आज भी आंखों के सामने ताजा हैं।

बता दें कि सबसे भावुक याद ‘भिलाई एंथम’ की है। एंथम के लोकार्पण से एक दिन पहले तीजन बाई सीने में दर्द के कारण सेक्टर-9 अस्पताल के आईसीयू में भर्ती थीं। वह कार्यक्रम में नहीं आ सकीं। कार्यक्रम में फिल्मकार अनुराग बसु, अरुंधति भट्टाचार्य, अनुज शर्मा, अमित साना, पामेला जैन और तत्कालीन सीईओ एम. रवि सहित कई हस्तियां आने वाली थीं।

लॉन्च से पहले पूरी टीम अस्पताल पहुंची। उन्हें भिलाई एंथम की सीडी और एक प्रतीकात्मक सितार भेंट किया गया। टीम ने मुस्कुराते हुए कहा-“असल लॉन्च तो यहीं हो रहा है।” यह सुनते ही दर्द में भी तीजन बाई के चेहरे पर जो मुस्कान आई, वह आज भी लोगों की यादों में बसी हुई है।

भिलाई एंथम की शुरुआत भी उनकी आवाज से करने की योजना थी। एम. रवि चाहते थे कि पहला स्वर तीजन बाई का हो। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि वह पंडवानी के अलावा कुछ और नहीं गा सकतीं। फिर रायपुर के स्वप्निल स्टूडियो में करीब 45 मिनट तक उन्होंने पंडवानी प्रस्तुत की। शिफॉन की साड़ी और बिना बाजू के ब्लाउज में उनका वह रूप हर किसी के लिए नया था। स्टूडियो में मौजूद सभी लोग मंत्रमुग्ध होकर उन्हें सुनते रहे। उन्हीं 45 मिनट की रिकॉर्डिंग में से एक पंक्ति चुनकर भिलाई एंथम की शुरुआत बनाई गई।

समाज का विरोध, बहिष्कार भी झेला

भिलाई के गनियारी की एक साधारण बेटी ने दुनिया को दिखा दिया कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। समाज के विरोध का सामना किया। बहिष्कार भी झेला। लेकिन कदम कभी नहीं रुके। उन्होंने पंडवानी की कापालिक शैली में मंच पर खड़े होकर इतिहास रच दिया।

भिलाई स्टील प्लांट के लिए ‘तीजन दीदी’ ही रहीं

देश ने भी उनके योगदान का सम्मान किया। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और फिर पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया। देश-विदेश के अनेक पुरस्कार उनके हिस्से आए। लेकिन भिलाई स्टील प्लांट परिवार के लिए वह हमेशा अपनी ‘तीजन दीदी’ ही रहीं।
आज उनकी आवाज खामोश हो गई है। तानपुरा थम गया है। लेकिन महाभारत की वह गूंज, वह स्वर और वह संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। छत्तीसगढ़ ने अपनी सबसे बुलंद आवाज खो दी है। भिलाई स्टील प्लांट ने अपना एक गौरव खो दिया है।

जानिए पुरस्कार कब-कब मिले

वर्ष 2003 में पद्म भूषण से सम्मानित
पद्मश्री से 1987 में सम्मानित
पद्म भूषण से 2003 में सम्मानित
पद्म विभूषण से 2019 में सम्मानित
कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान
पद्म भूषण से अलंकृत पद्मश्री 1988
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 1995
कई विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद उपाधियों से भी अलंकृत किया

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की तक

तीजनबाई ने अपनी कला का प्रदर्शन भारत ही नहीं बल्कि ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, तुर्की सहित अनेक देशों में किया। उनकी प्रस्तुतियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय लोककला की नई पहचान बनाई। उन्होंने साबित किया कि लोककला किसी भाषा या सीमा की मोहताज नहीं होती। डॉ. तीजनबाई को कला जगत में उनके असाधारण योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है।

नाना की संगत से मिली नई दिशा

डॉ. तीजनबाई का जन्म वर्ष 1956 में दुर्ग जिले (वर्तमान छत्तीसगढ़) के गनियारी गांव में पारधी समुदाय के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम चुनुकलाल (या हुनुकलाल) पारधी और माता का नाम सुखवती देवी था। बचपन में उन्होंने अपने नाना ब्रजलाल से महाभारत की कथाएं सुनीं और वहीं से पंडवानी के प्रति उनका लगाव शुरू हुआ।

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