Big News: भिलाई स्टील प्लांट में छंटनी, हादसे, पेमेंट पर ठेकेदार भड़के, डायरेक्टर इंचार्ज का होगा घेराव, बवाल की तैयारी

Big News Bhilai Steel Plant Contractors are Furious will Protest in Front of the Director Incharge
  • भिलाई इस्पात संयंत्र में लगभग 27000 कुशल, अकुशल ठेका श्रमिक, लगभग 12000 कर्मचारी, अधिकारी कार्य करते है।
  • बीएसपी द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधयों को भी गलत तथ्यों की जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है। मजदूरों का पेमेंट भी अटका है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के भिलाई स्टील प्लांट से करीब 6 हजार मजदूरों की छंटनी का रास्ता साफ हो गया है। अब टेंडर ही इसको शामिल कर दिया गया है। नए ठेके में 20 प्रतिशत मजदूरों को कम रखने का उल्लेख किया गया है।

इस बात से बीएसपी ठेकेदार भड़क गए हैं। बड़े आंदोलन की घोषणा कर दी गई है। डायरेक्टर इंचार्ज का घेराव होने जा रहा है। वहीं, सांसद विजय बघेल की तरफ से दावा किया गया था कि प्रबंधन से बात हो गई है, कोई छंटनी नहीं होगी। लेकिन, बीएसपी प्रबंधन के फैसले से सांसद के दावे पर सवाल उठ गया है।

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भिलाई कॉन्ट्रैक्टर एंड लेबर वेलफेयर सोसायटी की सामान्य सभा हुई। प्रबंधन द्वारा श्रमिकों हितो की रक्षा एवं प्रबंधन द्वारा किए जा रहे शोषण के खिलाफ एक बैठक हुई। सर्व सम्मति से निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। ठेकेदारों ने कहा-भिलाई इस्पात संयंत्र के वर्तमान मुखिया भिलाई की संस्कृति, जिसमे सबकी भलाई हमेशा प्रथम रहती है। इसे ठेंगा दिखाते हुए एक सुनिश्चित सोची समझी साजिश के तहत उद्योग जगत की रीढ़ ‘श्रमिको ‘ का मनोबल तोड़ने की साजिश कर रहे हैं।

बीएसपी के ठेकेदारों ने कहा-संयंत्र में होने वाले दुर्घटनाओं के लिए मुखिया को जिम्मेदार बनाया जाए, ताकि बीएसपी के मुखिया श्रमिको की जिम्मेदारी लेने से मुँह ना चुरा ले। मुखिया के खिलाफ ठोस कार्यवाही हो।

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जनप्रतिनिधियों को भी गलत जानकारी

बीएसपी द्वारा स्थानीय जनप्रतिनिधयों को भी गलत तथ्यों की जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है। वहीं, नित्य नए तुगलकी फरमानो की वज़ह से आईआर क्लियरेंस प्राप्त नहीं होने के कारण वेतन भुगतान नहीं हो पा रहा है, जिससे श्रमिकों भूखे मरने की नौबत आ गई है। कभी भी भिलाई की आद्योगिक शांति भंग हो सकती है।

श्रमिक, सामाजिक, व्यापारिक एवं राजनैतिक संगठन एकजुट

सभी सदस्यों ने एक स्वर मे निर्णय लिया कि आने वाले समय में विरोध को और तेज किया जाएगा और शीष महल में रहने वाले मुखिया का हजारों श्रमिकों के साथ घेराव किया जाएगा। सभी श्रमिक, सामाजिक, व्यापारिक एवं राजनैतिक संगठनों की सहभागिता रहेगी।

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निजीकरण का आरोप

नित्य नए क़ानून ना तो वे न्याय संगत है, ना ही श्रमिक हित के है। ऐसे नियमों का हील हवाला देकर भिलाई इस्पात संयंत्र को एक सोची समझी साजिश के तहत निजी हाथो मे सौपे जाने की तैयारी की जा रही है, जो स्पष्ट रूप से निजीकरण की ओर एक कदम बढ़ा रहे है।

