क्या फिर से आंदोलन की भेंट चढ़ेगा SAIL BSL का विस्तारीकरण, 20,000 करोड़ के प्रोजेक्ट पर खतरा, प्रबंधन की अपील जरूर पढ़ें आंदोलनकारी

SAIL BSL Bokaro Steel Plant on the Verge of a Major Uproar 20,000 Crore Project in Danger, Managements Appeal Must be Read by Protesters 1
  • संयंत्र के विस्तारीकरण हेतु लगभग 20,000 करोड़ रुपये के निवेश से रोजगार, आधारभूत संरचना और औद्योगिक प्रगति पर जोर।
  • पिछले साल जैसा फिर से कोई बड़ा आंदोलन होगा, तो प्रोजेक्ट प्रभावित होगा। अंतत: सभी स्टेकहोल्डर को इससे नुकसान होता है।
  • काफी मशक्क़त और प्रयास के बाद अब रुका हुए विस्तारीकरण प्रोजेक्ट के टेंडर निकलने लगे हैं और एक सकारात्मक माहौल बना है।
  • प्रबंधन ने संवाद और शांति की अपील की; मुद्दों के समाधान के सकारात्मक प्रयास जारी। 

सूचनाजी न्यूज, बोकारो। Steel Authority of India Limited की प्रमुख इकाई Bokaro Steel Plant का माहौल एक बार फिर तनावपूर्ण होने जा रहा है। 3 अप्रैल 2025 को विस्थापितों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक युवक की मौत हो गई थी। प्लांट को घेर लिया गया था। आगजनी की गई थी। एक साल बाद फिर से पीड़ित परिवार 6 मार्च से बीएसएल के एडीएम बिल्डिंग के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम पर सेल बीएसएल मैनेजमेंट का कहना है कि पिछले साल अप्रैल महीने में कुछ विस्थापित समूहों द्वारा बोकारो स्टील के प्रशासनिक भवन के समक्ष उग्र आंदोलन के दौरान एक प्रदर्शन कारी प्रेम महतो की मृत्यु हो गई थी।

इसके एवज में उन्हें मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया गया था और परिवार के एक सदस्य को प्लांट में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी देने का प्रस्ताव मैनेजमेंट ने दिया था। परन्तु वे इसे स्वीकार नहीं किए और स्थायी जॉब के डिमांड पर अड़े रहे। इसी तरह कुछ और भी उनका डिमांड है, जिसपर लगातार वार्ता होती रही है।

इस बीच अब उस समूह ने 6 मार्च से पुन: अनिश्चितकालीन धरना का नोटिस दिया है। पिछले साल के दुर्भाग्यपूर्ण घटना से बोकारो स्टील को काफी नुकसान पहले ही हो चुका, यहाँ तक कि प्लांट का एक्सपेंशन प्रोजेक्ट भी लंबे समय तक लटका रहा।

काफी मशक्क़त और प्रयास के बाद अब रुका हुए विस्तारीकरण प्रोजेक्ट के टेंडर निकलने लगे हैं और एक सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे समय में यदि फिर से कोई बड़ा आंदोलन होगा, तो काम फिर प्रभावित होगा। अंतत: सभी स्टेकहोल्डर को इससे नुकसान होता है।

बोकारो स्टील की ओर से यह एक अपील की तरह है कि कोई भी समूह ऐसा कुछ न करे, बल्कि संवाद के माध्यम से शांतिपूर्ण तरीके से समाधान के रास्ते अपनाए।

अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है बीएसएल
केवल एक औद्योगिक प्रतिष्ठान नहीं, बल्कि पूरे बोकारो स्टील सिटी और आसपास के क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। यह संयंत्र 20 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तथा बड़ी संख्या में अन्य लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराता है। छोटे व्यवसायों की आजीविका, शिक्षा-स्वास्थ्य जैसी सामाजिक व्यवस्थाएं और क्षेत्रीय विकास – सभी इस संयंत्र की स्थिरता और सतत उत्पादन पर निर्भर हैं।

