Bokaro में हड़ताल पर रोक, इस काम पर होगी FIR, Bhilai Steel Plant ने थमाया यूनियन नेता को नोटिस
सभी यूनियन नेताओं को चेतावनी पत्र थमा दिया है। किसी ने कर्मचारियों को ड्यूटी जाते समय रोका तो एफआइआर होगी। सूचनाजी न्यूज, भिलाई/बोकारो। सेल हड़ताल को लेकर बोकारो और भिलाई स्टील प्लांट से बड़ी खबर आ रही है। बोकारो में आचार संहिता की वजह से जिला प्रशासन ने हड़ताल पर रोक लगा दिया है। साथ ही सभी यूनियन नेताओं को चेतावनी पत्र थमा दिया है। किसी ने कर्मचारियों को ड्यूटी जाते समय रोका तो एफआइआर होगी। इसको देखते हुए संयुक्त यूनियन ने कर्मचारियों से अपील किया है कि वे घर पर ही रहें। ड्यूटी न जाएं, इससे हड़ताल
सभी यूनियन नेताओं को चेतावनी पत्र थमा दिया है। किसी ने कर्मचारियों को ड्यूटी जाते समय रोका तो एफआइआर होगी। सूचनाजी न्यूज, भिलाई/बोकारो। सेल हड़ताल को लेकर बोकारो और भिलाई स्टील प्लांट से बड़ी खबर आ रही है। बोकारो में आचार संहिता की वजह से जिला प्रशासन ने हड़ताल पर रोक लगा दिया है। साथ ही सभी यूनियन नेताओं को चेतावनी पत्र थमा दिया है। किसी ने कर्मचारियों को ड्यूटी जाते समय रोका तो एफआइआर होगी। इसको देखते हुए संयुक्त यूनियन ने कर्मचारियों से अपील किया है कि वे घर पर ही रहें। ड्यूटी न जाएं, इससे हड़ताल सफल हो जाएगी। इस बीच भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन ने एक युवा श्रमिक नेता को अनुशासनहीनता के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। इससे हड़कंप मचा हुआ है। बीएसपी प्रबंधन का कहना है कि सुलह वार्ता के दौरान हड़ताल पर जाना औद्योगिक विवाद अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पूर्णतः प्रतिबंधित है। ये खबर भी पढ़ें: केंद्रीय श्रमायुक्त ने सेल प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट, हड़ताल वाले दिन फिर मीटिंग सेल बीएसपी प्रबंधन का कहना है कि आईडी एक्ट की धारा 22 (1) (d) के अनुसार भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे लोक उपयोगी सेवाओं में जब सुलह अधिकारी के समक्ष हड़ताल का विषय सुलह वार्ता में शामिल कर लिया गया हो तो हड़ताल पर जाना गैरकानूनी और पूर्णतः प्रतिबंधित है। एक महीने की कैद व जुर्माना भी प्रबंधन का कहना है कि आईडी एक्ट के प्रावधान इस बारे में इतने सख्त है कि सुलह वार्ता समाप्त हो जाने के सात दिनों के भीतर भी हड़ताल पर नहीं जाया जा सकता है, और गैरकानूनी हड़ताल में शामिल होने वाले आई डी एक्ट की धारा 26 के तहत एक महीने की कैद व जुर्माने के भागी बन सकते है। ये खबर भी पढ़ें: केंद्रीय श्रमायुक्त ने सेल प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट, हड़ताल वाले दिन फिर मीटिंग जानिए न्यायालय को लेकर क्या कहा प्रबंधन ने गैरकानूनी कृत्य के लिए न्यायालय सजा दे सकता है। इसका अर्थ ये नहीं हो सकता की जबतक न्यायालय उस कृत्य के लिए सजा न दे दे या उसे प्रतिबंधित या गैरकानूनी घोषित न कर दे वह कृत्य गैर कानूनी नहीं है। जब एक्ट में किसी कृत्य को गैरकानूनी परिभाषित कर के उसे प्रतिबंधित कर दिया गया तो उसे करना निश्चित रूप से कानून के उल्लंघन के दायरे में आएगा।