भिलाई इस्पात संयंत्र: पेटी ठेकेदारों को वेंडर बनाकर दीजिए ठेका, संवरेगी कैंटीन, गुणवत्ता और लागत होगी कम

कैंटीनों में कार्यरत पुराने ऑपरेटरों को वेंडर के रूप में विकसित कर मुख्य धारा में लाएं। प्रबंधन को अनुभवी कार्यशील संसाधन मिलेगा। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की संयंत्र-स्थित कैंटीनों के सुगम, व्यवस्थित और उच्च गुणवत्ता के साथ संचालन को लेकर एक कैंटीन संचालक द्वारा प्रबंधन के समक्ष व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। विगत छह वर्षों से कैंटीन संचालन से जुड़े अनुभवों के आधार पर दिए गए ये सुझाव कैंटीन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ज

  • कैंटीनों में कार्यरत पुराने ऑपरेटरों को वेंडर के रूप में विकसित कर मुख्य धारा में लाएं। प्रबंधन को अनुभवी कार्यशील संसाधन मिलेगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की संयंत्र-स्थित कैंटीनों के सुगम, व्यवस्थित और उच्च गुणवत्ता के साथ संचालन को लेकर एक कैंटीन संचालक द्वारा प्रबंधन के समक्ष व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। विगत छह वर्षों से कैंटीन संचालन से जुड़े अनुभवों के आधार पर दिए गए ये सुझाव कैंटीन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार GM HR (Works) के साथ हुई संक्षिप्त बातचीत के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई थी। प्लांट के अंदर कैंटीन के लिए एक-दो ठेकेदार ठेका लेकर इसे पेटी ठेकेदार को हैंडओवर कर देते हैं। इससे पेटी ठेकेदार की जवाबदारी ठेकेदार के प्रति हो जाती है, न कि बीएसपी प्रबंधन के लिए। ये खबर भी पढ़ें: Bhilai Steel Plant: रेल मिल में खानापूर्ति बनकर न रह जाए सेफ्टी टॉक, चोरी, कैंटीन, एक्सीडेंट पर CGM से CITU की सीधी बात इसलिए सुझाव दिए गए हैं कि इन्हीं पेटी ठेकेदारों को ठेका देने से इनकी जवाबदारी बीएसपी के प्रति हो जाएगी। वहीं, ठेके के नाम पर बीच में मोटी रकम खर्च होती है, वह भी रुक जाएगी। इस सुझाव पर अमल करने की मांग की गई है। GM HR (Works) के निर्देश पर AGM (कैंटीन सुविधाएं) के समक्ष लिखित रूप में सुझाव प्रस्तुत किए गए हैं। ये खबर भी पढ़ें: Bhilai Steel Plant: भड़का गुस्सा, प्रदेश भर में फूंक दिया मोदी, CM साय, अडानी, SAIL BSP प्रबंधन का पुतला कैंटीन संचालन में सुधार के प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं सभी कैंटीनों के लिए सामूहिक निविदा प्रक्रिया के स्थान पर प्रत्येक कैंटीन को उसके वास्तविक संचालक को सौंपा जाए। लंबे समय से कैंटीनों में कार्यरत पुराने ऑपरेटरों को वेंडर के रूप में विकसित कर मुख्य धारा में लाया जाए, जिससे प्रबंधन को अनुभवी कार्यशील संसाधन मिल सकें। ये खबर भी पढ़ें: BSP Rail Mill CGM-CITU Meeting: स्पेयर्स खरीदने में कमीशन खोरी का शक, मैनपॉवर किल्लत, ठेका श्रमिकों से पैसा छीनने का उछला मुद्दा प्रबंधन द्वारा बाजार व्यवस्था के अनुरूप एक वर्ष के लिए नाश्ता, चाय, भोजन आदि की कीमत, वजन और गुणवत्ता निर्धारित की जाए तथा इसकी कड़ाई से निगरानी और समीक्षा हो। EPF, ESIC एवं सामूहिक बीमा को अनिवार्य रखा जाए, जबकि अन्य प्रक्रियाओं में आवश्यकतानुसार शिथिलता दी जा सकती है। कैंटीन कर्मचारियों को बायोमेट्रिक प्रणाली से मुक्त रखा जाए, क्योंकि अधिकांश कर्मचारी नियमित भुगतान पर कार्यरत हैं और उनकी उपस्थिति पहले से ही सूक्ष्म स्तर पर दर्ज होती है। ये खबर भी पढ़ें: Sector 1-9 Hospital: कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, कैंसर विभाग का निजीकरण, पर कर्मचारियों-अधिकारियों, घरवालों का इलाज होगा फ्री कैंटीन वेंडरों को संयंत्र गेट से वेस्ट सामग्री (जैसे तेल के टीन, खाली बोरे, पुट्ठे के कार्टन आदि) बाहर ले जाने अथवा उनके उपयोग/मरम्मत के लिए विशेष राहत दी जाए, जिससे संयंत्र परिसर में अनावश्यक वस्तुओं का जमाव न हो और वेंडरों की लागत भी नियंत्रित रह सके। कैंटीनों से आएंगे बेहतर रिजल्ट सुझाव प्रस्तुत करने वाले कैंटीन संचालक का कहना है कि ये बिंदु उनके स्वयं के संचालन अनुभव और स्थानीय व्यवस्थाओं की समझ पर आधारित हैं। यदि प्रबंधन सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ इन पर विचार करे, तो कैंटीन संचालन में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। ये खबर भी पढ़ें: महंगाई की पटरी पर दौड़ी ट्रेनें! मोदी सरकार का रेल यात्रियों को नया झटका, सफर महंगा उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रस्तुत बिंदुओं को सुझाव के रूप में देखा जाए, न कि किसी प्रकार की मांग के रूप में। उद्देश्य केवल यह है कि प्रक्रियागत जटिलताएं कम हों और कार्य परिणाम अधिक प्रभावी बन सकें। ये खबर भी पढ़ें: SAIL में बदल गए रिपोर्टिंग हेड, डायरेक्टर पर्सनल केके सिंह, डायरेक्टर कमर्शियल, DIC सीआर महापात्रा, आलोक वर्मा का बढ़ा पॉवर