SESBF फंड NPS में ट्रांसफर करने के खिलाफ सीटू उतरा सड़क पर, कहा-रिटायरमेंट पर नहीं मिलेगा 8 से 10 लाख

  • बहुमत के निर्णय का विरोध करते हुए सीटू ने किया प्रदर्शन।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल कर्मचारियों और अधिकारियों के एसईएसबीएफ फंड का पैसा एनपीएस में ट्रांसफर करने के खिलाफ पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू ने भिलाई के बोरिया गेट पर विरोध-प्रदर्शन किया। बीएसपी प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर किया है।

सीटू नेताओं ने कहा-SESBF के फंड पर सर्वसम्मति से निर्णय लेने की बात उसी दिन तय कर दी गई थी, जब इस ट्रस्ट का गठन किया गया था। आज प्रबंधन सर्वसम्मति के बात को ताक पर रखकर हर किस्म का निर्णय ले रहा है, जिसका विरोध करते हुए दिल्ली के स्तर पर केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि, मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधि, सेफी के प्रतिनिधि एवं प्रबंधन के उच्च अधिकारियों को लेकर एक विस्तारित बैठक कर उचित निर्णय लेने के आशय का पत्र औद्योगिक संबंध विभाग के माध्यम से SESBF के अध्यक्ष को प्रेषित किया गया।

सामाजिक सुरक्षा को बाजार के हवाले करना ठीक नहीं

ग्रेच्युटी, सीपीएफ, पेंशन तथा सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाले अन्य फंड सभी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आते हैं और कर्मचारी संयंत्र में अपने भर्ती के समय से ही इन मदों में पैसा जमा करना शुरू करता है ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उनकी जिंदगी अच्छे से बीत सके। इन पैसों पर निश्चित रिटर्न का प्लान होना चाहिए किंतु प्रबंधन और सरकार मिलकर इस पैसे को बाजार के हवाले कर रही है जो हमेशा अस्थिर रहता है इस पर रोक लगना चाहिए।

कोलकाता में 02 फरवरी 2026 को एस ई एस बी एफ की हुई बैठक के मिनट्स द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार बहुमत से ट्रस्ट को भंग कर लगभग 2400 करोड़ रुपए की संचित निधि को एनपीएस अर्थात बाजार जोखिम में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है, जिसका सीटू ने विरोध किया है।

अब सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों को नहीं मिलेगा 8 से 10 लाख रुपए

सीटू महासचिव टी.जोगा राव ने कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों को एससीएसबीएफ के मद में 8 से 10 लाख रुपया मिल रहा है। किंतु जैसे ही इस मद को मार्केट के हवाले कर दिया जाएगा, उसके बाद से निश्चित रिटर्न के साथ अब यह पैसा मिलना बंद हो जाएगा और कर्मियों को मार्केट आधारित फंड पर निर्भर होना पड़ेगा। स्थिति से बचने के लिए ही सीटू संघर्ष को चला रहा है।

प्रबंधन 2002 में ही समाप्त कर देना था चाहता था SESBF ट्रस्ट को

सीटू के सहायक महासचिव जगन्नाथ प्रसाद त्रिवेदी ने कहा कि ईपीएस 95 आने के बाद प्रबंधन, ट्रस्ट को समाप्त करने के लिए 2002 से ही पीछे लगा था और सीटू उस समय से इस ट्रस्ट को समाप्त करने के खिलाफ लड़ता आया है, जिसके परिणाम स्वरूप आज सेवानिवृत्ति होते समय कर्मियों को 8 से 10 लाख रुपया इस मद में मिल रहा है।

SESBF को भंग करने का तरीका भी लिखा हुआ है बॉयलाज़ में
सीटू नेता डीवीएस रेड्डी ने कहा-ट्रस्ट डीड की धारा 18 (ट्रस्ट की समाप्ति) के उपधारा (b) में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि यदि सभी न्यासी सर्वसम्मति से निर्णय लें, तभी ट्रस्ट को भंग किया जा सकता है। जबकि सीटू से उपस्थित न्यासी ने आपके प्रस्ताव से असहमति व्यक्त की थी तथा केंद्रीय ट्रेड यूनियन सीटू के दो प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित नहीं हो सके थे, जिनमें से एक प्रबंध न्यासी सदस्य भी थे। अतः उनकी सहमति भी प्राप्त नहीं हुई।

आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है ट्रस्ट के बॉयलाज़ के खिलाफ काम करना
सीटू मानता है कि ट्रस्ट में सेल के कामगारों का पैसा है इसके संचालन के लिए नियमावली बनी हुई है, जिसका उल्लंघन करना आर्थिक अपराध के दायरे में आता है। इस संदर्भ में सीटू की मैनेजिंग ट्रस्टी ने SESBF के अध्यक्ष को पत्र भी लिखकर आगाह किया है बावजूद इसके उल्लंघन होने पर ट्रस्टी कानूनी प्रक्रिया अर्थात मुकदमे बाजी में उलझ सकते हैं।