SAIL में आएगा भूचाल! 3 साल के हादसों और मौत की फाइलें फिर खुलेंगी, जिम्मेदार अफसरों पर गिरेगी गाज
मंत्रालय का उद्देश्य साफ है कि सेफ्टी से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सूचनाजी न्यूज, भिलाई। Steel Authority of India Limited में हुए हादसों और मौतों को लेकर अब बड़ा एक्शन शुरू होने जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में सेल के विभिन्न स्टील प्लांटों और खदानों में हुए हादसों की फाइलें दोबारा खोली जाएंगी। हर केस में यह तय किया जाएगा कि हादसे के समय जिम्मेदार अधिकारी कौन थे, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो अब जवाबदेही तय की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इस्प
- मंत्रालय का उद्देश्य साफ है कि सेफ्टी से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। Steel Authority of India Limited में हुए हादसों और मौतों को लेकर अब बड़ा एक्शन शुरू होने जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में सेल के विभिन्न स्टील प्लांटों और खदानों में हुए हादसों की फाइलें दोबारा खोली जाएंगी। हर केस में यह तय किया जाएगा कि हादसे के समय जिम्मेदार अधिकारी कौन थे, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई और यदि कार्रवाई नहीं हुई तो अब जवाबदेही तय की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक इस्पात मंत्रालय अब सेफ्टी के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। मंत्रालय की ओर से सेल प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि पुराने मामलों की समीक्षा कर दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। माना जा रहा है कि जिन मामलों में लापरवाही साबित होगी, वहां संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई से लेकर प्रमोशन रोकने तक की सिफारिश की जा सकती है।
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बताया जा रहा है कि इस्पात सचिव संदीप पौंड्रिक के सख्त रुख के बाद सेल के सभी प्रमुख प्लांटों में हड़कंप मच गया है। Bhilai Steel Plant, Bokaro Steel Plant, Rourkela Steel Plant, Durgapur Steel Plant, IISCO Steel Plant, Salem Steel Plant, Visvesvaraya Iron and Steel Plant और सेल की माइंस में अधिकारियों के बीच बेचैनी बढ़ गई है।
अंदरखाने चर्चा है कि कई हादसों में जांच रिपोर्ट तो बनी, लेकिन जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया अधूरी रह गई। कुछ मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई कर फाइल बंद कर दी गई। अब मंत्रालय उन सभी मामलों की दोबारा समीक्षा कराना चाहता है, ताकि यह साफ हो सके कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी किस स्तर पर हुई।
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सेफ्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हादसों में जवाबदेही तय नहीं होती, तो सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह जाती है। यही वजह है कि अब मंत्रालय “नो टॉलरेंस ऑन सेफ्टी” की नीति पर काम करता दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार प्लांटवार हादसों की सूची तैयार की जाएगी। गंभीर दुर्घटनाओं, गैस लीकेज, औद्योगिक आग, ऊंचाई से गिरने, मशीनरी दुर्घटनाओं और ड्यूटी के दौरान हुई मौतों के मामलों की विशेष जांच हो सकती है।
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माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का सबसे बड़ा असर अधिकारियों के करियर पर पड़ेगा। जिन अफसरों के कार्यकाल में गंभीर हादसे हुए और उचित निगरानी नहीं मिली, उनके प्रमोशन और पोस्टिंग पर असर पड़ सकता है। मंत्रालय का उद्देश्य साफ है कि सेफ्टी से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
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