BSP स्क्रैप चोरी Files 1: सिर्फ 5 हजार की सेटिंग, भोर में 5 बजे ट्रक में भरकर निकलता था करोड़ों का स्क्रैप

BSP स्क्रैप चोरी Files 1: में हम आपको बताने जा रहे हैं कि भिलाई स्टील प्लांट से माल कैसे पार होता था। अज़मत अली, भिलाई। दुर्ग पुलिस ने करीब 25 या 26 मई को हथखोज के एक गोदाम से 250 टन स्क्रैप बरामद किया था। यह स्क्रैप सेल भिलाई स्टील प्लांट से पार किया गया था। तमाम पूछताछ और 12 गिरफ्तारियों के बाद भी कई राज छुपे हुए हैं। सूचनाजी.कॉम अंदर की खबर आपके लिए लेकर आ रहा है। सच्ची और पक्की खबर सिर्फ आप सूचनाजी.कॉम में पढ़ने जा रहे हैं। करीब 10 से ज्यादा स्टोरी लगातार आपके सामने पेश की जाएगी। एक-एक कड़ी को

  • BSP स्क्रैप चोरी Files 1: में हम आपको बताने जा रहे हैं कि भिलाई स्टील प्लांट से माल कैसे पार होता था।
अज़मत अली, भिलाई। दुर्ग पुलिस ने करीब 25 या 26 मई को हथखोज के एक गोदाम से 250 टन स्क्रैप बरामद किया था। यह स्क्रैप सेल भिलाई स्टील प्लांट से पार किया गया था। तमाम पूछताछ और 12 गिरफ्तारियों के बाद भी कई राज छुपे हुए हैं। सूचनाजी.कॉम अंदर की खबर आपके लिए लेकर आ रहा है। सच्ची और पक्की खबर सिर्फ आप सूचनाजी.कॉम में पढ़ने जा रहे हैं। करीब 10 से ज्यादा स्टोरी लगातार आपके सामने पेश की जाएगी। एक-एक कड़ी को ध्यान से पढ़ते जाइएगा। कॉपी पेस्ट करने वाली परंपरा के खिलाफ सूचनाजी.कॉम अंदर की खबर निकालकर लाया है। साथ ही उन लोगों के लिए चेतावनी है, जो बगैर अनुमति सूचनाजी.कॉम की खबर को कॉपी करके अपने प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करेंगे। ऐसे लोगों के खिलाफ सूचनाजी.कॉम कॉपी राइट एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई भी करेगा। ये खबर भी पढ़ें: BSP ठेकेदार की मौत पर सस्पेंस: आत्महत्या या हादसा? किचन में नहीं था गैस सिलेंडर, मिला इंडक्शन चूल्हा BSP स्क्रैप चोरी Files 1: में हम आपको बताने जा रहे हैं कि भिलाई स्टील प्लांट से माल कैसे पार होता था। इसका मास्टरमाइंड कौन था। ये संभव कैसे होता था। एसएमएस 3 की ठेका कंपनी साईं एसोसिएट का चीफ सुपरवाइजर घनश्याम गुप्ता ही मास्टरमाइंड था। उसने खुद स्वीकारा है कि सिर्फ 5 हजार की सेटिंग से वह ट्रकों में लोहा भरवाकर प्लांट से बाहर भेजवाता था। प्रति ट्रक उसे 5 हजार रुपए मिलता था। एक साथ 5 हजार रुपए मिलने से लालच बढ़ती गई और चोरी की वारदात में वह हिस्सेदार बन बैठा। ये खबर भी पढ़ें: BSP स्क्रैप चोरी कांड: हथकड़ी में प्लांट पहुंचा चोर, पुलिस बोली-बता, कहां-कहां से माल किया पार, Crime Scene Recreate बीएसपी से लोहा बाहर निकालने के लिए सही समय भोर में 5 बजे से लेकर साढ़े 5 बजे का तय किया गया था। इस वक्त नाइट शिफ्ट वाले कुछ कार्मिक सोए रहते हैं। इसी का फायदा उठाते हुए चोर गिरोह के सदस्य ऑपरेटर की भूमिका में आ जाते। आराम से लोहा एक ट्रक में लोड किया जाता। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भनक तक नहीं लग पाता था। यह वारदात सप्ताह में एकाक-बार ही अंदाज दिया जाता, ताकि किसी को शक न होने पाए। जब पूरी टीम मौजूद रहती, उसी का फायदा उठाते। जहां लाखों टन माल पड़ा है, उसमें से 10-20 टन माल निकलने पर किसी को अंदाजा भी नहीं होता था। ये खबर भी पढ़ें: SAIL स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना 2026: RSP के 2 CGM का आवेदन खारिज, 50 से ज्यादा BSL कार्मिकों की जून में VR से विदाई, BSP, DSP से ये खबर सेकंड शिफ्ट से लेकर नाइट शिफ्ट में चोरी का खेल होता। जब शिफ्ट चेंज होने वाली होती, तभी ठेका कंपनी के कर्मचारी चोरी की वारदात को आराम से अंदाज दे देते थे। प्लांट में घटते मैनपॉवर की वजह से ठेका प्रथा का दायरा बढ़ता जा रहा है। ये खबर भी पढ़ें: इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक की बढ़ीं मुश्किलें, PM नहीं अब राष्ट्रपति से शिकायत, AITUC ने की पद से हटाने, जांच की मांग अधिकारी खुद सुपरवाइजर की हैसियत से मौके पर मौजूद नहीं रहते। ठेका कंपनी का सुपरवाइजर ही जिम्मेदारी संभालता। यही वजह है कि साईं एसोसिएट का चीफ सुपरवाइजर घनश्याम गुप्ता चोरों से मिल गया और माल पार कराने का मुख्य किरदार बन गया। सारे नियम और प्रक्रिया को जानने और समझने में माहिर चीफ सुपरवाइजर आसानी से लोहा चोरी कराता था।