इस्पात मंत्री से मिले SEFI चेयरमैन, RINL वेतन, प्रमोशन, सेल मकान, कब्जे, पेंशन पर पर लगी अर्जी

SEFI Chairman Meets Steel Minister, Gets Assurances on RINL Salary, Promotion, SAIL Housing, Pension
  • केन्द्रीय इस्पात मंत्री श्री एच डी कुमारस्वामी से दिल्ली में सेफी ने की मुलाकात।
  • आरआईएनएल के कार्मिकों के वेतन भुगतान हेतु डीपीई के दिशा-निर्देशों की अवहेलना पर चर्चा। 
  • अन्यायपूर्ण आदेश एवं आरआईएनएल के अधिकारियों के लंबित प्रमोशन पर चर्चा की।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेफी ने आरआईएनएल के कार्मिकों के वेतन भुगतान हेतु निकाले गए अन्यायपूर्ण आदेश एवं अधिकारियों के लंबित प्रमोशन, सेल में एचआरए पालिसी, सेल पेंशन स्कीम व कंपनी के बड़े मकानों में थर्ड पार्टी के कब्जों से मुक्त करवाने के लिए चर्चा की।

सेफी चेयरमैन नरेन्द्र कुमार बंछोर के नेतृत्व में केन्द्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी से नई दिल्ली में उनके निवास कार्यालय में भेंट की। इस दौरान सेफी के महासचिव संजय आर्या, उपाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह, सेफी संयुक्त सचिव केवीडी प्रसाद व सेफी सदस्य अबकाश बेहरा उपस्थित थे।

जिसमें मुख्य तौर पर आरआईएनएल के कार्मिकों के वेतन भुगतान हेतु डीपीई के दिशानिर्देशों की अवहेलना करते हुए निकाले गए अन्यायपूर्ण आदेश एवं आरआईएनएल के अधिकारियों के लंबित प्रमोशन, सेल में एकसमान एचआरए, डीपीई के दिशानिर्देशों के अनुसार सेल पेंशन स्कीम में सुधार, सेल के कई इकाईयों में बड़े मकानों में थर्ड पार्टी कब्जों से मुक्ति व सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों के निजीकरण के स्थान पर इसके पुर्नगठन, रणनीतिक साझेदारी/विलय आदि मुद्दों पर संक्षिप्त चर्चा की एवं ज्ञापन सौंपा।

सेफी के चेयरमेन नरेन्द्र कुमार बंछोर ने राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) के प्रबंधन द्वारा दिनांक 15.11.2025 को जारी परिपत्र संख्या 03/2025 के तहत वेतन को औसत उत्पादन लक्ष्य के प्राप्ति के अनुपात में वेतन भुगतान की व्यवस्था की गई है जो कि अन्यायपूर्ण होने के साथ ही विधिसम्मत नहीं है।

अतः इस तरह के अन्यायपूर्ण आदेश का सेफी ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इस आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने हेतु इस्पात मंत्री एसडी कुमारस्वामी से उनके दखल का अनुरोध किया।

विदित हो कि आरआईएनएल प्रबंधन ने अपने इस आदेश में डीपीई दिशानिर्देशों की अवहेलना के साथ ही श्रम नियमों की भी अनदेखी कर वेतन निर्धारण का फार्मूला तय किया है, जो किसी भी परिस्थिति में तर्कसंगत व न्यायसंगत नहीं है।

आरआईएनएल प्रबंधन के इस आदेश के तहत नवंबर 2025 माह से वेतन का भुगतान प्राप्त उत्पादन लक्ष्यों के अनुपात में किया गया है। जिसके तहत नवम्बर माह में वेतन भुगतान कोक ओवन दृ 93 प्रतिशत, सिन्टर प्लांट – 80 प्रतिशत, ब्लास्ट फर्नेस 83 प्रतिशत, एसएमएस – 81 प्रतिशत, रोलिंग मिल्स – 79 प्रतिशत, मार्केटिंग-84 प्रतिशत, अन्य – 83 प्रतिशत, एमएम दृ 66 प्रतिशत। इस प्रकार के वेतन के वितरण से कार्मिकों में काफी असंतोष है, जो किसी भी सार्वजनिक उपक्रमों में लागू नहीं है।

