INTUC चुनाव 4 जनवरी को: संजीवा रेड्डी ही रहेंगे अध्यक्ष, महासचिव संग 61 पदों पर चुनाव, वंश बहादुर-संजय साहू मैदान में

INTUC Elections on January 4 Sanjeeva Reddy will Remain President Elections will be held for 61 Posts including General Secretary, Vansh Bahadur and Sanjay Sahu will Contest

रिटायर होने के बाद जो लंबे समय तक पद पर रहते हैं, उनको लेकर गलत मैसेज ही गया है।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील इम्प्लाइज यूनियन इंटक का चुनाव 4 जनवरी को है। 61 पदों पर पदाधिकारियों का चुनाव 3 साल के लिए होगा। लेकिन, अध्यक्ष पद पर डाक्टर जी.संजीवा रेड्डी को निर्विरोध चुना जाएगा। इस पद पर कोई दावा नहीं करेगा। खास बात यह है कि पिछले चुनाव में महासचिव पद पर एक वोट से जीतने वाले एनजेसीएस सदस्य वंश बहादुर सिंह फिर से मैदान में हैं। वहीं, चुनाव हारने वाले संजय साहू भी ताल ठोकने जा रहे हैं।

पिछले चुनाव के दौरान कई पदाधिकारी हार गए थे। यूनियन कार्यालय आना बंद कर दिए थे। करीब 14 पदाधिकारी हारे थे। इससे संगठन पर असर पड़ा। हारने के बाद सिर्फ प्रतिनिधि ही रह गए थे। इसको देखते हुए अब पदाधिकारी चाह रहे हैं कि आम सहमति बनाई जाए और सबको संगठित करके यूनियन हित में काम किया जाए।

बता दें कि अध्यक्ष के 1, महासचिव के 1, अतिरिक्त महासचिव 1, कार्यकारी अध्यक्ष के 2 पद, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, उपाध्यक्ष के 8 पद, कोषाध्यक्ष 1, सहायक कोषाध्यक्ष 1, उप महासचिव 8 पद, वरिष्ठ सचिव 6, सचिव के 28 पद पद पर चुनाव होगा।

22 दिसंबर से चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। पहले प्रतिनिधि का चुनाव होगा। यही प्रतिनिधि कार्यकारिणी सदस्य चुनेंगे। इसके बाद पदाधिकारियों का चुनाव होगा।

चुनाव अधिकारी इंटक प्रदेश सेक्रेटरी जनरल आशीष यादव हैं। वह एनएमडीसी के जनरल सेक्रेटरी हैं। पिछला चुनाव भी इनकी देखरेख में कराया गया था। दो सहायक निर्वाचन अधिकारी एके विश्वास और उमापति मिश्र को नामित किया गया है।

इंटक नेताओं का कहना है कि बहुत से ऐसे पदाधिकारी हैं, जो रिटायर हो चुके हैं। दोबारा यूनियन में पद लेना चाहते हैं। इसके लिए अभी से दांव-पेंच चलना शुरू कर चुके हैं। ऐसे पदाधिकारियों के खिलाफ भी यूनियन में आवाज उठनी शुरू हो गई है। ज्यादातर पदाधिकारी चाहते हैं कि आम सहमति से चुनाव हो जाए। जिस पद पर सहमति नहीं बनेगी, वहां चुनाव होगा।

विधान के अनुसार रिटायर्ड कर्मचारी पदाधिकारी बन सकते हैं। कम से कम रिटायर्ड को ही पदाधिकारी बनाया जाए, इस पर भी जोर है, जो यूनियन के लिए अच्छा होगा। रिटायर होने के बाद जो लंबे समय तक पद पर रहते हैं, उनको लेकर गलत मैसेज ही गया है।