SAIL Gratuity News: कर्मचारियों को 10 से 20 लाख तक नुकसान, कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, CITU बोला-पेपर रखिए तैयार

35-40 साल की सेवा वाले श्रमिक की गणना में ₹35-45 लाख ग्रेच्युटी आने पर भी SAIL अब अधिकतम ₹25 लाख ही दे रहा। इससे 20 लाख तक का सीधा नुकसान। सभी श्रमिकों को रिटायरमेंट पर मिलने वाला ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर, सर्विस बुक और कैलकुलेशन शीट सुरक्षित रखनी होगी। मामला निपटने तक ₹25 लाख ग्रेच्युटी "Under Protest" लिखकर स्वीकार करना जरूरी है। इससे भविष्य में एरियर दावे का कानूनी अधिकार बना रहेगा। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। SAIL Gratuity News: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के कर्मचारी नीतियों की वजह से परेश

  • 35-40 साल की सेवा वाले श्रमिक की गणना में ₹35-45 लाख ग्रेच्युटी आने पर भी SAIL अब अधिकतम ₹25 लाख ही दे रहा। इससे 20 लाख तक का सीधा नुकसान।
  • सभी श्रमिकों को रिटायरमेंट पर मिलने वाला ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर, सर्विस बुक और कैलकुलेशन शीट सुरक्षित रखनी होगी।
  • मामला निपटने तक ₹25 लाख ग्रेच्युटी "Under Protest" लिखकर स्वीकार करना जरूरी है। इससे भविष्य में एरियर दावे का कानूनी अधिकार बना रहेगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। SAIL Gratuity News: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के कर्मचारी नीतियों की वजह से परेशान हो रहे हैं। एनजेसीएस की बैठक हो नहीं रही है। सेल ग्रेच्युटी सीलिंग विवाद भी बढ़ता जा रहा है। मामला कोर्ट में है। SWFI (CITU) की ओर से SAIL ग्रेच्युटी सीलिंग विवाद पर कई तथ्य सामने रखे गए हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। फैसला सुनाया नहीं गया है। इसको लेकर सीटू की उम्मीदें बढ़ गई है। यूनियन का कहना है कि SAIL प्रबंधन ने पहले 20 लाख और फिर 25 लाख सीलिंग लगाकर NJCS के पांच दशक पुराने समझौते और श्रमिकों के न्यायोचित अधिकार का हनन किया है। इससे हर श्रमिक के रिटायरमेंट बेनिफिट में लाखों का नुकसान हो रहा है। इस सुनियोजित रणनीति के खिलाफ श्रमिक वर्ग की सामूहिक कानूनी और लोकतांत्रिक लड़ाई चल रही है। इस मामले का फैसला सिर्फ SAIL नहीं, पूरे सार्वजनिक क्षेत्र के श्रमिकों का भविष्य तय करेगा। ये खबर भी पढ़िए: SAIL VR की आंधी में BSP CGM इंजार्ज का भी नाम, क्या बन पाएंगे ED? 1. ऐतिहासिक अधिकार और NJCS समझौता लगभग पांच दशकों तक SAIL के स्थायी श्रमिकों की ग्रेच्युटी पूरी तरह से सीलिंग-मुक्त थी। National Joint Committee for Steel Industry-NJCS के द्विपक्षीय समझौते के अनुसार, अंतिम आहरित बेसिक+DA और सेवा अवधि के आधार पर गणना में जितनी राशि आती थी, श्रमिक रिटायरमेंट पर पूरी राशि पाने के हकदार थे। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(10) के तहत पूरी राशि कर-मुक्त थी। यह "अनलिमिटेड ग्रेच्युटी" कोई कृपा नहीं थी। अधिकारियों की तुलना में श्रमिकों के लंबे समय से कम भत्ते, कम सुविधाओं और कठिन परिश्रम की मान्यता के रूप में NJCS समझौते में इसे मुआवजे के तौर पर दर्ज किया गया था। ये खबर भी पढ़ें: Bhilai Steel Plant: चोरी का कोयला बिकता है खुर्सीपार गेट के सामने दुकान पर, ट्रक संग माल जब्त, फंसा CISF 2. एकतरफा सीलिंग लागू करना: समझौता भंग की शुरुआत SAIL प्रबंधन ने पहले एकतरफा सर्कुलर जारी कर श्रमिकों की ग्रेच्युटी ₹20 लाख पर कैप कर दी। बाद में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सीलिंग ₹25 लाख होने पर, 13 