इस तरह का वितरण डीपीई द्वारा जारी अधिनियमों और दिशानिर्देशों के विरुद्ध है। सेफी ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इस आदेश को गैरविधिसम्मत और अन्यायपूर्ण माना है। इस संदर्भ में सेफी के अध्यक्ष ने बताया कि प्रत्येक कार्मिक का मूल वेतन एवं डीए कानूनी रूप से संरक्षित वेतन हैं, ये वेतन उत्पादन या प्रदर्शन आधारित नहीं होते, इसलिए इन्हें किसी भी प्रकार के उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप अनुपातिक रूप से इस वेतन को परिवर्तित नहीं किया जा सकता। परिभाषा के अनुसार तथा स्थापित न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर, यह पद के लिए न्यूनतम गारंटीकृत वेतन है।
डीपीई दिशानिर्देश मूल वेतन, डी.ए., पर्क्स, पी.आर.पी. तथा सेवानिवृत्ति लाभों की संरचना को स्पष्ट रूप से परिभाषित करते हैं। इनमें से केवल प्रदर्शन-आधारित वेतन (पीआरपी) को ही कंपनी के लाभ से जोड़ा जा सकता है।

डी.ए. को सरकार द्वारा त्रैमासिक संशोधित किया जाता है और इसका उद्देश्य केवल मुद्रास्फीति का प्रभाव कम करना तथा क्रय-शक्ति की रक्षा करना है। मूल वेतन और डी.ए. का सम्मिलित भाग ही पीएफ जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों की गणना का आधार है।

स्टील उत्पादन एक पूर्णतः एकीकृत प्रक्रिया है। यदि किसी कारणवश ब्लास्ट फर्नेस प्रभावित हो, तो उसकी सीधी प्रभाव श्रृंखला स्टील मेल्टिंग शॉप व रोलिंग मिल पर पड़ती है। ऐसी स्थिति में क्षमता उपयोग का लक्ष्य पूरा न होने पर वेतन काटना तकनीकी रूप से भी अव्यावहारिक है। निर्धारित वेतन पाना प्रत्येक कार्मिक का अधिकार है।

सेफी ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री को अवगत कराया कि आरआईएनएल अधिकारियों का प्रमोशन लगभग 04 वर्षों से लंबित है। तीसरा पे-रिविजन लागू नहीं होने के कारण कार्मिकों का मनोबल टुटा हुआ है, उन परिस्थितियों में प्रमोशन न मिलने से भी अधिकारी हतोत्साहित हैं।

सेफी ने इस्पात मंत्री को सेल में डीपीई दिशानिर्देशों के अनुरूप एक समान एचआर लागू करवाने हेतु दखल देने का अनुरोध किया व उनसे आग्रह किया कि आज भिलाई टाउनशिप में ऐसे छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारी जो दुर्ग जिले में पदस्थ नहीं है उनका अन्यंत्र स्थानांतरण हो चुका है या वे सेवानिवृत्त हो चुके हैं उसके बाद भी वे बीएसपी के बड़े मकानों पर काबिज हैं।

कुछ जनप्रतिनिधियों व पूर्व जनप्रतिनिधियों ने एक से ज्यादा बड़े मकानों का कब्जा किया हुआ है। कई बड़े मकानों पर इस प्रकार के कब्जे के चलते सेल अधिकारियों को अपने ग्रेड के अनुरूप बेहतर आवास प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। अतः इन कब्जों को शीघ्रातिशीघ्र खाली करवाने हेतु इस्पात मंत्री जी से दखल देने की मांग की। जिससे बीएसपी अधिकारियों को बेहतर आवास प्राप्त हो सके।

नरेंद्र बंछोर ने सेल के अधिकारियों के पेंशन को डीपीई दिशानिर्देशों के अनुरूप प्रदान करने की पुरजोर मांग रखी। श्री बंछोर ने इस्पात मंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि डीपीई दिशानिर्देशों के अनुसार सेल में 30 प्रतिशत सेवानिवृत्ति लाभ सुनिश्चित करने के लिए कृपया आवश्यक दिशानिर्देश जारी करें।

