ऑल इंडिया स्टील वर्कर्स फेडरेशन एटक: सेल में बोनस पर सहमति पत्र हस्ताक्षरित। कर्मियों को 32000 और प्रशिक्षुओं को 25600 मिलेगा।
- प्रबंधन के अडियल रूख, जिद्द को देखते हुए इंटक अध्यक्ष संजीवा रेड्डी ने बीच का रास्ता निकाला था, ताकि प्रबंधन जबरन कम राशि खाते में न डाले।
सूचनाजी न्यूज, नई दिल्ली। सेल कर्मचारी बोनस 2026 तय कर दिया गया है। लेकिन, विवाद अब भी बना हुआ है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। सीटू ने बोनस समझौते पर साइन नहीं किया है। इस रवैये पर ऑल इंडिया स्टील वर्कर्स फेडरेशन एटक का बयान भी सामने आ गया है। ऑल इंडिया स्टील वर्कर्स फेडरेशन एटक के विद्यासागर गिरी और उप महासचिव रामाश्रय प्रसाद सिंह की ओर से यूनियन का पक्ष रखा गया है।
यूनियन नेताओं ने कहा-कई वर्षों से डेडलॉक के बाद अंततः एक अक्टूबर 2026 को सेल में एनजीसीएस कोड़ ग्रुप के नेताओं एवं प्रबंधन के बीचश्र बोनस के मुद्दों पर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर के बाद सेल के सभी संयंत्रों ,खदानों एवं कार्यालयों में कार्य करने वाले अनाधिशाशि कर्मियों को ₹32000 और प्रशिक्षुओं को उसका 80% अर्थात 25600 का भुगतान किया जाएगा।
हालांकि सीटू नेता ने बैठक में अपनी दी हुई सहमति से ही वायदा खिलाफी कर, हस्ताक्षर के पूर्व अपने नेता से स्वीकृति के लिए बाहर निकले एवं लौट कर कहा कि उनका फोन नहीं लग रहा है। इसलिए हम बिना पूछे हस्ताक्षर नहीं कर सकते। उनका इस स्तरहीन आचरण पर सभी अचंभित थे। आश्चर्य तो यह है कि सीटू के नेता सोशल मीडिया पर झूठ और असत्य की गलत बयानबाजी कर अपने अधकचरेपन एवं अविश्वसनीयता पर पर्दा डालने हेतु अपना बचाव कर रहे हैं एवं कथित रूप से 40000 की मांग की बात का झूठा प्रचार कर रहे हैं।
यह बताना प्रासंगिक होगा कि बैठक के पूर्व सभी श्रम पक्ष के नेताओं ने बैठक कर विमर्श किया कि विगत वर्षों में सेल प्रबंधन द्वारा सर्वोच्च द्वितीय फोरम एनजेसीएस की अपेक्षा कर एक तरफा ढंग से फैसलों को लागू करते रही है, जो उद्योग और श्रम संघ के हित में नहीं है। इसलिए इस बार बिना समझौता के प्रबंधन को एकतरफा कार्रवाई नहीं करने देना है। विगत वर्षों में कुछ लोगों के अकड़ के कारण श्रमिकों का जो घाटा हुआ है और हो सकता है उसे नहीं होने देना है। इस बार सभी को सहमति बनाकर भविष्य में विमर्श और सहमति से ही कार्यान्वन सुनिश्चित कराकर डेडलॉक तोड़ना है। इस पर सभी सहमत हुए वार्ता में शामिल हुए।
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डायरेक्टर एचआर केके सिंह ने आते ही बोला…
वार्ता में सेल के निदेशक वाणिज्यिक, अधिशासी निदेशक वित्त ,मुख्य महाप्रबंधक एच आर प्रारंभ से अन्य अधिकारियों के साथ बैठक में थे एवं स्कीम के अनुसार गणना बताया गया। निदेशक कार्मिक इस्पात मंत्रालय के बैठक में व्यस्त होने के कारण विलंब से आए और आते ही कहा कि आप लोग तो एक मत होंगे ही नहीं फिर भी हम वार्ता कर रहे हैं। जो स्कीम है, उससे हम बिल्कुल विचलित नहीं होंगे। उन्हें विचलन का निर्देश नहीं है। उसके बाद विमर्श शुरू हुई।
डॉ. संजीवा रेड्डी ने बिना समझौते की परंपरा बंद करने की बात कही
विद्यासागर गिरी ने बताया-सर्वप्रथम इंटक के अध्यक्ष डॉक्टर संजीव रेड्डी ने विगत वर्षों में बिना समझौता के प्रबंधन द्वारा एक तरफा आदेशों का कार्यान्वयन एवं दीपक्षीय फोरम के महत्व को घटाना उद्योग एवं श्रम हित में नहीं है बताया। उन्होंने विगत वर्ष 2025 में स्कीम के अतिरिक्त भुगतान के प्रबंधन के ऑफर, जो हस्ताक्षर नहीं होने के कारण नहीं मिला, उसे ध्यान में रखते हुए इस बार समझौता कर भुगतान की बात कही। उसके बाद सीटू के ललित मिश्रा ने श्री रेड्डी जी के बातों का समर्थन करते हुए समझौता करने के बाद भुगतान करने की बात कही। उन्होंने कोई भी रकम या स्पष्ट प्रस्ताव या मांग अपने तरफ से नहीं रखा।
विद्यासागर गिरी ने आंकड़े रखे, 40 हजार प्लस मांगे थे
