Bhilai Steel Plant मुख्यमंत्री, सांसद, विधायक, कलेक्टर की नहीं सुनता, व्यापारियों की अब राज्यपाल से गुहार, लीज के नाम पर करोड़ों का बोझ

Bhilai Steel Plant Refuses to Listen to the Chief Minister MP MLA or Collector Traders Now Appeal to the Governor
  • राज्यपाल से व्यापारियों ने लगाई गुहार।
  • सेल बीएसपी प्रबंधन पर लगाए गए गंभीर आरोप।
  • हाउस लीज, व्यापारिक संस्थाओं और बीएसपी की नीतियों का पत्र में जिक्र।

सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल के भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन की नीतियों और टाउनशिप के व्यापारियों के बीच टकराहट बढ़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के दरबार में भी व्यापारियों का दुखड़ा पहुंच गया है।

भिलाई स्टील सिटी चेंबर ऑफ कॉमर्स भिलाई के अध्यक्ष ज्ञानचंद जैन ने राज्यपाल रामेन डेका (Ramen Deka) को पत्र लिखकर भिलाई इस्पात संयंत्र-बीएसपी प्रबंधन के खिलाफ भड़ास निकाली है। महामहिम से गुहार लगाते हुए लिखा गया है कि वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, सांसद, राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्र के विधायक, आपके प्रतिनिधि जिलाधीश किसी के भी आदेशों का पालन वर्तमान प्रबंधन नहीं करता है।

भिलाई इस्पात संयंत्र से संबध्द समस्याएं और निराकरण हेतु विनम्र निवेदन किया। छत्तीसगढ़ राज्य के उपभोक्ता अत्यंत दुखी मन से निवेदन किया। राज्यपाल से गंभीरता से विचार कर समस्याओं के निराकरण में मार्गदर्शक बनने की गुहार लगाई है।

पढ़िए व्यापारियों के पत्र में क्या-क्या लिखा है…

-भिलाई इस्पात संयंत्र भारत सरकार के अधीन एक स्वामित्व धारी संस्था है जो केंद्र और राज्य सरकार की सहमति के बाद भिलाई इस्पात संयंत्र और यहां के उपभोक्ताओं के हितों में कार्य करती है।

-वर्तमान समय में भिलाई इस्पात संयंत्र ने अपने पुराने सभी नियमों को मालूम नहीं क्यों विलोपित कर दिया, जिसके तहत क्षेत्र के उपभोक्ताओं को पूर्व में राहत दिया करता था।

-मालूम नहीं केंद्र शासन ने ऐसे कौन से नियमों के तहत अधिकार भारतीय इस्पात प्राधिकरण को दे दिए हैं जो अंग्रेजों के शासन में भी नहीं थे।

-जब भारतीय इस्पात प्राधिकरण को कारखाने के विस्तारीकरण के लिए धन राशि की आवश्यकता थी तब केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ बैठकर भारतीय इस्पात प्राधिकरण ने अपने खंडहर घोषित मकान को हाउस लीज पद्धति पर 05 आसान स्कीम के तहत आवंटित किया।

-अपने नियम शर्तों के अनुरूप निर्माण की अनुमति दी। 2002 से 2006 तक इस प्रक्रिया का संचालन किया जाता रहा। केंद्र शासन के अधीन आने वाले जिन अधिकारी, कर्मचारियों ने इन आवासों को लीज पद्धति पर आबंटित कराया। उन्होंने 2006 से लेकर आज तक अपनी सुविधाओं के अनुरूप आवंटित भूमि के अंदर बिना बीएसपी प्रबंधन की अनुमति केअपनी सुविधा अनुसार निर्माण कर लिया है।

-निर्माण के समय किस तरह की रोक नहीं लगाई गई, बल्कि तत्कालीन अधिकारियों ने संरक्षण दिया।

-बीएससी प्रबंधन की लापरवाही से होने वाले अतिरिक्त निर्माण पर किसी तरह की रोक भिलाई इस्पात संयंत्र ने नहीं लगे,जिसका परिणाम है कि आज पूरे शहर मे लगभग 4500 आवास धारक, र्निमाण पश्चात् शारीरिक, मानसिक और आर्थिक प्रताडणा से जूझ रहे हैं।

ये है 1960 से लेकर 2007 तक के मामले

ज्ञानचंद जैन ने कहा-1960 से लेकर 2007 तक के आवंटित सामाजिक धार्मिक शैक्षणिक संस्थाओं सहित शहर के लाइसेंस अथवा लीज धारक दुकानदार जिन्हें उनके स्वयं के खर्च पर प्रथम और द्वितीय तल आवास र्निमाण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई और उन दिनों जो बाजार मूल्य प्रचलित थे, ले लिया गया था।

ऐसे मकानों के नवीनीकरण के समय नए-नए जटिल कानून जो उन दिनों हमारे साथ हुए पंजीयन के समय लागू नहीं थे एकतरफा निर्णय लेकर लागू कर दिया गया। वर्तमान समय में हमें बताया जाता है कि यह कानून 2008 सेल बोर्ड की मीटिंग में लिए गए बाजार मूल्य का निर्धारण भी एक बैंकिग व्यावसायिक संस्था द्वारा करवाया जाता है।

जिसने नवीनीकरण के लिए हमारे ऊपर करोड़ों रुपए का बोझ डाल दिया है, जिसका भुगतान किया जाना किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। पिछले 15 वर्षों से शहर के संबंधित उपभोक्ता परेशान है।

अध्यक्ष ने कहा-आपके समक्ष विस्तार से जानकारी दिया जाना इसलिए आवश्यक है, क्योंकि भिलाई इस्पात संयंत्र ने राज्य के मुख्यमंत्री को, ना सांसद और ना विधायक को और ना ही कलेक्टर को उपरोक्त विषय पर सुनना ही नहीं चाहता।

समस्याओं के समाधान के लिए व्यापारियों का सुझाव

01. आवंटन धारकों के साथ दिन पंजीकृत दस्तावेजों के साथ भूमि का आवंटन किया गया था और हमें निर्माण की अनुमति दी गई थी, उन्ही नियमों के तहत हमारे निर्माण को नियमित किया जाए।

02.भारतीय इस्पात प्राधिकरण की 340वीं बैठक वर्ष 2008 में लिए गए निर्णय में जिन्हें भूमि का आवंटन किया जाता है उन पर लागू किया जाए।

03. 1960 से लेकर 2006 तक निर्मित सामाजिक शैक्षणिक, धार्मिक, आवासीय एवं व्यवसायिक उपयोग की भूमि पर हमारे साथ हुए पंजीकृत दस्तावेजों के रूप कार्य किया जाए।

04. जिन आवंटन धारकों ने इन 50 वर्षों में जो भी अतिरिक्त निर्माण कर लिया है, उन निर्माण को राज्य शासन नगर पालिक निगम के नियमों के तहत नियमित करने के आदेश जारी किए जाएं।

05. यह भी निवेदन जब तक इस प्रकरण का निराकरण न हो तब तक भिलाई इस्पात संयंत्र किसी भी तरह की कार्यवाही संबंधित उपभोक्ताओ पर न करे।

-अन्यथा जब तक उपरोक्त आदेश आपकी कार्यालय से जारी नहीं होंगे तब तक भिलाई इस्पात संयंत्र यहां के निवासियों को शारीरिक,आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना देते रहेगा।