ईपीएस 95 पेंशनर्स की समस्याएं कम नहीं, बीएसपी में हायर पेंशन भी फंसी, छत्तीसगढ़ के सांसदों का दरवाजा खटखटा रहे पेंशनभोगी
पिछले कई वर्षों से न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 प्रतिमाह किए जाने तथा उसे महंगाई भत्ते (डीए) से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। न्यूनतम पेंशन में वृद्धि, एनएमडीसी के 764 कर्मचारियों के लंबित उच्च पेंशन प्रकरणों तथा भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारियों को उच्च पेंशन के लिए अवैधानिक एवं अनुचित ढंग से अपात्र घोषित किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा प्रदेश के विभिन्न सांसदों को ज्ञापन सौंपा गया। राष्ट्रीय संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ राज्य के अध्यक
- पिछले कई वर्षों से न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 प्रतिमाह किए जाने तथा उसे महंगाई भत्ते (डीए) से जोड़ने की मांग कर रहे हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। न्यूनतम पेंशन में वृद्धि, एनएमडीसी के 764 कर्मचारियों के लंबित उच्च पेंशन प्रकरणों तथा भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारियों को उच्च पेंशन के लिए अवैधानिक एवं अनुचित ढंग से अपात्र घोषित किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा प्रदेश के विभिन्न सांसदों को ज्ञापन सौंपा गया।
राष्ट्रीय संघर्ष समिति, छत्तीसगढ़ राज्य के अध्यक्ष एलएम सिद्दीकी के निर्देशन में विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों की जिला एवं क्षेत्रीय इकाइयों ने अपने-अपने सांसदों को ज्ञापन सौंपते हुए आग्रह किया कि वे संसद में इन वर्षों से लंबित और लाखों पेंशनर्स से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाएं।
ज्ञापन दिए जाने वाले जनप्रतिनिधियों में दुर्ग के सांसद विजय बघेल, रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यसभा सांसद फूलो देवी नेताम, राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडे तथा जगदलपुर के सांसद महेश कश्यप शामिल हैं। जगदलपुर, किरंदुल एवं बचेली की अलग-अलग टीमों ने संबंधित सांसदों से भेंट कर ज्ञापन सौंपे।
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ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि देश के लगभग 80 लाख ईपीएस-95 पेंशनर्स, जिनमें छत्तीसगढ़ के लगभग डेढ़ लाख पेंशनर्स शामिल हैं, पिछले कई वर्षों से न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाकर ₹7,500 प्रतिमाह किए जाने तथा उसे महंगाई भत्ते (डीए) से जोड़ने की मांग कर रहे हैं। इस न्यायोचित मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन जारी है और दुर्भाग्यवश इस दौरान हजारों पेंशनर्स का निधन भी हो चुका है।
ज्ञापन में यह भी बताया गया कि एनएमडीसी के लगभग 150 अधिकारियों को उच्च पेंशन के लिए डिमांड लेटर जारी किए जा चुके हैं तथा अनेक अधिकारियों की उच्च पेंशन प्रारंभ भी हो चुकी है। इसके विपरीत, 764 कर्मचारियों के उच्च पेंशन संबंधी प्रकरण आज भी लंबित हैं और लंबे समय के बाद भी उनकी फाइलों का विधिवत प्रसंस्करण (Processing) तक प्रारंभ नहीं किया गया है। जबकि एक ही कंपनी, एक ही भविष्य निधि ट्रस्ट तथा समान परिस्थितियों के बावजूद यह भेदभावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि विस्तृत परीक्षण के उपरांत ईपीएफओ स्वयं एनएमडीसी को उच्च पेंशन के लिए पात्र घोषित कर चुका है।
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ज्ञापन में यह गंभीर मुद्दा भी उठाया गया कि जहां राउरकेला एवं बोकारो स्टील प्लांट के कर्मचारियों के उच्च पेंशन प्रकरणों पर कार्रवाई प्रारंभ हो चुकी है, वहीं भिलाई स्टील प्लांट के कर्मचारियों को केवल ट्रस्ट रूल्स का आधार बनाकर उच्च पेंशन के लिए अपात्र घोषित किया गया है। राष्ट्रीय संघर्ष समिति ने इसे ईपीएफओ का मनमाना, भेदभावपूर्ण तथा विधि-विरुद्ध निर्णय बताया है।
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समिति का कहना है कि उच्चतम न्यायालय के 4 नवम्बर 2022 के ऐतिहासिक निर्णय में ट्रस्ट रूल्स का कहीं भी उल्लेख नहीं है। इसके अतिरिक्त विभिन्न उच्च न्यायालयों ने भी अपने निर्णयों में स्पष्ट किया है कि ट्रस्ट रूल्स उच्च पेंशन प्राप्त करने में बाधक नहीं हैं। हाल ही में मदुरै पीठ, मद्रास उच्च न्यायालय ने भी इसी सिद्धांत की पुष्टि की है।
इस अभियान को सफल बनाने में राष्ट्रीय संघर्ष समिति, दुर्ग के जिला अध्यक्ष उमेश उपाध्याय, रायपुर के महासचिव जीपी सिंह, जगदलपुर के कार्यकारी अध्यक्ष एमएम. जिलानी, बैलाडीला-किरंदुल के सचिव एसआर. कश्यप, राजनांदगांव के जिला अध्यक्ष आर. के. वर्मा, बचेली के सचिव आर. एल. साहू तथा उनकी टीमों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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राष्ट्रीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत एवं राष्ट्रीय महासचिव वीरेंद्र सिंह राजावत ने इस अभियान की सराहना करते हुए सभी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। राज्य अध्यक्ष एलएम. सिद्दीकी ने सभी ईपीएस-95 पेंशनर्स एवं पदाधिकारियों से आह्वान किया कि अगस्त में नई दिल्ली में प्रस्तावित राष्ट्रीय आंदोलन की तैयारियां अभी से प्रारंभ करें, ताकि पेंशनर्स की न्यायोचित मांगों को प्रभावी ढंग से सरकार के समक्ष रखा जा सके।