जिससे डीपीई दिशानिर्देशों की सही भावना के अनुरूप मासिक आधार पर 9 प्रतिशत की दर से पेंशन का अंशदान हस्तांतरित किया जाए। इसके साथ ही एनपीएस में सेल द्वारा निधि हस्तांतरण की वास्तविक तिथि 01/01/2007 से है परंतु सेल ने यह राशि अत्यधिक विलंब से प्रदान की है। अतः इस राशि पर सेल को प्रतिपूरक/उपार्जित ब्याज प्रदान किया जाना चाहिए।

एनके बंछोर ने जोर देकर कहा कि सेल पेंशन योजना को समय पर लागू नहीं किया गया और यह द्वितीय वेतन संशोधन के डीपीई दिशानिर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन था। चूंकि पेंशन कर्मचारी का अधिकार है, ताकि वह अपने स्वर्णिम वर्षों को संगठन को समर्पित करने के बाद सम्मानजनक जीवन जी सके।

सेफी ने केन्द्रीय इस्पात मंत्री को अवगत कराया कि नगरनार इस्पात संयंत्र 3 एमटी की क्षमता के साथ 24000 करोड़ की लागत से अत्यंत आधुनिक तकनीक के साथ बना इस्पात संयंत्र है जो कि कच्चे लौह अयस्क की खदानों से परिपूर्ण इकाई है।

इसे चलाने के लिए मात्र 200 अधिकारी एवं 1000 कर्मचारी उपलब्ध है जो कि अपर्याप्त है। इन परिस्थितियों में इस संयंत्र की भी लाभार्जन क्षमता भारी रूप से प्रभावित हुई है। इसी प्रकार राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड 7.3 एमटी की क्षमता के साथ कुशल तकनीकी विशेषज्ञों से परिपूर्ण इकाई है जो कि वर्तमान में कच्चे लौह अयस्क की कमी एवं ऊंची कीमतों से जूझ रहा है।

सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात उपक्रमों के अधिकारियों का अपेक्स संगठन सेफी प्रारंभ से ही सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश के स्थान पर पुर्नगठन तथा रणनीतिक समायोजन पर जोर देता रहा है। सेफी का मत है कि भारत सरकार की नवीन इस्पात नीति 2030 के तहत इस्पात मंत्रालय के द्वारा सेल को क्षमता विस्तार हेतु निर्देशित किया गया है, इसके अंतर्गत सेल को वर्ष 2030 तक 35 एमटी की क्षमता अर्जित करने का लक्ष्य दिया गया है।

इस विस्तार हेतु सेल के द्वारा 1 लाख करोड़ रूपये की राशि का निवेश किया जाएगा। सेफी ने यह मांग की कि सेल के वर्तमान विस्तार के योजनाओं को ध्यान में रखते हुए इस्पात क्षेत्र के दो सार्वजनिक उपक्रमों नगरनार इस्पात संयंत्र एवं राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड जिनकी क्षमता क्रमशः 3 एमटी एवं 7 एमटी है, अतः इन दोनों कंपनियों का सेल में रणनीतिक साझेदारी/विलय कर दिया जाए तो वर्तमान में दिए गए विस्तारीकरण के लक्ष्य को शीघ्र ही हासिल किया जा सकेगा।

यह कदम जहां सेल के उत्पादन क्षमता को शीघ्र बढ़ाने में मददगार होगा वहीं इन राष्ट्रीय संपत्तियों को विनिवेश से बचाया जा सकेगा और इनके संपूर्ण क्षमता का उपयोग किया जा सकेगा। इसके साथ ही इन इकाईयों में कार्यरत कार्मिकों के हितों की भी रक्षा की जा सकेगी।

इस्पात मंत्री द्वारा सेफी को सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों के इन समस्याओं को हल करने हेतु शीघ्र ही मीटिंग बुलाने का आश्वासन दिया।