एटक के विद्यासागर गिरि ने निदेशक कार्मिक को आंकड़े के साथ बताया कि स्कीम के ही अंतर्गत पिछले वर्ष प्रबंधन द्वारा 29500 श्रमिकों के खाता में भेजा गया था। विगत वर्ष वार्ता में उस रकम के अतिरिक्त सेल माइंस एवं अन्य उपलब्धियां के मध्येनजर जो अतिरिक्त रकम देने की पेशकश तत्कालीन निदेशक वित्त एके पंडा,जो अब सेल के सीएमडी हैं, ने किया था, जो नहीं दिया गया। उस बात को ध्यान में रखते हुए और भुगतान किए गए रकम 29500 को ही आधार बनाकर विगत वर्ष की तुलना में इस वर्ष बढ़ा उत्पादन ,उत्पादकता, मुनाफा, श्रम खर्च कमी, एवं अन्य फैक्टर में हुई उपलब्धियां के अनुपात में गणना किया जाए।
श्री गिरि ने बताया कि विगत वर्ष की तुलना में उत्पादन में 1.4% ,बिक्री मात्रा में 11.4%, परिचालन राजस्व मात्रा में 8.1%, इवीटाडा में 11.7 परसेंट, पीबीटी में 44.2% एवं पीएटी में 50.50% की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि को अगर विगत वर्ष के भुगतान 29500 को उपरोक्त सारे पैरामीटर में वृद्धि अनुपात में जोड़ा जाए तो पीबीटी वृद्धि 44% को 29500× 1.44 किया जाए तो 42480 बनता है। और सिर्फ पीएटी वृद्धि 50.5% यानी 29500 ×1.505 किया जाए तो 44900 बनता है। अगर इसमें बिक्री, श्रम उत्पादकता आदि जोड़ा जाए तो 45000 रुपए दिया जाना चाहिए।
वार्ता में सिर्फ गिरि ने ही आंकड़ों के आधार पर रकम देने और कैपटिव खदानों की उपलब्धियां को भी शामिल करने की बात कही थी। इस पर निदेशक कार्मिक ने कहा की स्कीम में मुनाफे को भी जोड़ने कर सुधार कर लीजिए जो बैठक का मुद्दा नहीं था। उसके बाद संजय बढ़ावकर एसएमएस एवं रंजय कुमार सिंह बीएमएस ने भी पूर्व के पूर्व के सभी वक्ताओं के भावनाओं का समर्थन करते हुए विगत वर्ष की कमी को पूरा करते हुए स्कीम के निष्कर्ष से ऊपर भुगतान करने की बात करते हुए फैसला लेने की बात कही।
संजीवा रेड्डी ने रखा था 32 हजार का प्रस्ताव
परंतु निदेशक कार्मिक ने साफ कहा की स्कीम की गणना से ऊपर कोई भी रकम देने का मैंडेट नहीं है। वे अपनी बात पर अडे रहे और मैंडेट नहीं है दुहराते रहे। पर सभी नेता भी स्कीम से ऊपर देने की बात करते रहे। अंततः वरिष्ठ नेता संजीव रेड्डी ने प्रबंधन के अडियल रूख और जिद्द की स्थिति की गंभीरता, और बैठक के पूर्व नेताओं के फैसले को देखते हुए 32000 रुपए देने का प्रस्ताव दिया। निदेशक कार्मिक ने उसके बाद सीएमडी से संपर्क कर स्वीकृति लिया और उसके बाद हस्ताक्षर हेतु प्रारूप बनवाया गया।
सीटू नेताओं पर एटक का ये आरोप
इसके बाद सीटू नेता अपने नेता से बात करने की बात कर बाहर निकले एवं लौट कर कहा कि उनका फोन नहीं लग रहा है, इसलिए बिना सहमति के हस्ताक्षर नहीं कर सकते हैं। अन्य सभी ने फसलों के अनुरूप हस्ताक्षर किया।
विद्यासागर गिरी ने कहा-आश्चर्य है कि हमारे सीटू के भाई यहां से लौट कर सोशल मीडिया में झूठ और असत्य का प्रचार कर रहे हैं। आज सब आज सबको एकजुट होकर सरकारी निर्देश में हो रहे हमलों का प्रतिकार करने का समय है, उसकी जगह मजदूरों को भ्रमित करने के लिए वह अपनी मांग 40000 की बात कर रहे हैं, जो कभी मीटिंग में कहा ही नहीं। पता नहीं ऐसा झूठा सत्य बोलकर वह क्या उपलब्धि अर्जित करना चाहते हैं। आज सबसे बड़े हमले का दौर है।
श्रम अधिकार पर चोट हो रहे हैं, जिसे आते हुए समझ नहीं रहे हैं या अति क्रांतिकारिता और झूठ पर भोला बन अपने को सर्वाधिक क्रांतिकारी बताना चाहते हैं, जो वर्तमान स्थिति के लिए श्रम आंदोलन के हित में सही नहीं कहा जा सकता है।
ठेका मजदूर के मुद्दे अभी तक लंबित है उनके भी श्रम शक्ति को घटाने के लिए अभियान चल रहा है और इस्पात उद्योग में दुर्घटना तक दुर्घटनाएं हो रही है। ऐसी स्थिति में हम अपील करना चाहेंगे कि श्रम आंदोलन के हित में एक व्यापक एकता आज की जरूरत है, जिसको किसी भी रूप में कमजोर करना श्रम आंदोलन के प्रति अच्छा व्यवहार नहीं कहा जा सकता है।
