- याद रखें, पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल के माध्यम से अपराधियों से पूछताछ नहीं करते हैं।
- बैंक, पुलिस या किसी अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर कॉल करने वालों से सावधान रहें।
सूचनाजी न्यूज, दिल्ली। ठगों का गिरोह सक्रिय है। देशभर में ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट स्कैम’ के केस एक के बाद एक उजागर हो रहे। भोले-भाले लोग इसके जाल में फंसकर लाखों रुपए गंवा रहे हैं। आखिर, क्या है Digital Arrest Scam? इस बारे में आप विस्तार से यहां पढ़ेंगे। IDBI Bank Ltd. की ओर से जनहित में अपील जारी की गई है।
डिजिटल अरेस्ट एक प्रकार का छद्म-रूपण घोटाला है, जिसमें धोखेबाज़ एक कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर पीड़ित पर नशीले पदार्थों की तस्करी, धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण आदि जैसे अपराधों में उसकी संलिप्तता का आरोप लगाता है और पीड़ित को ऑनलाइन पूछताछ के लिए सहमत होने के लिए मजबूर करता है।
जानिए डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे काम करता है? How does a Digital Arrest Scam work?
- धोखेबाज़ पीड़ित के बारे में बुनियादी जानकारी इकट्ठा करता है, फिर एक कानून प्रवर्तन अधिकारी बनकर फ़ोन कॉल/वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ित से संपर्क करता है।
- धोखेबाज़ मनगढ़ंत सबूत दिखाता है, जिससे पीड़ित पर नशीले पदार्थों की तस्करी, धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण आदि जैसी अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया जाता है।
- फिर पीड़ित को एक दिन की लंबी पूछताछ के लिए वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है और धमकी दी जाती है कि अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उसे गिरफ़्तार कर लिया जाएगा (ऐसी हरकत को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है)।
- फिर पीड़ित को बताया जाता है कि सभी आरोपों से मुक्त होने के लिए, उन्हें जाँच पूरी होने तक अपने सभी बचत बैंक खातों से सारी धनराशि जाँच एजेंसी द्वारा संचालित खाते में स्थानांतरित करनी होगी।
- पीड़ित को आश्वासन दिया जाता है कि जाँच पूरी होने पर 2 से 3 दिनों में धनराशि उनके खाते में वापस जमा कर दी जाएगी। पीड़ित से इस बातचीत/जाँच के बारे में कोई भी जानकारी न बताने को कहा जाता है।
- पीड़ित, बिना सोचे-समझे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए राशि स्थानांतरित कर देता है।
एहतियाती उपाय क्या उठाएं: Precautionary Measures
- अपनी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी सुरक्षित रखें।
- अपनी संवेदनशील जानकारी कभी भी अज्ञात व्यक्तियों या संगठनों के साथ साझा न करें।
- चाहे वह फ़ोन, वीडियो कॉल, सोशल मीडिया ऐप, ईमेल आदि पर ही क्यों न हो।
- सोशल मीडिया ऐप के माध्यम से प्राप्त अवांछित वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, एसएमएस, ईमेल या संदेशों से सावधान रहें।
- याद रखें, पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल के माध्यम से अपराधियों से पूछताछ नहीं करते हैं।
- बैंक, पुलिस या किसी अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी का रूप धारण करने वाले अज्ञात कॉल करने वालों से सावधान रहें।
- असली दिखने के लिए, ये जालसाज़ विभिन्न प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी प्रोफ़ाइल तस्वीर के रूप में विभिन्न कानून प्रवर्तन विभागों के लोगो का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- घबराएँ नहीं और जल्दबाज़ी में कोई कदम न उठाएँ। कोई भी लेन-देन करने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले, समय लेना, सभी आवश्यक जानकारी इकट्ठा करना और उचित जाँच-पड़ताल करना हमेशा बेहतर होता है।
- संदेह होने पर, आपके ख़िलाफ़ लगाए जा रहे आपराधिक आरोपों की वैधता की पुष्टि के लिए कानूनी पेशेवरों या कानून प्रवर्तन अधिकारियों से सहायता लें।
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