कलेक्टर अभिजीत सिंह के अगले आदेश तक बैन प्रभावी रहेगा। डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के दायरे में 18 गांवों के भूमि मालिक।
सूचनाजी न्यूज, दुर्ग। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ईस्ट एवं वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और प्रभावित ग्रामीणों के हितों की सुरक्षा के उद्देश्य से दुर्ग जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह ने जिले के 18 गांवों में निजी भूमि के खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन तथा खरीदी-बिक्री पर आगामी आदेश तक अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है।
यह आदेश डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL), भारत सरकार (रेल मंत्रालय) के परियोजना प्रबंधक (विद्युत), रायपुर द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर जारी किया गया है। जिले में प्रस्तावित ईस्ट एवं वेस्ट डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के निर्माण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।
इन 18 गांवों में लागू होगा प्रतिबंध
बिरेझर
चंगोरी
कोनारी
चंदखुरी
हनोदा
खम्हरिया
उमरपोटी
उतई
डुमरडीह
सिरसाकला
परसदा (पाहंदा)
पाटन तहसील के गांव
परेवाडीह
पहंडोर
सोमनी
औंधी
मगरघटा
बेन्द्री
पथरीडीह
लेक्टर की अनुमति के बिना नहीं होंगे भूमि संबंधी लेन-देन
जारी आदेश के अनुसार इन गांवों में किसी भी प्रकार का खाता विभाजन, नामांतरण, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी-बिक्री अथवा अन्य भूमि संबंधी लेन-देन फिलहाल प्रतिबंधित रहेगा। यदि किसी हितबद्ध व्यक्ति या पक्षकार को विशेष परिस्थिति में भूमि संबंधी कार्य कराना है तो उसे कलेक्टर दुर्ग के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा। प्रशासन संबंधित परियोजना निकाय से अभिमत प्राप्त करने के बाद मामले पर उचित निर्णय लेगा।
प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा का दावा
जिला प्रशासन का कहना है कि परियोजना की घोषणा के बाद जमीनों की खरीद-फरोख्त और कृत्रिम रूप से भूमि मूल्य बढ़ाने जैसी गतिविधियों की आशंका रहती है। ऐसे में यह प्रतिबंध प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों के हितों की रक्षा करने तथा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लगाया गया है।
कलेक्टर अभिजीत सिंह द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। इससे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना के दायरे में आने वाले 18 गांवों के भूमि मालिक सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

