दिल्ली से ठेका श्रमिकों की संख्या 20% से 35% तक कम करने का निर्देश पुराने-मैन्युअल कार्यप्रणाली वाले स्टील प्लांटों के लिए गंभीर।
- सीटू नेता बोले-प्रबंधन को केवल खर्च घटाने के दृष्टिकोण से निर्णय नहीं लेना चाहिए। स्टील उद्योग में श्रमिक ही उत्पादन की रीढ़ हैं।
सूचनाजी न्यूज, भिलाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल में छंटनी के खिलाफ सीटू ने एक बार फिर गुस्सा जाहिर किया है। भिलाई स्टील प्लांट की पूर्व मान्यता प्राप्त यूनियन सीटू का कहना है कि दिल्ली से ठेका श्रमिकों में 20% से 35% तक कटौती का जो निर्देश दिया जा रहा है, वह पुराने और मैन्युअल कार्यप्रणाली वाले स्टील प्लांटों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अंतर्गत आने वाले भिलाई इस्पात संयंत्र जैसे संयंत्रों में अधिकांश कार्य आज भी श्रमिकों की प्रत्यक्ष मेहनत पर आधारित है।
कम मैनपावर से बढ़ रहा है कार्यभार
यूनियन नेताओं ने कहा-वास्तविक स्थिति यह है कि ठेका श्रमिकों की संख्या घटाने के बाद उत्पादन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। एक-एक श्रमिक से दो-दो शिफ्टों में काम लिया जा रहा है। लगातार अतिरिक्त ड्यूटी से श्रमिकों पर शारीरिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है, जिससे कार्य क्षमता और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो रही हैं।
सुरक्षा और उत्पादन पर खतरा
पुराने स्टील प्लांटों में मशीनें और कार्यप्रणालियाँ अत्यंत संवेदनशील होती हैं। पर्याप्त मैनपावर के बिना संचालन करने से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। थकान की स्थिति में काम करने वाले श्रमिकों से छोटी गलती भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसके साथ ही उत्पादन की गुणवत्ता और निरंतरता पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
विशाखापत्तनम मॉडल हर जगह लागू नहीं हो सकता
भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिकारियों को कम कर्मियों से काम कराने के मॉडल के अध्ययन हेतु राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड के विशाखापत्तनम स्टील प्लांट का दौरा कराया गया है। लेकिन प्रत्येक प्लांट की संरचना, तकनीक और कार्यप्रणाली अलग होती है। किसी दूसरे संयंत्र का मॉडल बिना स्थानीय परिस्थितियों को समझे लागू करना व्यावहारिक नहीं है।
श्रमिक हितों और सुरक्षा को प्राथमिकता मिले
सीटू नेता बोले-प्रबंधन को केवल खर्च घटाने के दृष्टिकोण से निर्णय नहीं लेना चाहिए। स्टील उद्योग में श्रमिक ही उत्पादन की रीढ़ हैं। सुरक्षित कार्य वातावरण, पर्याप्त मैनपावर, उत्पादन की निरंतरता और श्रमिकों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना ही उद्योग और उत्पादन दोनों के हित में होगा।