वर्तमान बीएसपी के मुखिया लाभ प्राप्त करने वाली इस इकाई को बीमार श्रेणी की ओर धकलने के लिए कोई कसर बाकी नहीं रख रहे है। श्रमिकों के अधिकारों का हनन कर उन्हें काम से वंचित कर स्वयं बड़े अधिकारी निजी आद्योगिक घराने के बड़े पदों पर आसीन हो जाते है।

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20% श्रमिकों की कटौती

20% श्रमिकों की संख्या की कटौती की गई है, जिससे श्रमिकों की रोजी-रोटी पर प्रहार है। वहीं, नए निविदा में दैनिक मजदूरी की दर राज्य शासन के दर से बदल कर केंद्र के दर पर किया जाना चाहिए, क्योंकि भिलाई इस्पात संयंत्र केंद्र सरकार का सार्वजनिक उपक्रम है।

नियमित कर्मचारियों का एरियर भी बकाया है

बीएसपी कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने के लिए ना तो पिछले वेतन समझौते का बकाया का भुगतान किया जा रहा है। लगातार सुविधाओं मे कटौती किया जा रहा है। जो, पीपी एक्ट का सीधा उल्लंघन है। चिकित्सा सेवा, बच्चो की शिक्षा, जर्जर आवास, संयंत्र के भीतर कार्य क्षेत्र मे असुरक्षित कार्य वातावरण,जिसमे वातावरण प्रदुषण,जहरीली गैस का खतरा आदि है।

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प्लांट के अंदर ये सुविधा भी ठीक नहीं

श्रमिकों के आराम के लिए ना तो कोई आराम कक्ष है। ना ही साफ सुथरे शौचालय है। कार्य क्षेत्र में मौसम अनुकूल कोई भी व्यवस्था उचित रूप से नहीं है। शुद्ध पेय जल के लिए ना ही कोई फ़िल्टर पानी की व्यवस्था है। ना ही कैंटीन में हाइजिन खाने की व्यवस्था है।

हादसों और मौत का सिलसिला जारी

लगभग सभी उत्पादन इकाइयों मे जो गैलरी आवगमन एवं कार्य के लिए बने है, वे जर्जर हैं। आयेदिन गैलरी गिरने की घटनाए घटित होती रहती है। पूर्व में कोक ओवन में हुई अगजनी की घटना में 14 श्रमिकों की अकाल मृत्यु हो गई थी, जिसकी जिम्मेदारी तत्कालीन मुखिया पर थोपी गई थी।

हाल ही में 4 श्रमिकों की कार्य के दौरान मृत्यु हो गई। मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जान की क़ीमत पर उत्पादन हो रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र में लगभग 27000 से ज्यादा कुशल, अकुशल ठेका श्रमिक, लगभग 12000 कर्मचारी, अधिकारी प्रतिदिन कार्य करते है।

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शिकायतों का निपटान हो

उच्च प्रबंधन एक सोची समझी चाल के अंतर्गत कार्य कर रहा है कि संयंत्र निजी हाथों में चला जाए। अतः ऐसे मंसूबे को सफल होने से बचाने के लिए विभिन्न संगठनों को एक स्वर में कार्य क्षेत्र में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए एवं शिकायतों के तुरंत निपटान किया जाना चाहिए।

श्रमिकों के अधिकारों एवं जान की रक्षा हो

आद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा तथा श्रमिक कल्याण श्रम मंत्रालय के नोडल अधिकारियो की नियुक्ति संयंत्र के भीतर होना चाहिए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों एवं जान की रक्षा कार्य के दौरान बेहतरी से हो सके। अधिकार और जान से खिलवाड़ करने वालों पर नकेल कसा जा सके।

इस बैठक में प्रमुख रूप से अध्यक्ष सीजू एन्थोनी, कार्यकारी अध्यक्ष त्रिलोकी सिंह, महामंत्री हितेश पटेल, उपाध्यक्ष धीरज शुक्ला, नवीन सिंह, सचिव राजेश अग्रवाल आदि सैकड़ों सदस्य उपस्थित थे।