घटनाएं बोकारो को आगे बढ़ाने के बजाय धकेलती हैं वर्षों के लिए पीछे

पूर्व में हुए अवरोध और हिंसक विरोध से उत्पादन, वित्तीय प्रदर्शन और विस्तार योजनाएं गंभीर रूप से प्रभावित हुई थीं, जिससे विकास की रफ्तार थम गई थी। ऐसी घटनाएं बोकारो को आगे बढ़ाने के बजाय वर्षों पीछे धकेल देती हैं। बड़ी कठिनाइयों और अथक प्रयासों के बाद ही निवेश और औद्योगिक विश्वास को पुनः स्थापित किया जा सका है।

लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निवेश

संयंत्र के विस्तारीकरण हेतु लगभग 20,000 करोड़ रुपये का निवेश रोजगार, आधारभूत संरचना और औद्योगिक प्रगति के नए द्वार खोलने जा रहा है। बोकारो स्टील प्लांट के विस्तारीकरण से सम्बंधित कई टेंडर निकल चुके और कई निकलने वाले हैं। इससे न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी, बल्कि विस्थापित युवाओं के लिए भी रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर सृजित होंगे। यह निवेश पूरे क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व विकास का आधार बन सकता है।

वित्तीय वर्ष का रिजल्ट भी ठीक नहीं

इस वित्त वर्ष पहले के 9 महीनों में प्लांट का वित्तीय प्रदर्शन भी उतना आशाजनक नहीं रहा है, हालांकि हाल के महीनों में इसने वापस रफ़्तार पकड़ी है. इसलिए ऐसे समय में, जब बोकारो में परिस्थितियाँ पुनः सामान्य हो रही हैं और विकास की रफ्तार फिर से पटरी पर लौट रही है, यहाँ के आद्योगिक-सामाजिक वातावरण में किसी भी समूह द्वारा अस्थिरता पैदा करना दुर्भाग्यपूर्ण होगा, क्योंकि किसी भी प्रकार का आंदोलन यदि संयंत्र के संचालन को बाधित करता है, तो उसका प्रभाव केवल प्रबंधन या कंपनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि एक बड़े जन समुदाय को प्रभावित करता है।

  • भारतीय नौसेना के युद्धपोत बनते हैं यहां के स्टील से

यह भी ध्यान देने योग्य है कि इस संयंत्र की भूमिका केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां निर्मित इस्पात देश की प्रमुख आधारभूत परियोजनाओं से लेकर भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तक में उपयोग होता है, जो राष्ट्र की आर्थिक और सामरिक शक्ति को सुदृढ़ करता है। पिछले एक वर्ष में ही नौसेना के अनेक नए जहाजों के निर्माण में बोकारो के इस्पात की आपूर्ति की गई है।

प्रबंधन बोला-संवाद करें, टकराव नहीं

लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण और रचनात्मक विरोध सभी का अधिकार है। परंतु यह भी उतना ही आवश्यक है कि विरोध का स्वरूप ऐसा हो, जिससे औद्योगिक माहौल, निवेश और रोजगार प्रभावित न हों। संवाद, सहयोग और आपसी समझ ही स्थायी समाधान का मार्ग हैं, टकराव नहीं।

संयंत्र प्रबंधन ने भी क्षेत्र की जनता खासकर विस्थापित समूहों और युवाओं के कई मुद्दों पर सकारात्मक पहल करते हुए उनके कल्याण के लिए कई कदम जैसे अप्रेंटिस युवाओं को संवेदकों द्वारा संयंत्र के कार्य में प्राथमिकता में नियोजन उपलब्ध कराना, विस्थापित ठेकेदारों को वरीयता के आधार पर कार्य उपलब्ध कराना इत्यादि उठायें है। प्लांट के विस्तारीकरण से ऐसे कल्याणकारी पहलों में और बढ़ोतरी होने की प्रबल संभावना है।

बोकारो की तरक्की, बोकारो स्टील प्लांट की तरक्की से सीधे जुड़ी है। इसलिए सभी हितधारकों और पक्षों से यह अपेक्षा है कि संयंत्र और शहर की शांति, सुरक्षा और निरंतरता बनाए रखने में उनका सहयोग रहे ताकि बोकारो और इस क्षेत्र की प्रगति जारी रहे ।