- छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में नई फ़सल आने पर नवाखाई का त्योहार मनाया जाता है।
सूचनाजी न्यूज, दुर्ग। अगर आप पूर्व घोषित 30 सितंबर की छुट्टी समझकर कोई प्लानिंग कर चुके हैं तो उसे बदल दीजिए। अब 30 सितंबर की छुट्टी को कैंसिल कर दिया गया है। इसके स्थान पर 28 अगस्त को अवकाश घोषित है।
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने सामान्य पुस्तक परिपत्र में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कैलेण्डर वर्ष 2025 के लिए पूर्व में घोषित स्थानीय अवकाश में परिवर्तन किया है। प्राप्त जानकारी अनुसार उन्होंने पूर्व में घोषित दशहरा (महाअष्टमी) के अवसर पर 30 सितंबर दिन मंगलवार अवकाश को परिवर्तित कर नवाखाई (नुआखाई) ऋषि पंचमी 28 अगस्त 2025 दिन गुरुवार को स्थानीय अवकाश घोषित किया है।
नवाखाई (नुआखाई) के बारे में जानकार बता रहे हैं कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति में नई फ़सल आने पर नवाखाई का त्योहार मनाया जाता है। जब भी कोई नई फ़सल आती है उसे देवताओं को अर्पित करना लोक संस्कृति में अत्यधिक आवश्यक माना जाता है।
बस्तर में भी यह त्योहार मनाया जाता है, इसे पंडुम कहते हैं। अलग अलग अवसर पर मनाए जाने वाले पंडुम के नाम अलग अलग है। यह पंडुम नई फ़सल मनुष्य द्वारा उपभोग से पहले देवताओं को अर्पित की जाती है। विना देवताओं को अर्पित किये वे फ़सल का उपभोग नही करते।
नुआखाई ओडिशा राज्य का एक प्रमुख कृषि पर्व है, जिसे खासकर पश्चिमी ओडिशा में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से किसानों द्वारा नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाता है, और इसका अर्थ होता है “नुआ” (नई) और “खाई” (खाना), यानी “नई फसल का भोजन”।