- भिलाई इस्पात संयंत्र में 9 अक्टूबर 2018 को कोक ओवन गैस पाइपलाइन में भीषण अग्निकांड हुआ था। 14 कार्मिकों की जान गई थी।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। सेल भिलाई स्टील प्लांट हादसे में 14 कार्मिकों की मौत पर जिन अफसरों को सस्पेंड किया गया था, अब उस कार्रवाई पर ही सवाल उठने लगे हैं। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र के इतिहास में 9 अक्टूबर 2018 की तारीख काले अक्षरों में लिखी हुई है।
कोक ओवन गैस पाइपलाइन हादसे ने 23 कर्मचारियों-अधिकारियों को चपेट में लिया था, जिसमें 14 की मौत हुई थी। हादसे के बाद तत्कालीन सीईओ, जीएम सेफ्टी और ईएमडी के डीजीएम को सस्पेंड किया गया था। लेकिन, श्रम न्यायालय के फैसले में तत्कालीन सीईओ एम. रवि, जीएम सेफ्टी टी. पांडियाराजा, ईएमडी के डीजीएम नवीन कुमार पर कोई आरोप सिद्ध ही नहीं किया गया। तत्कालीन ईडी वर्क्स पीके दास और कोक ओवन के एचओडी जीएसवी सुब्रमणियम को सजा दी है।
हादसे के बाद सियासी रोटी तक सेकी गई थी। आपसी रंजिश का फायदा उठाते हुए अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया गया। वहीं, कुछ अधिकारी ऐसे भी थे, जिन्होंने आग में घी तक डाला था। तत्कालीन इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह हादसे की अगली सुबह भिलाई पहुंचे थे। सेक्टर 9 हॉस्पिटल में घायलों का हालचाल जानने के बाद मीडिया से मुखातिब होकर तीनों अधिकारियों को सस्पेंड करने की जानकारी साझा की थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह, वर्तमान मुख्यमंत्री एवं तत्कालीन इस्पात राज्यमंत्री विष्णु देव साय मौजूद थे।
अब भी भिलाई स्टील प्लांट के अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा-जिस हादसे की सजा तीनों अधिकारियों को दी गई थी, उनको आरोपी तक नहीं माना गया। निश्चित रूप से पूरी कार्रवाई सियासी फायदे के लिए भी की गई थी। विधानसभा चुनाव भी नजदीक थे।
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बता दें कि श्रम न्यायधीश यशवंत कुमार सारथी ने पीके दास ईडी वर्क्स बीएसपी एवं कारखाना प्रबंधक कोक ओवन जीएसवी सुब्रमणियम को अभियुक्त मानते हुए सजा दी है। तत्कालीन उप संचालक औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा दुर्ग के उप मुख्य कारखाना निरीक्षक केके द्विवेदी के लिखित बयान और रिपोर्ट के आदेश पर सजा हुई है।
फैसले में उल्लेख है कि 9 अक्टूबर 2018 को कोक ओवन गैस पाइपलाइन के फ्लैंज ज्वाइंट में डी-ब्लैंकिं का कार्य करते हुए हादसा हुआ था। जबकि पाइपलाइन में गैस का प्रेशर 250 मिमी वाटर कॉलम से 300 मिमी थी। इस तरह असुरक्षित कार्य कराने से हादसा हुआ। विस्फोट हुआ और भीषण आग की चपेट में 23 कर्मचारी-अधिकारी आए। इनमें से 14 कर्मचारियों की मौत हुई।
अभियुक्तों की आयु 65 साल से अधिक होने से न्यायधीश ने पीके दास और जीएसवी सुब्रमणियम को न्यायालय उठने तक की सजा और एक-एक लाख का अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड की राशि अदा न करने पर एक-माह का साधारण कारावास की सजा होगी। प्रकरण में अभियुक्तगण के द्वारा प्रस्तुत जमानत मुचलके आगामी 6 माह तक प्रवृत्त रहेंगे।













