एमओयू के तहत इंडियन ऑयल हर वर्ष SAIL राउरकेला स्टील प्लांट को 7,500 मीट्रिक टन सल्फर पेलेट्स की आपूर्ति करेगा।
- समझौते की अवधि प्रारंभिक तौर पर तीन वर्ष होगी। आवश्यकता पड़ने पर इसे दो वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकेगा।
सूचनाजी न्यूज, राउरकेला। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के राउरकेला स्टील प्लांट (आरएसपी) ने कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राउरकेला स्टील प्लांट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) के साथ सल्फर पेलेट्स की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) किया है।
यह समझौता कोल केमिकल्स विभाग (सीसीडी) में सल्फ्यूरिक एसिड के निर्माण में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल सल्फर पेलेट्स की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करेगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने और लागत प्रभावी संचालन में मदद मिलेगी।
एमओयू पर हस्ताक्षर राउरकेला स्टील प्लांट के कार्यपालक निदेशक (मैटेरियल्स मैनेजमेंट) अनिल कुमार की मौजूदगी में ईडी (एमएम) कॉन्फ्रेंस हॉल में हुए। राउरकेला स्टील प्लांट की ओर से मुख्य महाप्रबंधक (मैटेरियल्स मैनेजमेंट) टी. विनोद और इंडियन ऑयल की संबलपुर डिवीजन के डिविजनल इंस्टीट्यूशनल बिजनेस हेड प्रकाश भारती ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर इंडियन ऑयल के जनरल मैनेजर (इंस्टीट्यूशनल बिजनेस) देबदत्त राउत्राय, राउरकेला स्टील प्लांट के सीजीएम (कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स विभाग) राकेश जोशी सहित दोनों संस्थानों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
समझौते की अवधि प्रारंभिक तौर पर तीन वर्ष होगी। आवश्यकता पड़ने पर इसे दो वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकेगा। एमओयू के तहत इंडियन ऑयल हर वर्ष राउरकेला स्टील प्लांट को 7,500 मीट्रिक टन सल्फर पेलेट्स की आपूर्ति करेगा।
प्रबंधन का मानना है कि इस समझौते से कोल केमिकल्स विभाग में कच्चे माल की निर्बाध उपलब्धता बनी रहेगी। इससे उत्पादन में निरंतरता आएगी, परिचालन की विश्वसनीयता बढ़ेगी और विभाग की कार्यक्षमता में सुधार होगा।
राउरकेला स्टील प्लांट ने कहा कि यह समझौता अत्याधुनिक तकनीक अपनाने, खरीद प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने तथा महत्वपूर्ण कच्चे माल की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने की उसकी रणनीति का हिस्सा है।
एमओयू का प्रारूप एवं शर्तें एजीएम (मैटेरियल्स मैनेजमेंट-परचेज) एच. राउत और डिप्टी मैनेजर (एमएम-परचेज) डी.के. दास ने जीएम (एमएम-परचेज) जी.एस. गोस्वामी के मार्गदर्शन में तैयार कीं।