जून 2024 के सर्कुलर-SAIL/Pers/Rules/2024 के अनुसार 01.01.2024 से श्रमिक और अधिकारी सभी के लिए सीलिंग ₹25 लाख तय कर दी गई। SAIL का तर्क DPE गाइडलाइन के अनुसार केंद्र के साथ समानता लाना है। लेकिन वास्तव में यह गाइडलाइन CPSE के लिए "mandatory" नहीं, "enabling" प्रकृति की है। ये खबर भी पढ़िए: Steel Authority of India Limited: NPS में स्वैच्छिक अंशदान का विकल्प 15 जून तक, कार्मिक ध्यान दें 3. श्रमिकों पर आघात: दोहरा नुकसान और आर्थिक क्षति यह सीलिंग लागू करना श्रमिकों पर सीधा दोहरा आघात है- 1. सीधा आर्थिक नुकसान: 35-40 साल की सेवा वाले श्रमिक की गणना में ₹35-45 लाख ग्रेच्युटी आने पर भी SAIL अब अधिकतम ₹25 लाख ही देगा। इससे प्रति श्रमिक ₹10 से ₹20 लाख तक का सीधा नुकसान हो रहा है। 2. ऐतिहासिक समझौता भंग: पूरी नौकरी में कम भत्ता मानने की एकमात्र शर्त थी "रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी में पूरा हो जाएगा"। SAIL ने वह वादा तोड़ा है। 3. कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: Industrial Disputes Act की धारा 9A के अनुसार मान्यता प्राप्त यूनियन से चर्चा और 21 दिन के नोटिस के बिना एकतरफा सेवा शर्तें बदलना पूरी तरह अवैध है। SAIL ने इस अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया। ये खबर भी पढ़ें: Breaking News: भिलाई स्टील प्लांट के ठेकेदार सुधांशु खंडेलवाल संदिग्ध परिस्थिति में 100% जले, भर्ती 4. भेदभाव का स्पष्ट प्रमाण एक ही DPE गाइडलाइन की गलत व्याख्या कर SAIL ने दो तरह के मानदंड लागू किए: - अधिकारी: ग्रेच्युटी सीलिंग ₹20 लाख से बढ़ाकर ₹25 लाख= ₹5 लाख लाभ - श्रमिक: ग्रेच्युटी अनलिमिटेड से घटाकर ₹25 लाख = ₹10-20 लाख नुकसान यह संविधान के Article 14 के तहत स्पष्ट भेदभाव है। 5. कानूनी लड़ाई: कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला इस अवैध सर्कुलर को चुनौती देते हुए Steel Workers Federation of India (SWFI) और CITU ने संयुक्त रूप से कलकत्ता हाई कोर्ट में मामला दायर किया ये खबर भी पढ़ें: Dedicated Freight Rail Corridor Project: दुर्ग जिले के 18 गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक, ये हैं नाम मामले का मुख्य कानूनी आधार 1. NJCS एक वैध द्विपक्षीय समझौता है। कंपनी एकतरफा इसे रद्द नहीं कर सकती। 2. धारा 9A, ID Act की सांविधिक प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है। 3. Article 14 के विरुद्ध भेदभावपूर्ण लागू करना। मामले की वर्तमान स्थिति 5 जून 2026 1. जनवरी 2025 में सिंगल बेंच में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है। 2. फैसला सुरक्षित है। अभी सुनाया नहीं गया। 3. कोई अंतरिम रोक नहीं है। इसलिए 01.01.2024 के बाद रिटायर होने वाले श्रमिक मजबूरन ₹25 लाख कैप पर ग्रेच्युटी ले रहे हैं। वर्तमान में यह ₹25 लाख पूरी तरह आयकर मुक्त है। 6. क्या करें और भविष्य 1. दस्तावेज़ सुरक्षा: सभी श्रमिकों को रिटायरमेंट पर मिलने वाला ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर, सर्विस बुक और कैलकुलेशन शीट सुरक्षित रखनी होगी। 2. "Under Protest" स्वीकार करें: मामला निपटने तक ₹25 लाख ग्रेच्युटी "Under Protest" लिखकर स्वीकार करना जरूरी है। इससे भविष्य में एरियर दावे का कानूनी अधिकार बना रहेगा। 3. फैसले का असर: मामला जीतने पर 01.01.2024 के बाद रिटायर हुए सभी श्रमिक कटी हुई राशि ब्याज सहित एरियर के रूप में वापस पाएंगे। हारने पर ₹25 लाख सीलिंग स्थायी हो जाएगी और श्रमिकों का ऐतिहासिक अधिकार हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।